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दवा-प्रतिरोधी टीबी का सिम्स में सफल उपचार, डॉक्टरों की टीम ने बचाई मरीज की जिंदगी

सिम्स बिलासपुर में जटिल टीबी मरीज का सफल उपचार, आधुनिक जांच से मिला नया जीवन

उन्नत मशीनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम से संभव हुआ इलाज

रायपुर, 15 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने का एक और उदाहरण सामने आया है। Chhattisgarh Institute of Medical Sciences (सिम्स) बिलासपुर के श्वसन रोग विभाग में चिकित्सकों ने जटिल टीबी (क्षय रोग) से पीड़ित एक मरीज का सफल उपचार कर उसे नई जिंदगी दी है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार आधुनिक जांच पद्धतियों और अत्याधुनिक मशीनों की सहायता से बीमारी का सही समय पर निदान कर उपचार शुरू किया गया, जिससे मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।

लंबे समय से चल रहा था इलाज, नहीं मिल रहा था लाभ

जानकारी के अनुसार Ratanpur क्षेत्र की 19 वर्षीय महिला मरीज मई 2025 में खांसी-जुकाम, शाम को बुखार, भूख में कमी, वजन गिरना और कमजोरी जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंची थी।

मरीज लगभग पांच महीने से दवा-संवेदनशील क्षय रोग (DS-TB) की दवा ले रही थी, लेकिन लक्षणों में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा था।

ब्रोंकोस्कोपी जांच से हुआ सही निदान

श्वसन रोग विभाग के प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतीक कुमार, सहायक प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार डनसेना और वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. आकांक्षा गुप्ता ने मरीज की विस्तृत जांच की।

छाती के एक्स-रे में दोनों फेफड़ों में फाइब्रो-कैविटेटरी घाव पाए गए। प्रारंभिक बलगम जांच में टीबी निगेटिव आने के बाद चिकित्सकों ने ब्रोंकोस्कोपी जांच की, जिसमें दूरबीननुमा नली के माध्यम से सांस की नलियों की जांच कर ब्रोंको-एल्वियोलर लवाज का नमूना लिया गया।

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दवा-प्रतिरोधी टीबी की हुई पुष्टि

आधुनिक जांच में कार्ट्रिज आधारित न्यूक्लिक एसिड प्रवर्धन परीक्षण में रिफैम्पिसिन प्रतिरोधी टीबी की पुष्टि हुई। इसके साथ ही लाइन प्रोब एसे जांच में रिफैम्पिसिन और आइसोनियाजिड दोनों दवाओं के प्रति प्रतिरोध पाया गया।

इसके बाद मरीज को गाइडलाइन के अनुसार पूर्णतः मौखिक बहु-दवा प्रतिरोधी टीबी उपचार पद्धति पर नई दवाओं के साथ उपचार शुरू किया गया।

उपचार के दौरान आई जटिलता, फिर भी बचाई जान

उपचार के दौरान 31 जुलाई 2025 को मरीज सांस फूलने और ऑक्सीजन की कमी की शिकायत के साथ फिर अस्पताल पहुंची। जांच में दोनों फेफड़ों में न्यूमोथोरैक्स (फेफड़ों में हवा भर जाना) पाया गया।

चिकित्सकों ने दाहिनी ओर इंटरकॉस्टल ड्रेनेज ट्यूब लगाकर उपचार किया, जबकि बाईं ओर का उपचार संरक्षणात्मक तरीके से किया गया। उचित उपचार के बाद मरीज की स्थिति में सुधार हुआ और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

स्वास्थ्य मंत्री की पहल से उपलब्ध हुई आधुनिक सुविधाएं

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि संस्थान में टीबी सहित जटिल श्वसन रोगों के इलाज के लिए आधुनिक जांच सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उपलब्ध है।

वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि टीबी मरीजों के लिए दवाओं का पूरा कोर्स नियमित रूप से लेना बेहद जरूरी है।

उन्होंने बताया कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री Shyam Bihari Jaiswal की पहल पर सरकारी अस्पतालों में आधुनिक मशीनें और उन्नत जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिसके कारण जटिल बीमारियों का भी सही समय पर निदान और उपचार संभव हो पा रहा है।

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