
NDA का सामाजिक संतुलन वाला कैबिनेट: बिहार में नीतीश सरकार की नई राजनीतिक रणनीति
बिहार में नीतीश कुमार ने ऐसा नया मंत्रिमंडल पेश किया है जिसमें मुस्लिम, दलित, EBC-OBC, कुशवाहा, यादव और सवर्ण सभी प्रमुख जातीय समूहों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। नई NDA सरकार का यह कैबिनेट सामाजिक संतुलन और 2025 चुनावी रणनीति का स्पष्ट संकेत देता है।
नीतीश कुमार का नया मंत्रिमंडल: सामाजिक संतुलन, राजनीतिक संदेश और चुनावी रणनीति का परफेक्ट संतुलन
पटना। बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐसा मंत्रिमंडल पेश किया है, जो सामाजिक संतुलन से लेकर चुनावी रणनीति और राजनीतिक संदेश—तीनों को साधता हुआ दिखाई देता है। कैबिनेट की संरचना बताती है कि सरकार ने लगभग हर प्रमुख जातीय और सामाजिक समूह को प्रतिनिधित्व देकर व्यापक समावेशिता का संदेश दिया है।
एकमात्र मुस्लिम चेहरा: मो. जमा खान
कैबिनेट में मुस्लिम समुदाय से मो. जमा खान को शामिल किया गया है। उन्हें मंत्री बनाकर NDA ने यह संदेश दिया है कि सरकार सामाजिक विविधता में किसी समुदाय को बाहर नहीं रखना चाहती।
कहार समुदाय का पहला बड़ा प्रतिनिधित्व
कहार समाज से डॉ. प्रमोद कुमार को मंत्री बनाकर सामाजिक विस्तार का दायरा और बढ़ाया गया है। माना जा रहा है कि यह फैसला उन समुदायों को भी मुख्यधारा की राजनीति में लाने की रणनीति का हिस्सा है, जिन्हें अब तक अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व मिलता रहा है।
दलित समुदाय की मजबूत हिस्सेदारी
दलित वर्ग से अशोक चौधरी, संतोष कुमार सुमन, लखेंद्र कुमार रोशन और संजय कुमार को मंत्री बनाकर NDA ने सामाजिक न्याय के संदेश को और मजबूत किया है। यह संकेत स्पष्ट है कि सरकार दलित आबादी को अपने राजनीतिक गणित का प्रमुख हिस्सा मान रही है।
EBC-OBC को मिला बड़ा कोटा
अति पिछड़ा वर्ग (EBC) से बड़ी संख्या में नेताओं को कैबिनेट में शामिल किया गया है—
मदन सहनी, अरुण शंकर प्रसाद, सुरेंद्र मेहता, नारायण प्रसाद और रमा निषाद।
यह बड़ा राजनीतिक संकेत है, क्योंकि EBC वोटबैंक 2025 लोकसभा चुनाव और आगे की विधानसभा रणनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाला है।
नीतीश कुमार लंबे समय से OBC और खासकर EBC समुदाय को राजनीतिक रूप से सशक्त करने पर ज़ोर देते रहे हैं, और नया मंत्रिमंडल उसी नीति की निरंतरता है।
कुशवाहा और यादव समुदाय का प्रतिनिधित्व
-
कुशवाहा समुदाय: सम्राट चौधरी, सुनील कुमार, दीपक प्रकाश
-
यादव समुदाय: रामकृपाल यादव, बिजेंद्र प्रसाद यादव
दोनों समुदाय बिहार की राजनीति में प्रभावी माने जाते हैं, और इनके नेताओं को शामिल कर NDA ने अपनी सामाजिक पकड़ बनाए रखने का संकेत दिया है।
सवर्ण समुदाय को भी मिला पर्याप्त महत्व
नीतीश कैबिनेट में सवर्ण समाज से कई महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं—
-
राजपूत: लेसी सिंह, श्रेयसी सिंह, संजय सिंह टाइगर, संजय कुमार सिंह
-
भूमिहार: विजय कुमार सिन्हा, विजय कुमार चौधरी
-
ब्राह्मण: मंगल पांडेय
-
कायस्थ: नितिन नवीन
इन नियुक्तियों को NDA के पारंपरिक वोट बैंक को सुदृढ़ करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
सामाजिक प्रतिनिधित्व का राजनीतिक संतुलन
पहली नजर में नीतीश कुमार का मंत्रिमंडल जातीय प्रतिनिधित्व का ‘परफेक्ट बैलेंस’ लगता है—
▪ मुस्लिम से लेकर दलित,
▪ EBC-OBC से लेकर सवर्ण समुदाय तक,
हर समूह की उपस्थिति ने यह संदेश दिया है कि आगामी चुनावों की तैयारी सामाजिक आधार को और मजबूत बनाकर की जा रही है।







