छत्तीसगढ़ताजा ख़बरेंब्रेकिंग न्यूज़राज्यसरगुजा

Ambikapur : वस्तु न समझें भोग की.. दें उसको सम्मान.. नारी भारत देश की.. आन-बान है शान……………..

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर तुलसी साहित्य समिति की काव्यगोष्ठी................

वस्तु न समझें भोग की.. दें उसको सम्मान.. नारी भारत देश की.. आन-बान है शान……………..

पी0एस0यादव/ब्यूरो चीफ/सरगुजा// अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर तुलसी साहित्य समिति की ओर से वरिष्ठ साहित्यकार व पूर्व विकासखंड शिक्षा अधिकारी एसपी जायसवाल की अध्यक्षता में स्थानीय विवेकानंद विद्यानिकेतन में काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शायर-ए-शहर यादव विकास और विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवयित्री मीना वर्मा, रूबी सिद्दीकी व ब्रह्माशंकर सिंह थे। मां भारती की पारंपरिक पूजा पश्चात् विद्वान वक्ता पूर्व एडीआईएस ब्रह्माशंकर सिंह ने कहा कि आज की नारी पहले से ज़्यादा सशक्त है। वह राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की- आंचल में है दूध और आंखों में है पानी- वाली नहीं है। अब तो नारी अपने पिता को कंधा दे रही है, जहाज चला रही है, प्रशासन, चिकित्सा, अभियांत्रिकी आदि सभी क्षेत्रों में वह पुरुषों से आगे है। सरकार के द्वारा भी उसे पुरुषों के बराबर ही अधिकार प्रदान किए गए हैं। पैतृक संपत्ति में भी उसका पूरा अधिकार है। भारतीय नारी एक आदर्श है। ऐसी लक्ष्मी, दुर्गा, सरस्वती-जैसी नारियों पर जब लोग कटाक्ष करते हैं तो दिल बैठ जाता है। रूबी सिद्दीकी का कहना था कि महिलाएं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को एक त्योहार के रूप में मनाती हैं। महिलाओं का सम्मान, रीति-नीति, उपलब्धियों का इतिहास गवाह है। महिलाएं बच्चों का लालन-पालन ही नहीं करतीं बल्कि उसे देश का श्रेष्ठ नागरिक बनाने का दायित्व भी बखूबी निभाती हैं। समाज व देश के उत्कर्ष में सभी धर्म, जातियों की नारियों का योगदान व प्रयास अतुलनीय हैं, स्तुत्य भी। इस बार जो महिला दिवस की थीम है- नवाचार व प्रौद्यौगिकी। इस दिशा में आज नारियों को प्रेरित करने की ज़रूरत है। सम्पूर्ण देश महिलाओं के सम्मान में नतमस्तक है। शिक्षाविद् एसपी जायसवाल ने कहा कि मुग़लकाल को छोड़कर नारियों की दशा व दिशा देश में कभी ख़राब नहीं रही। वैदिककाल में नारियों का बहुत सम्मान था। कहा गया- ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता’ अर्थात् जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं। भगवान राम ने भी ने सीता की अनुपस्थिति में उसकी प्रतिमा के साथ अपने राजसूय यज्ञ के अनुष्ठान को पूर्ण किया था। आज नारियां सभी क्षेत्रों में आगे हैं तथा अपने दायित्वों का बखूबी निर्वाह भी कर रही हैं।

WhatsApp Image 2025-08-27 at 8.23.40 PM (1)
WhatsApp Image 2025-08-27 at 8.16.59 PM
WhatsApp Image 2025-08-27 at 8.12.15 PM
WhatsApp Image 2025-08-27 at 8.20.34 PM
WhatsApp Image 2025-08-27 at 8.06.17 PM
WhatsApp Image 2025-08-27 at 8.16.59 PM
WhatsApp Image 2025-08-27 at 7.53.14 PM
WhatsApp Image 2025-08-27 at 8.10.08 PM
WhatsApp Image 2025-08-27 at 7.42.57 PM
WhatsApp Image 2025-08-27 at 8.01.41 PM
WhatsApp Image 2025-08-28 at 11.04.56 AM
WhatsApp Image 2025-08-28 at 10.55.44 AM
WhatsApp Image 2025-08-28 at 10.49.19 AM
mantr
96f7b88c-5c3d-4301-83e9-aa4e159339e2 (1)
WhatsApp Image 2025-08-03 at 9.25.33 PM (1)
WhatsApp Image 2025-08-15 at 11.49.33 AM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 1.25.46 PM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 1.26.10 PM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 11.25.37 AM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 12.01.20 PM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 3.50.40 PM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 1.27.03 PM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 1.24.51 PM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 1.25.21 PM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 12.50.47 PM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 12.57.32 PM

