पंचायत संचालनालय ने जिपं सदस्य का निर्वाचन किया शून्य, जानिए क्या है वजह..?

राजनांदगांव। जिला पंचायत के निर्दलीय सदस्य विप्लव साहू (चूरनदास) का निर्वाचन राज्य पंचायत संचालनालय ने शून्य घोषित कर दिया। संचालनालय के इस आशय के आदेश जारी होते ही राजनीतिक पार्टियों में खलबली मच गई है।

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नामांकन में छिपाई यह जानकारी

विप्लव साहू ने जीत के बाद खुलेआम कांग्रेस द्वारा उन्हें खरीदी में नाकाम होने को लेकर वाट्सअप में मैसेज लिखा था। हालांकि संचालनालय ने इस चैट के आधार पर कार्रवाई नहीं की है, बल्कि विप्लव साहू द्वारा नामांकन के दौरान प्रस्तुत किए गए हलफनामा में जमीन पर अतिक्रमण की जानकारी नहीं दी थी, जिसे आधार बनाकर कांग्रेस नेता और उस निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता दयालु वर्मा ने पंचायत संचालनालय में याचिका दायर की थी। जिसकी सुनवाई के बाद निर्वाचन शून्य घोषित करने का आदेश जारी किया गया है।

इधर कांग्रेस नेता शाहिद भाई व इस मामले के अधिवक्ता रूपेश दुबे ने याचिकाकर्ता दयालू वर्मा के साथ पत्रकारवार्ता में विप्लव साहू के निर्वाचन को शून्य घोषित करने के संंबंध में विस्तृत जानकारी दी। साल 2017 से खैरागढ़ क्षेत्र के खसरा क्रमांक 333 के रकबे 15.613 वर्ग मीटर में विप्लव साहू पर अतिक्रमण करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि यदि नामांकन में साहू उक्त विवरण को प्रस्तुत करते तो वह चुनाव लड़ने योग्य नहीं होते। लिहाजा उन्होंने अतिक्रमण की बात का नामांकन में उल्लेख नहीं किया। उन्होंने हलफनामे में इस कालम को खाली छोड़ दिया। गलत जानकारी छुपाकर चुनाव लड़ने के मामले में याचिकाकर्ता ने शिकायत की और संचालनालय ने आरोपों को सही ठहराते हुए निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया।

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दरअसल निर्दलीय सदस्य विप्लव साहू को भाजपा का समर्थन मिला हुआ है। हालांकि उनके निर्वाचन शून्य होने के बावजूद भाजपा की जिला पंचायत में राजनीतिक स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अविभाजित जिले में कुल 24 सीटें हैं। जिसमें भाजपा और कांग्रेस के 11-11 सदस्य चुनकर आए हैं। इस दौरान भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़े एक प्रत्याशी ने अपनी पार्टी को समर्थन दे दिया। जिससे भाजपा 12 और कांग्रेस 11 की स्थिति में रही।

अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव में विप्लव साहू ने भाजपा का साथ दिया और सदस्यों की वोटिंग में जिला पंचायत अध्यक्ष गीता साहू को 14 और विक्रांत सिंह को 13 मत मिले। वोट संख्या के लिहाज से निर्वाचन शून्य होने के बाद भी अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की कुर्सी सुरक्षित है। विप्लव साहू का कहना है कि संचालनालय ने एकतरफा फैसला दिया है। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।