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आमगांव खदान हुआ अशांत

आमगांव खदान हुआ अशांत

सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणअस्त्र शास्त्र से लैस हो कर रहे खुलेआम कोयला की डकैती

सुरक्षा कर्मचारियों की कमी इनके लिए दे रहा सुनहरा अवसर

सही रेट नहीं मिलने से घर में ही कर रहे हैं कोयला का संग्रह

गोपाल सिंह विद्रोही प्रदेश ख़बर प्रमुख छत्तीसगढ़ विश्रामपुर- एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के आमगांव खुली खदान से प्रतिदिन 400- 500 ग्रामीणगिरोह द्वारा खदान क्षेत्र में प्रवेश कर खुलेआम कोयला चोरी की जा रही है।बेखौफ ग्रामीण चोर गिरोह से भयभीत है कर्मचारी ,अधिकारी। पूरा खदान क्षेत्र अशांत हो चुका है । इन ग्रामीणों को रोकने टोकने वाला कोई नहीं है।

उल्लेखनीय है की एसईसीएल विश्रामपुर क्षेत्र के आमगांव खदान 4 वर्षों के बाद पुनःप्रारंभ गत 20 जुलाई 2022 को हुआ था और पहले दिन ही 345 टन कोयला उत्पादन किया था जो अब 15 सौ से 22 सौ टन कोयला का उत्पादन कर रहा है, जिसे आसपास की ग्रामों के ग्रामीण महिला पुरुष बच्चे सभी अस्त्र-शस्त्र से लैस खदान क्षेत्र में घुसकर दिनदहाड़े कोयला दिनभर चोरी कर रहे है जिसे रोकने टोकने वाला कोई नहीं है।
गुड़ का फायदा चींटी चाटने से अधिकारी कर्मचारी हुए मायूस

आमगांव खदान को पुनः चालू होने से कर्मचारियों अधिकारियों एवं क्षेत्रवासियों मे खुशी की लहर थी परंतु बेखौफ ग्रामीण चोर गिरोह द्वारा कोयला स्टॉक से खुलेआम कोयले की डकैती किए जाने से अब वे मायूस और निराश दिखे जा रहे हैं ।अधिकारी कर्मचारियों का कहना है कोयला का उत्पादन अथक प्रयास से प्रारंभ हुआ था ।करोड़ों के घाटे में चल रही विश्रामपुर कोयला खदान क्षेत्र को उम्मीद थी कि आमगांव खुली खदान प्रारंभ होने से बिश्रामपुर क्षेत्र को घाटे से उबारते हुए लाभांश की ओर ले जाएंगे परंतु कोयले का उत्पादन स्टाफ से सैकड़ों की संख्या में कोयला चोरी किए जाने से ऐसा प्रतीत हो रहा है की गुड़ का फायदा चींटी ही चाट जाएगी, तो ऐसी स्थिति में विश्रामपुर को लाभांश की पटरी पर लाना मुश्किल हो जाएगा।

