
Defence Milestone: अडाणी डिफेंस ने ग्वालियर से भारतीय सेना को सौंपी 2000 स्वदेशी LMG, ‘Make in India’ की बड़ी जीत
भारतीय सेना की बढ़ी ताकत! अडाणी डिफेंस ने ग्वालियर फैसिलिटी में बनी 2000 स्वदेशी लाइट मशीन गन्स (LMG) सेना को सौंप दी हैं। जानें ग्वालियर में बनी इन आधुनिक गन्स की खासियत और रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता।
Defence Milestone: अडाणी डिफेंस ने भारतीय सेना को सौंपी 2,000 स्वदेशी LMG; ग्वालियर फैसिलिटी से ‘Make in India’ को मिली नई ताकत
ग्वालियर: भारत की रक्षा क्षमताओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस (Adani Defence & Aerospace) ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित अपनी अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में तैयार 2,000 स्वदेशी लाइट मशीन गन्स (LMG) की पहली बड़ी खेप भारतीय सेना को आधिकारिक रूप से सौंप दी है।
यह उपलब्धि न केवल भारतीय सेना की मारक क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि विदेशी हथियारों पर हमारी निर्भरता को कम करने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगी। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत यह निजी क्षेत्र द्वारा सेना को छोटे हथियारों की अब तक की सबसे बड़ी डिलीवरी में से एक है।
स्वदेशी LMG डिलीवर
मैन्युफैक्चरिंग हब
मेक इन इंडिया
स्वदेशी LMG: ताकत और तकनीक
ग्वालियर फैसिलिटी में बनी ये लाइट मशीन गन्स वैश्विक मानकों पर खरी उतरती हैं। इनका परीक्षण रेगिस्तान की भीषण गर्मी से लेकर हिमालय की जमा देने वाली ठंड तक, हर विपरीत परिस्थिति में किया गया है। सेना के सूत्रों के अनुसार, इन गन्स की सटीकता और ‘फायर रेट’ आधुनिक युद्धक्षेत्र की जरूरतों के हिसाब से बेजोड़ हैं।
प्रमुख तकनीकी विशेषताएं:
- कैलिबर: आधुनिक इन्फैंट्री मानकों के अनुरूप डिजाइन।
- हल्का वजन: सैनिकों के लिए दुर्गम क्षेत्रों में ले जाना आसान।
- मारक क्षमता: लंबी दूरी तक सटीक निशाना लगाने में सक्षम।
- मेंटेनेंस: कम रखरखाव और हाई-ड्यूरेबिलिटी मटीरियल का उपयोग।
ग्वालियर: भारत का नया ‘डिफेंस कॉरिडोर’
मध्य प्रदेश का ग्वालियर क्षेत्र अब तेजी से डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है। अडाणी डिफेंस की इस फैसिलिटी में उच्च तकनीक वाली मशीनों और रोबोटिक असेंबली लाइन्स का उपयोग किया गया है। इससे न केवल सेना को आधुनिक हथियार मिल रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर सैकड़ों कुशल युवाओं को रोजगार भी मिला है।
निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में, भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों के लिए दरवाजे खोले हैं। अडाणी डिफेंस ने पीएलआर सिस्टम्स (PLR Systems) के साथ साझेदारी के जरिए वैश्विक तकनीक को भारत लाकर उसका पूरी तरह स्वदेशीकरण किया है। इन गन्स का निर्माण भारत के उन रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करता है जहाँ हम ‘नेट एक्सपोर्टर’ बनने की ओर बढ़ रहे हैं।
भारतीय सेना के आधुनिकीकरण को बल
भारतीय इन्फैंट्री (पैदल सेना) लंबे समय से पुरानी मशीन गन्स को बदलने की प्रक्रिया में है। 2,000 गन्स की यह खेप सीमाओं पर तैनात जवानों को आधुनिक हथियारों से लैस करने के अभियान का हिस्सा है। आने वाले समय में, अडाणी डिफेंस द्वारा और अधिक मात्रा में कार्बाइन, असॉल्ट राइफल और स्नाइपर राइफल्स की आपूर्ति किए जाने की उम्मीद है।
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