श्री जायसवाल ने अपनी कविता द्वारा भी अपनी बात को प्रमाणित किया- ज़िम्मेदारियों का बोझ देकर तो देखो, हंसकर बोझ उठाती हैं ये बेटियां। प्रतिभा पाटिल, अनुसूईया उइके, आनंदी पटेल, द्रौपदी मुर्मू को तो देखो कैसे देश व प्रदेश को चलाती हैं ये बेटियां। वरिष्ठ कवयित्री मीना वर्मा ने अपने काव्य में भारतीय नारी से एक नए इतिहास के सृजन का आव्हान किया- भारत की नारी जाग तुझे अपना इतिहास बनाना है। वो बीत गईं काली रातें, अब नया सवेरा लाना है। तू आज के युग की नारी है, मीरा-सा विष नहीं पीना है। दुर्गा, काली, सत्रूपा बन खड़्ग हाथ में धरना है। वरिष्ठ कवि व सरगुजिहा रामायण के रचयिता बीडीलाल ने नारी के विविध रूपों की चर्चा करते हुए उसकी महान् शक्तियों का काव्यात्मक बखान किया- मैं भारत की नारी हूं। मैं ही माया, मैं ही ममता, गुरु और मैं जननी भी। माटी से मैं तन रचती हूं, रखती समझ हूं माली की। रण में मुझे कैकेयी जानो और घर में कौशिल्या भी। ओठों पर मुस्कान है मेरे, भौंहों की तीर-कमान भी। चांद-सा मुखड़ा चमक रहा है, अंदर है चट्टान भी। कमोबेश यही बात कवयित्री माधुरी जायसवाल ने अपनी उत्कृष्ट कविता में कही- मै दीये की लौ बनकर आंगन को रौशन करती हूं। मत खेलो मेरे जज़्बात से, अंगार भी बन सकती हूं। भड़क उठी तो अपनी ज्वाला से ख़ाक तुम्हें कर सकती हूं। कवि अजय श्रीवास्तव ने अपनी प्रिया के अप्रतिम त्याग-बलिदान, साहस व अदम्य जिजीविषा की स्मृतियों को सबके साथ साझा किया- मैं सुना रहा हूं अपनी प्रिया की कहानी। वो प्रिया जो अब नहीं है, दे गई क़ुर्बानी। ज़िंदगी में उसने कभी हार नहीं मानी।

कवयित्री अर्चना पाठक को लगता है कि महिलाओं की दशा में आज कोई ख़ास सुधार नहीं हुआ है। आज भी उसे परिवार, समाज हर जगह अपने सम्मान, स्वतंत्रता व हक़ के लिए जूझना पड़ रहा है। महिलाओं की इसी पीड़ा, संत्रास, संघर्ष व अप्रसन्नता का इज़हार उन्होंने अपनी कविता में बखू़बी किया- मनोयोग से चढ़ रही हूं क़दम मेरे साथ देते चल। आसपास कंटीले रास्ते फिर भी हौसला लेते चल। इक परकटी नारी लड़ेगी आज से। जमके लड़ेगी चील से, बाज़ से। युवाकवि अम्बरीष कश्यप ने लगे हाथ एक सलाह भी दे डाली- खु़द को इतना भी मत छुपाया कर, लोगों से मिल, नाच-गाया कर। अपनी छोटी ज़रूरतों के लिए मां को इतना भी ना सताया कर। शायर-ए-शहर यादव विकास की दृष्टि में नारी के बिना नर अधूरा है। उन्होंने इस अधूरेपन को दिलकश ग़ज़ल में नमूदार भी किया- क्या खू़ब शायर कहता है, दिल है वही जो दुखता है। ख़त पर आंसू टपके हैं, तुम बिन अधूरा लगता है। शिरीन खान को भी अपनी ज़िदगी एक अधूरी किताब-सी जान पड़ी- जिं़दगी इक शराब है शायद या कोई ख़्वाब है शायद। लमहा-लमहा नया दर्श सिखाती हुई एक नामुकम्मल क़िताब है शायद।

नारी की महानता के विषय में फ़िल्म एक्टर, डाॅयरेक्टर व कवि आनंद सिंह यादव ने ठीक ही कहा कि- हज़ारों फूल चाहिए माला बनाने के लिए। हज़ारों दीपक चाहिए एक आरती सजाने के लिए। हज़ारों बूंद चाहिए समुद्र बनाने के लिए पर एक ‘स्त्री’ अकेली ही का़फी है- घर को स्वर्ग बनाने के लिए। अंत में, दोहा छंद में अपनी बात कहनेवाले संस्था के अध्यक्ष कवि मुकुंदलाल साहू ने नारियों के प्रति सम्मान व आस्था का भाव व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का यादगार समापन किया- नारी है नारायणी, नारी-शक्ति अपार। नारी का वंदन करे, यह सारा संसार। वस्तु न समझें भोग की, दें उसको सम्मान। नारी भारत देश की, आन-बान है शान। इन कवियों के अलावा गोष्ठी में आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर, रंजीत सारथी, डाॅ0 उमेश पाण्डेय, संतोष दास सरल, राजेश पाण्डेय ’अब्र’, आशुतोष उपाध्याय, पूनम पाण्डेय और पूर्णिमा पटेल ने भी नारी विषयक अपनी श्रेष्ठ कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम का काव्यमय संचालन डाॅ0 उमेश पाण्डेय व आभार संस्था की उपाध्यक्ष कवयित्री व अभिनेत्री अर्चना पाठक ने किया। इस अवसर पर लीला यादव, अशोक सोनकर और अंजनी पाण्डेय उपस्थित रहे।

Pradesh Khabar

WhatsApp Image 2025-08-15 at 7.06.25 AM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 7.00.23 AM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 6.52.56 AM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 7.31.04 AM
e6e82d19-dc48-4c76-bed1-b869be56b2ea (2)
WhatsApp Image 2025-08-28 at 12.06.51 AM (2)
WhatsApp Image 2025-08-28 at 12.06.53 AM (1)
WhatsApp Image 2025-08-28 at 12.06.52 AM (1)
WhatsApp Image 2025-08-28 at 12.06.51 AM
WhatsApp Image 2025-08-28 at 12.06.54 AM
WhatsApp Image 2025-08-28 at 12.06.54 AM (2)
WhatsApp Image 2025-08-28 at 12.06.50 AM

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!