NEET परीक्षा धांधली: आकांक्षा चतुर्वेदी ने तोड़ा दम, सुसाइड नोट में बयां किया व्यवस्था का दर्द





NEET और परीक्षा तंत्र की विफलता: आकांक्षा चतुर्वेदी की दुखद कहानी

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NEET पेपर लीक: व्यवस्था की नाकामी ने ली एक और होनहार बेटी की जान, मऊगंज में पसरा मातम

अद्यतन: 1 जून, 2026

देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘NEET’ की शुचिता और उस पर मंडरा रहे भ्रष्टाचार के काले साए ने मध्य प्रदेश की एक और होनहार छात्रा का भविष्य और जीवन दोनों लील लिए हैं। नागपुर में रहकर डॉक्टर बनने का सपना देख रही मऊगंज जिले की रहने वाली आकांक्षा चतुर्वेदी ने परीक्षा धांधली की खबरों से व्यथित होकर आत्महत्या कर ली। आकांक्षा का सुसाइड नोट देश के पूरे परीक्षा तंत्र और भ्रष्टाचार पर एक करारा तमाचा है।

किसान पिता का सपना और KCC का कर्ज

मूल रूप से मऊगंज जिले के मगनिया गांव की रहने वाली आकांक्षा का परिवार बेहद गरीब है। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए परिवार पिछले कुछ समय से नागपुर में रह रहा था। पिता कृष्ण कुमार चौबे पेशे से किसान हैं, लेकिन बेटी को डॉक्टर बनाने का खर्च उठाने के लिए वे नागपुर में खाना बनाने (कुक) का काम करते थे। परिवार ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से 3,00,000 रुपये का लोन लिया था और रिश्तेदारों से भी कर्ज मांगकर कोचिंग करा रहे थे। लेकिन सिस्टम की नाकामी ने पिता की इस कठिन तपस्या पर पानी फेर दिया।

‘मैंने सब बर्बाद कर दिया…’ – सुसाइड नोट का दर्द

“मम्मी-पापा आपको भरोसा था कि मेरी बेटी पढ़ लेगी और डॉक्टर बनेगी, पर दोबारा नीट का पेपर देने की हिम्मत नहीं है मेरे अंदर। पहले नीट के पेपर में अच्छे मार्क्स आ रहे थे मेरे, लेकिन अब दोबारा पेपर अच्छा आए इसकी कोई गारंटी नहीं है। सॉरी मम्मी पापा, मैंने सब बर्बाद कर दिया आप दोनों का…”

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परीक्षा माफिया और छात्रों का मनोवैज्ञानिक अवसाद

आकांक्षा की मृत्यु केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उन लाखों छात्रों का प्रतिनिधित्व करती है जो परीक्षा माफिया के शिकार होते हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जब एक छात्र पूरी शिद्दत से तैयारी करता है और उसे पता चलता है कि पेपर लीक हुआ है, तो उसे ‘लर्नड हेल्पलेसनेस’ (सीखी गई लाचारी) का अनुभव होता है। पेपर लीक न केवल शिक्षा व्यवस्था की विफलता है, बल्कि यह युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक घातक प्रहार है।

NTA की कार्यप्रणाली पर विस्तृत सवाल

NEET 2024 के बाद से ही NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सुरक्षा प्रोटोकॉल में विफलता, परिणामों में विसंगतियां, और ग्रेस मार्क्स का विवाद – इन सभी ने परीक्षा की साख को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। जब संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहती हैं, तो इसका सीधा खामियाजा आकांक्षा जैसे गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों को भुगतना पड़ता है।

सियासी गलियारों में आक्रोश और न्याय की मांग

इस घटना के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में भारी उबाल है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी और लड़ाई को सड़क से सदन तक ले जाने का वादा किया। NSUI की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े और एमपी NSUI अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की और KCC का पूरा कर्ज चुकाने का जिम्मा लिया है।

व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता

आकांक्षा की मौत एक चेतावनी है। क्या देश का परीक्षा तंत्र केवल धनपतियों के हाथों का खिलौना बनकर रह जाएगा? जब तक पेपर लीक करने वाले माफियाओं को कठोरतम सजा नहीं मिलेगी और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक ऐसे कई और सपने धूल में मिलते रहेंगे। यह अब समय की मांग है कि शिक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया जाए और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त कानून लागू हों।