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कन्याकुमारी से कश्मीर, भारत जोड़ो यात्रा का 145 दिन-3500 KM पैदल

145 दिन-3500 KM पैदल-कन्याकुमारी से कश्मीर, यहां जानें भारत जोड़ो यात्रा का A टू Z

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30 जनवरी यानी महात्मा गांधी की पुण्य तिथि. और इस दिन कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा समाप्त हो रही है. कांग्रेस की 3,570 किलोमीटर की भारत जोड़ो पदयात्रा के समापन पर 21 पार्टियों को न्योता भेजा गया है.

समापन समारोह में कई विपक्षी नेता भी शामिल हो सकते हैं.

भारत जोड़ो यात्रा अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है. लिहाजा 30 जनवरी की तारीख कांग्रेस पार्टी के लिए अहम साबित हो सकती है. इस दिन विपक्षी दलों का भी बड़ा जमावड़ा देखने को मिल सकता है. यात्रा की समाप्ति से पहले राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा की उपलब्धियों को सामने रखा. उन्होंने कहा कि इस यात्रा को देश भर के युवाओं का समर्थन मिला है. उन्होंने देशभर में घूम घूम कर बेरोजगारों और किसानों की आवाज को सुना है. उन्हें काफी अनुभव मिला है.

कब शुरू हुई यात्रा?

कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत पिछले साल 7 सितंबर को कन्याकुमारी से हुई थी. इस यात्रा के बारे में पिछले साल राजस्थान में कांग्रेस के सम्मेलन में ही एलान कर दिया गया था. कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया था कि भारत जोड़ो यात्रा राजनीतिक नहीं बल्कि यह एक सांस्कृतिक यात्रा है.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने कहा था कि इस यात्रा का मकसद केंद्र सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आम जनता को जागरूक करना है. बेरोजगारी, सांप्रदायिक नफरत के माहौल और महंगाई के खिलाफ लोगों में जागृति लाना है.

कहां-कहां से गुजरी यात्रा?

145 दिनों की भारत जोड़ो यात्रा तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू होती हुई केरल, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना,महाराष्ट्र, एमपी, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, यूपी और फिर जम्मू-कश्मीर तक पहुंची. लेकिन विधानसभा चुनाव के समय गुजरात और हिमाचल प्रदेश में यात्रा के नहीं पहुंचने पर पार्टी को आलोचना का सामना करना पड़ा तो राहुल गांधी ने इसका दो टूक शब्दों में जबाव दिया कि भारत जोड़ो यात्रा का मकसद राजनीतिक प्रचार में शामिल होना नहीं है बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक जागरूकता फैलाना है.

नामचीन हस्तियां हुईं शामिल

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राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में राजनीति, कला, खेल और सिनेमा जगत की कई नामचीन हस्तियां भी शामिल हुईं. कांग्रेस पार्टी की तरफ से भूपेश बघेल, अशोक गहलोत, प्रियंका गांधी, सचिन पायलट जैसे नेता तो उनके साथ जुड़े ही, साध ही मेधा पाटकर, तुषार गांधी, आनंद पटवर्धन, अमोल पालेकर, पूजा भट्ट, स्वरा भास्कर, सुनिधि चौहान, रश्मि देसाई, ऋतु शिवपुरी, उर्मिला मातोंडकर, मो. अजहरुद्दीन, कैप्टन बाना सिंह भी शामिल हुए. दूसरे दलों से उनकी यात्रा में शामिल होने वालों में तेजस्वी यादव, संजय राउत, फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे नाम भी शामिल हेैं.

सुरक्षा को लेकर हुआ विवाद

कांग्रेस पार्टी की भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी की सुरक्षा के मुद्दे के पर राजनीति भी खूब हुई. भारत जोड़ो यात्रा के जम्मू-कश्मीर तक पहुंचते पहुंचते एक बार फिर सुरक्षा में चूक का मसला उछला. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में राहुल गांधी की सुरक्षा में चूक एक बार फिर गंभीर मामला है. खड़गे ने इसी बहाने केंद्र सरकार पर निशाना भी साध दिया.

इससे पहले दिल्ली और पंजाब में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी राहुल गांधी की सुरक्षा में चूक का मसला उठा था. हालांकि पंजाब में सुरक्षा में चूूक के मुद्दे को खुद राहुल गांधी ने खारिज कर दिया था. उन्होंने कहा था कि उत्साह में कुछ लोग आगे बढ़ जाते हैं. ऐसा कभी कभी हो जाता है. लेकिन दिल्ली में सुरक्षा में चूक का मसला केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पहुंचा था.

लाल चौक को लेकर भी हुआ विवाद

भारत जोड़ो यात्रा अब जबकि कश्मीर तक पहुुंच गई, लेकिन उससे पहले श्रीनगर के लालचौक पर तिरंगा फहराने को लेकर भी कांग्रेस और बीजेपी के बीच विवाद छिड़ गया था. राहुल गांधी लाल चौक पर तिरंगा फहरायेंगे या नहीं-ये साफ नहीं था. पहले कहा गया कि राहुल लाल चौक पर तिरंगा फहरायेंगे लेकिन बाद में तिरंगा फहराने की बात जब केवल कांग्रेस पार्टी के दफ्तर में कही गई तो बीजेपी हमलावर हो गई. सवाल ये उठा कि जहां पं. जवाहर लाल नेहरू तिरंगा फहरा चुके हैं वहां राहुल गांधी को तिरंगा फहराने में क्या आपत्ति है.

हालांकि रविवार को राहुल गांधी ने यात्रा की समाप्ति से एक दिन पहले श्रीनगर से लाल चौक पर तिरंगा फहरा दिया. जिसके बाद महबूबा मुफ्ती ने जवाहर लाल नेहरू के सन् 1948 में तिरंगा फहराने की तस्वीर को ट्वीट किया.

Ashish Sinha

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