एचएएल ने एयरशो में प्रदर्शित एचएलएफटी-42 विमान के पिछले हिस्से से ‘हनुमान’ की तस्वीर हटाई, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने मंगलवार को बेंगलुरु में एयरो इंडिया 2023 कार्यक्रम में प्रदर्शित एचएलएफटी-42 विमान मॉडल के पिछे वाले हिस्से से भगवान हनुमान की तस्वीर को हटा दिया।

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यह एचएएल द्वारा हिंदुस्तान लीड इन फाइटर ट्रेनर (एचएलएफटी-42) के एक स्केल मॉडल के अनावरण के एक दिन बाद आया है, जिसमें ट्रेनर के वर्टिकल फिन पर भगवान हनुमान की तस्वीर भी दिखाई गई थी।

एचएलएफटी-42 विमान पहले स्वदेशी विमान एचएएल मारुत का उत्तराधिकारी है। मारुत पवन का दूसरा नाम है, या ‘पवन’ जैसा कि इसे हिंदी में कहा जाता है। पवनपुत्र भगवान हनुमान थे, इसलिए मॉडल विमान पर भगवान की तस्वीर प्रदर्शित की गई थी।

HLFT-42 अगली पीढ़ी का सुपरसोनिक ट्रेनर है जो आधुनिक लड़ाकू विमान प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विमान हॉक-132 सबसोनिक ट्रेनर और मिग-21 जैसे मौजूदा ट्रेनर विमानों के बीच की खाई को पाट देगा, जिनका उपयोग सुपरसोनिक तकनीक में पायलटों को प्रशिक्षित करने के लिए किया जाता है।

यह फ्लाई बाय वायर कंट्रोल (FBW) सिस्टम के साथ एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA), इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) सूट, इन्फ्रारेड सर्च एंड ट्रैक (IRST) जैसे अत्याधुनिक एवियोनिक्स से लैस है।

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एयरो इंडिया 2023

अधिकारियों ने बताया कि पांच दिवसीय प्रदर्शनी में 700 से अधिक रक्षा कंपनियां और 98 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

एयरो इंडिया का यह संस्करण देश को सैन्य विमान, हेलीकॉप्टर, सैन्य उपकरण और नए युग के एवियोनिक्स के निर्माण के लिए एक उभरते हुए केंद्र के रूप में दिखाता है।

उन्होंने कहा कि एयरो इंडिया में लगभग 250 बिजनेस-टू-बिजनेस समझौते होने की उम्मीद है, जिसमें लगभग 75,000 करोड़ रुपये के निवेश को अनलॉक करने का अनुमान है।

सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में एयर शो के दौरान भारतीय वायुसेना के कई विमानों ने अपनी हवाई ताकत का प्रदर्शन किया।

एयरो इंडिया का विषय “एक अरब अवसरों के लिए रनवे” है और इसका उद्देश्य रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों में भारत की वृद्धि और क्षमताओं को पेश करना है।

अधिकारियों ने कहा कि इस आयोजन का फोकस सरकार के ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ विजन के अनुरूप स्वदेशी उपकरणों और प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करना और विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी करना है।