
Union Budget 2026–27: IT सेक्टर को बड़ी राहत, सभी IT सेवाएं एक कैटेगरी में होंगी शामिल, सेफ हार्बर मार्जिन 15.5% तय
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Union Budget 2026–27 में IT सेक्टर को बड़ी सौगात दी। सॉफ्टवेयर, ITES, KPO और R&D सेवाओं को एक कैटेगरी में शामिल कर 15.5% सेफ हार्बर मार्जिन लागू करने का प्रस्ताव।
नई दिल्ली, 1 फरवरी 2026/ केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने Union Budget 2026–27 में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए अहम घोषणा की है। बजट भाषण में उन्होंने कहा कि भारत आज सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, IT enabled services (ITES), नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग (KPO) और सॉफ्टवेयर से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट R&D सेवाओं में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है।
वित्त मंत्री ने बताया कि ये सभी सेवाएं आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इन्हें एक ही कैटेगरी “Information Technology Services” के अंतर्गत शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही इन सभी सेवाओं पर 15.5 प्रतिशत का कॉमन सेफ हार्बर मार्जिन लागू किया जाएगा।
IT इंडस्ट्री को मिलेगा बड़ा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार इस फैसले से IT कंपनियों को टैक्स नियमों में स्पष्टता मिलेगी और ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े विवादों में कमी आएगी। अलग-अलग कैटेगरी में बंटी सेवाओं के कारण कंपनियों को जटिल कर नियमों का सामना करना पड़ता था, जिसे अब सरल किया जा रहा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार का उद्देश्य Ease of Doing Business को बढ़ावा देना और IT सेक्टर को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और मजबूत बनाना है। यह कदम भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था में और आगे ले जाने में सहायक होगा।
स्टार्टअप्स और MSME को भी राहत
इस फैसले का लाभ केवल बड़ी IT कंपनियों को ही नहीं, बल्कि स्टार्टअप्स और मिड-साइज टेक कंपनियों को भी मिलेगा। एक समान सेफ हार्बर मार्जिन तय होने से छोटे और मध्यम स्तर की कंपनियों पर अनुपालन का बोझ कम होगा और वे नवाचार व विस्तार पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगी।
विकसित भारत की दिशा में अहम कदम
BJP ने इस घोषणा को #ViksitBharatBudget के तहत साझा करते हुए कहा कि मोदी सरकार आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल इंडिया के विज़न को आगे बढ़ा रही है। IT सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ है और इस तरह के सुधार देश को ग्लोबल टेक हब बनाने में मदद करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से विदेशी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा और भारत की IT सेवाओं की वैश्विक स्वीकार्यता और मजबूत होगी।








