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फुंडेर की श्रीमती मैनीबाई ने मछलीपालन को बनाया अतिरिक्त आय का जरिया 

कोण्डागांव : फुंडेर की श्रीमती मैनीबाई ने मछलीपालन को बनाया अतिरिक्त आय का जरिया 
श्रीमती मैनीबाई

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राज्य शासन द्वारा मछलीपालन को कृषि का दर्जा दिये जाने के फलस्वरूप प्रदेश सहित कोण्डागांव जिले के मछली पालक किसान उत्साहित हैं। राज्य शासन द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उठाकर अब छत्तीसगढ़ की महिलाएं भी मछलीपालन करके आर्थिक सम्पन्नता की ओर अग्रसर हो रही हैं। वे स्वयं तो आत्मनिर्भर की ओर अग्रसर हो रही हैं साथ में अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही हैं। कोण्डागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत फुंडेर की श्रीमती मैनीबाई पति स्व. बिरजूराम मछलीपालन व्यवसाय अपनाकर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। इस कार्य से उन्हें बीते वर्ष 22 से 23 हजार रुपये तक की आमदनी हुई है। वहीं इस साल उक्त डबरी में फिर से मछलीपालन कर रही हैं।
फरसगांव ब्लाक के ग्राम पंचायत फुंडेर निवासी श्रीमती मैनीबाई पहले खेती-किसानी एवं मजदूरी कर अपना जीवन-यापन कर रही थीं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनान्तर्गत श्रीमती मैनीबाई को वर्ष 2020-2021 में स्वयं के 0.25 हेक्टेयर भूमि पर डबरी निर्माण कार्य की स्वीकृति प्राप्त हुई थी जिस पर मई 2021 में निर्माण कार्य पूरा किया गया। श्रीमती मैनीबाई बताती हैं कि इस डबरी में बीते वर्ष उनके द्वारा 5 किलोग्राम रोहू, कतला और तलबिया मछली के बीज डाला गया था, जिससे उन्हें गत् वर्ष 22 से 23 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। इसे ध्यान देते हुए इस वर्ष उन्होंने डबरी में 7 किलोग्राम रोहू, कतला और तलबिया मछली के बीज डाला है। इसके साथ ही मत्स्यपालन विभाग के मैदानी अमले की सलाह पर मछलियों के बढ़वार हेतु खल्ली, चुन्नी चारा के साथ ही सड़े हुए गोबर के लड्डू दाना के रूप में दे रही हैं। वहीं समय-समय पर डबरी मंे जाल चलवा रही हैं। जिससे उन्हे इस वर्ष अच्छा उत्पादन होने की उम्मीद है। श्रीमती मैनीबाई को मछलीपालन व्यवसाय शुरू करने से अब अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने का जरिया मिला है और इस अतिरिक्त आय से वह अपनी रोजमर्रा के जीवन की सभी आवश्यकताओं को पूरा करने सहित बच्चों के पोषण पर ध्यान देने के साथ उन्हे अच्छी शिक्षा प्रदान कर रही हैं। वह बताती हैं कि इस अतिरिक्त आमदनी से वह बहुत उत्साहित हैं और भविष्य में इस व्यवसाय का विस्तार करेंगी।

Ashish Sinha

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