
दिल्ली क्राइम 3 में फिर गूंजा ‘बेबी फलक केस’ — जब मासूम फलक की दर्दनाक कहानी ने देश को झकझोरा
नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज़ ‘दिल्ली क्राइम 3’ सच्ची घटना बेबी फलक केस पर आधारित है। 2012 में दो साल की फलक मानव तस्करी और बाल शोषण की शिकार बनी थी।
बेबी फलक केस: जिसने देश को झकझोरा, अब ‘दिल्ली क्राइम 3’ में जीवंत हुई मासूम की दर्दनाक कहानी
नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई शेफाली शाह की वेब सीरीज़ ‘दिल्ली क्राइम सीज़न 3’ इन दिनों चर्चा में है। यह सीज़न 2012 के उस दिल दहला देने वाले ‘बेबी फलक केस’ से प्रेरित है, जिसने भारत में बाल शोषण और मानव तस्करी की भयावह सच्चाई को उजागर किया था।
18 जनवरी 2012 को दिल्ली एम्स ट्रॉमा सेंटर में एक 15 साल की लड़की ने दो साल की बच्ची को गंभीर हालत में भर्ती कराया। बच्ची के सिर पर गहरे घाव, शरीर पर दांतों के निशान और गालों पर जलने के दाग थे। नर्सों ने उस अनजान बच्ची का नाम प्यार से ‘फलक’ रखा। देशभर में लोग उसकी सलामती की दुआ करने लगे।
डॉक्टरों ने बताया कि फलक के शरीर पर ‘बैटर्ड बेबी सिंड्रोम’ जैसे लक्षण थे। छह सर्जरी और दो हार्ट अटैक झेलने के बाद भी वह 56 दिन तक जिंदगी से लड़ती रही, लेकिन 15 मार्च 2012 की रात 9:40 बजे उसका दिल हमेशा के लिए थम गया। अगले दिन 16 मार्च को उसे दिल्ली के फिरोजशाह कोटला कब्रिस्तान में दफनाया गया।
जांच में खुलासा हुआ कि फलक मानव तस्करी के गिरोह का शिकार थी। उसकी मां मुन्नी को झांसा देकर राजस्थान भेजा गया, जबकि उसके तीन बच्चों को अलग-अलग जगह बेच दिया गया था। फलक एक नाबालिग लड़की के पास पहुंची, जिसने झुंझलाहट में उसे बुरी तरह पीट दिया।
मुख्य आरोपी राजकुमार उर्फ मोहम्मद दिलशाद और उसकी नाबालिग प्रेमिका लक्ष्मी उर्फ गुड़िया को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इस मामले ने देशभर में बाल सुरक्षा और मानव तस्करी रोकथाम कानूनों पर नए सिरे से बहस छेड़ दी।
गृह मंत्रालय ने इस केस को ‘मानव तस्करी का मामला’ घोषित किया। इसके बाद कई नई नीतियों की मांग उठी और बाल संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं को मजबूत किया गया।
आज भी जब ‘बेबी फलक केस’ का नाम लिया जाता है, लोगों की आंखें भर आती हैं। यह सिर्फ एक बच्ची की नहीं, बल्कि इंसानियत के दर्द और समाज की संवेदनहीनता की कहानी है।