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एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के महत्वकांक्षी परियोजना है आमगांव
आमगांव खुली खदान 4 वर्षो के बाद 20 जुलाई को 1 ट्रक व 21 जुलाई को 345 टन कोयला का उत्पादन कर अधिकारी एवं कर्मचारियों सहित क्षेत्रवासियों की चेहरे पर रौनक ला दी थी । बताया जाता है कि एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के महत्वकांक्षी परियोजना आमगांव खुली खदान का शुभारंभ अगस्त 2010 से प्रारंभ होकर 2018 तक ओबी (मिट्टी कटाई) का काम चला सितंबर 2018 में जमीन समस्या सहित कई कारणों से खदान बंद हो गई थी ।जनवरी 2021 सद्भावना जयभी कंपनी ने जमीन न मिलने के कारण कम छोड़कर चली गई। इसके बाद पुनः क्वायरी नंबर 1 में पुनः छूटा हुआ काम को वन विभाग से अनुमति मिलने के बाद बर्बरीक प्रोजेक्ट लिमिटेड सूरजपुर ने प्रारंभ किया गया ,इसी दौरान गत 24 जून 2022 को पानी में डूबा कोयला का सिम बाहर दिखा । कालरी सूत्र बताते हैं कि सिम बाहर आने के बाद 20 जुलाई को ब्लास्टिंग के साथ ही उत्पादन कार्य प्रारंभ कर दिया गया पहले दिन एक टीपर कोयला का उत्पादन से कार्य प्रारंभ किया गया। 21 जुलाई को 345 टन कोयला का उत्पादन खदान प्रारंभ हुई। कोयले के उत्पादन से कर्मचारियों अधिकारियों एवं क्षेत्रवासियों में काफी प्रसन्नता देखी जा रही थी जो आप दिन रात कोयला स्टॉक से ग्रामीणों द्वारा कोयला चोरी की घटनाओं में अधिकारी कर्मचारियों क्षेत्रवासियों को मायूस कर दिया है।
उच्च गुणवत्ता जी 10 ग्रेड का 35 हजार कोयला स्टॉक में है जिसे बेखौफ चोरी की जा रही है आमगांव खुली खदान में जी 10 ग्रेड का उच्च गुणवत्ता वाला कोयला पाया गया है ।कोयले का सिम ढाई मीटर का है। प्रतिदिन उत्पादन 2400 टन का लक्ष्य है जिसे पूरा करते खदान आगे बढ़ रहा है । 2 वर्षों में इस खदान से 18 लाख टन कोयला का उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। खदान की कायावधि 20 वर्षों की है। कोयला का उत्खनन कर माइंस परिसर में स्टॉक में रखा गया । ऑप्शन के माध्यम से जी 10 वाले कोयला लगभग 25000 टन कायला का डिस्पेच रोड सेल के माध्यम से 1200 रु प्रति टन कि दर से बिक्री की जा रही है वर्तमान में उत्पादित कोयला स्टॉक मे लगभग 35000 टन कोयला है।
कोयला स्टॉक से होती है चोरी जांच के दायरे में आकर फसते है अधिकारी
खदान से कोयला का उत्पादन कर कोयला सटक पंजीयन में एंट्री की जाति तो है परंतु कोयला का स्टाक से सैकड़ों ग्रामीण बेखौफ होकर कोयला की चोरी नहीं डकैती करते है जिससे कोयला की काफी कमी हो जाती है जब डीओ कटने रोड सेल के माध्यम से बिक्री के बाद पंजीयन में कोयला की कमी दिखती है तो सीधा संबंधित अधिकारी कर्मचारी जांच के दायरे में आ जाते हैं जिससे कई बार खामियाजा भी भागना पड़ा है, अभी हाल ही इसी प्रकार का एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के रेहर गायत्री खदान का भी मामला भी कोयला के स्टॉक की कमी का मामला आया था जिसका जांच में चल रही है। इस तरह खेत खाए गधा मार खाए जुलाहा की कहावत चरितार्थ होती है। और अधिकारी कर्मचारी जांच की पेचिंदगी की मार झेलने पड़ते हैं।
एसईसीएल कंपनी एवं राज्य को राजस्व की काफी हो रही है नुकसान
एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के खदान क्षेत्रों की सुरक्षा करना बहुत मुश्किल हो गया है ।खदान की सुरक्षा के लिए सुरक्षा गार्डों की काफी कमी है आमगांव खदान जो बिश्रामपुर क्षेत्र से 25 -30 किलोमीटर दायरा में फैला है का सुरक्षा 14 सुरक्षा प्रहरियों की जीमे है जो प्रथम द्वितीय तृतीय पालियों में काम करते हैं एक पाली में 3-4 ही गार्ड सुरक्षा का दायित्व निर्वहन करते है जिस पर चोर गिरोह काफी भारी पड़ते हैं ।पुलिसिया सहयोग न मिलने से सुरक्षा कर्मचारी भी खुद को असहाय पा रहे हैं ।इन सब कारणों से कोयला चोरों के लिए सुनहरा अवसर मिलता है जो बेखौफ होकर दिन भर कोयला का चोरी करते हैं। कोयला चोरी करने वाले ग्रामीणों में ग्राम साल्ही की उरांव पारा ,बड़का पारा ,मनवार पारा एवं समीपस्थ ग्राम पटना के भी महिला पुरुष एवं बच्चे शामिल है ।कोयला चोरी से एसईसीएल कंपनी एवं राज्य को राजस्व की काफी क्षति हो रही है

ग्रामीण चोरों को उचित रेट न मिलने से अपने घर में ही कर रहे हैं कोयला का संग्रह
बताया जाता है कि इन दिनों खदान क्षेत्रों से चोरी का कोयला का कीमत 1.50 पैसे से 2 रू कोयला तस्कर दे रहे हैं जिससे ग्रामीण उन्हें बेचना नहीं चाहते हैं। अपने घरों में ही कोयला संग्रह कर उसे बरसात के बाद 5 से 10 रू प्रति किलो की दर से बेचने के लिए घरों में स्टॉक कर रहे।

उल्लेखनीय है किआम गांव खदान 2010 से प्रारंभ हुई 2018 का ओबी का काम चालू हुआ परंतु वन विभाग एवं निजी जमीन विवाद के कारण बंद हो गई 4 वर्षों के बाद पुनः चालू हुई तो लोगों ने राहत की सांस ली परंतु बेखौफ कोयला चोरी से अधिकारी
कर्मचारियों क्षेत्रवासियों मायूस है।

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