निजी सुरक्षा एजेंसियों के लाइसेंस और चरित्र सत्यापन पर गृह विभाग सख्त, तय की गई समय-सीमा






निजी सुरक्षा एजेंसियों के लाइसेंस एवं चरित्र सत्यापन प्रक्रिया में तेजी: गृह विभाग ने पुलिस अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

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निजी सुरक्षा एजेंसियों के लाइसेंस एवं चरित्र सत्यापन प्रक्रिया में तेजी: गृह विभाग ने पुलिस अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

भोपाल: सोमवार, 20 जुलाई 2026, 17:25 IST | श्रेणी: राज्य / प्रशासनिक समाचार

भोपाल: मध्य प्रदेश में निजी सुरक्षा एजेंसियों (Private Security Agencies) के सुचारू संचालन, नए लाइसेंस जारी करने, लाइसेंस नवीनीकरण और आवेदक के चरित्र सत्यापन की पूरी प्रक्रिया को अब और अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा समयबद्ध बना दिया गया है। आम नागरिकों, व्यवसायियों और सुरक्षा क्षेत्र से जुड़ी एजेंसियों को पेश आ रही प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने के लिए गृह विभाग ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को बेहद सख्त और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गृह विभाग के इस नए प्रशासनिक कदम से न केवल पेंडेंसी खत्म होगी, बल्कि सुरक्षा क्षेत्र के उद्योगों को भी एक व्यवस्थित और सुगम व्यावसायिक माहौल मिलेगा।

तय की गई सख्त समय-सीमा, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

गृह विभाग की सचिव कृष्णावेणी देसावतु ने मीडिया और विभागीय समीक्षा बैठकों के दौरान विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि ‘प्राइवेट सुरक्षा अभिकरण (विनियमन) अधिनियम, 2005’ (PSARA Act 2005) के प्रावधानों के अंतर्गत नए लाइसेंस के लिए मिलने वाले तमाम आवेदनों का निराकरण अब निर्धारित 60 दिवस की सख्त समय-सीमा के भीतर किया जाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, लाइसेंस के नवीनीकरण (Renewal) से संबंधित आवेदनों के लिए 30 दिवस की स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस और संबंधित प्रशासनिक कार्यालयों द्वारा जांचोपरांत तैयार किया जाने वाला प्रतिवेदन (Verification Report) अधिकतम 15 दिवस के भीतर संबंधित सक्षम प्राधिकारी कार्यालय को भेजा जाना होगा। हाल ही में गृह विभाग द्वारा की गई उच्च-स्तरीय समीक्षा में यह तथ्य सामने आया था कि कई जिलों में सुरक्षा एजेंसियों के लाइसेंस और चरित्र सत्यापन से जुड़े जांच प्रतिवेदन लंबे समय से लंबित पड़े हुए हैं, जिससे आवेदकों और व्यवसायियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए गृह विभाग ने सभी संबंधित मैदानी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वे लंबित प्रकरणों का तुरंत निपटारा करें और भविष्य में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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लाइसेंस एवं सत्यापन के लिए निर्धारित समय-सीमा:

  • नए लाइसेंस के आवेदन का निराकरण: 60 दिवस के भीतर
  • लासेंस नवीनीकरण (Renewal) का आवेदन: 30 दिवस के भीतर
  • जांच उपरांत प्रतिवेदन (Verification Report) प्रेषण: 15 दिवस के भीतर

जांच प्रक्रिया को बनाया जाएगा अधिक व्यवस्थित और डिजिटल

गृह विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के तहत निजी सुरक्षा एजेंसियों के आवेदकों के चरित्र एवं कार्यालय सत्यापन की संपूर्ण प्रक्रिया को अत्यधिक सुव्यवस्थित और आधुनिक बनाया गया है। अब पारंपरिक जटिल प्रक्रियाओं के स्थान पर आधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत संबंधित एजेंसी के कार्यालय का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) अनिवार्य रूप से कराए जाने तथा आवेदक के चरित्र संबंधी सत्यापन की जांच आधुनिक पुलिस डेटाबेस नेटवर्क CCTNS (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) एवं ICJS (Interoperable Criminal Justice System) के माध्यम से किए जाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

तकनीकी एकीकरण के माध्यम से सत्यापन कार्य में होने वाली त्रुटियों और विलंब की गुंजाइश को लगभग समाप्त कर दिया गया है। इससे एक ओर जहां डेटा की प्रमाणिकता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा मापदंडों पर खरा उतरने वाली एजेंसियों को त्वरित गति से कार्य करने की अनुमति मिल सकेगी।

आवेदकों की अनावश्यक परेशानी पर रोक

कृष्णावेणी देसावतु ने प्रशासनिक अधिकारियों को यह भी विशेष रूप से निर्देशित किया है कि जांच प्रक्रिया के नाम पर आवेदकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न कटवाए जाएं। जांच प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब या मनमाने तरीके से मामलों को अटकाने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए आवेदक को केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए बुलाया जाए। किसी भी प्रकरण को बिना किसी ठोस प्रशासनिक कारण के अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।

गृह विभाग ने प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नरों, पुलिस अधीक्षकों (SP) और संबंधित थाना प्रभारियों एवं नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे निजी सुरक्षा एजेंसियों से संबंधित सभी फाइलों का नियमित मॉनिटरिंग सेल के जरिए निरीक्षण करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि तय समय-सीमा के भीतर बिना किसी बाधा के प्रतिवेदन शासन एवं संबंधित कार्यालयों तक अनिवार्य रूप से प्रेषित किए जाएं।

निजी सुरक्षा क्षेत्र और रोजगार पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश शासन और गृह विभाग द्वारा उठाए गए इन कदमों से राज्य में निजी सुरक्षा उद्योग को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। सुरक्षा एजेंसियां आधुनिक युग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं — औद्योगिक इकाइयों, बैंकों, कॉरपोरेट कार्यालयों, हाउसिंग सोसाइटियों और बड़े आयोजनों में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के लिए इन लाइसेंसों की समय पर उपलब्धता अत्यंत आवश्यक होती है। लाइसेंस प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होने से राज्य में युवाओं के लिए सुरक्षा गार्ड और सुपरवाइजर के रूप में रोजगार के नए अवसर भी तेजी से सृजित होंगे।

शासन के इन सख्त और स्पष्ट आदेशों के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि मैदानी स्तर पर पुलिस और प्रशासनिक अमला पूरी सक्रियता के साथ लंबित मामलों का अंबार हटाएगा और भविष्य के लिए एक पारदर्शी कार्यसंस्कृति स्थापित होगी।