दार्जिलिंग में शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ तीन दिवसीय राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव का समापन

दार्जिलिंग में शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ तीन दिवसीय राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव का समापन

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दार्जिलिंग के राजभवन में 11वां राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव-2021 भव्य समापन समारोह के साथ संपन्न हुआ।इस तीन दिवसीय समारोह के समापन के मौके पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री जगदीप धनखड़, दार्जिलिंग से सांसद और विधान सभा सदस्य समापन समारोह में उपस्थित थे।

इस अवसर पर राज्यपाल ने दार्जिलिंग के राजभवन में पहली बार आयोजित किए गए इस शानदार कार्यक्रम के लिए संस्कृति मंत्रालय के सभी अधिकारियों, कारीगरों, कलाकारों और आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।

इस दौरान आयोजित प्रदर्शनों के अलावा दार्जिलिंग में लोगों ने पिछले दिनों सात आंचलिक सांस्कृतिक केंद्रों के कारीगरों द्वारा लगाए गए स्टालों को भी देखा। इस मौके पर प्रसिद्ध बाऊल गायक अनुत्तम दास बाऊल ने प्रस्तुति दी। कोनकोटी बोडो क्रिस्टी अफत द्वारा आयोजित बोडो सांस्कृतिक नृत्य एवं संयुक्त कलाकर मंच द्वारा किया गया याक नृत्य भी कुछ अन्य आकर्षण रहे। इसके अलावा सांस्कृतिक श्रेयस्कर द्वारा कोरियोग्राफ किए गए विविध कत्थक, मंत्रा द्वारा फिनाले एवं नेपाली रॉक बैंड ने स्थानीय दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

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कार्यक्रम को देखने और इसका आनंद लेने वालों की भारी भीड़ रही। आगंतुकों ने शिल्प स्टालों का दौरा किया, कारीगरों से बातचीत की और कई उत्पादों की खरीदारी की। आगंतुकों ने रचनात्मक माहौल का भी आनंद लिया और सभी कलात्मक प्रतिष्ठानों के साथ तस्वीरें लीं।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल ने दार्जिलिंग में दिनांक 22 फरवरी 2021को तीन दिवसीय महोत्सव का उद्घाटन किया था। उन्होंने युवाओं के लिए संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला और यह बताया कि यह किस तरह ग्रामीण क्षेत्रों सहित विभिन्न क्षेत्रों के युवा कलाकारों को कैसे फायदे के साथ शामिल कर सकता है।

संस्कृति मंत्रालय का प्रमुख महोत्सव राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव वर्ष 2015 से सात जोनल सांस्कृतिक केंद्रों की सक्रिय भागीदारी से मनाया जा रहा है और यह भारत की जीवंत संस्कृति को केवल ऑडिटोरियम या दर्शक दीर्घाओं तक सीमित रखने के बजाय लोगों तक पहुंचाने में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। यह “एक भारत श्रेष्ठ भारत” के पोषित लक्ष्य को मजबूत करने और साथ ही कलाकारों और कारीगरों को प्रभावी रूप से अपनी आजीविका को सहारा देने के साथ साथ यह आयोजन लोक एवं जनजातीय कला, नृत्य, संगीत,खानपान व संस्कृति को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जा पाने में मददगार रहा है। इससे पहले राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव नवंबर, 2015 से अब तक दिल्ली, वाराणसी, बेंगलुरु, तवांग,गुजरात, कर्नाटक, टिहरी और मध्य प्रदेश जैसे विभिन्न राज्यों और शहरों में आयोजित किया जा चुका है ।

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