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कोयलांचल विश्रामपुर का मां 108 समलेश्वरी महामाया एवम आदि शक्ति मां कालरात्रि की जर्दस्त है महिमा

कोयलांचल विश्रामपुर का मां 108 समलेश्वरी महामाया एवम आदि शक्ति मां कालरात्रि की जर्दस्त है महिमा

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गोपाल सिंह विद्रोही/बिश्रामपुर – कोयलांचल विश्रामपुर में आदिशक्ति मां महामाया एवं मां कालरात्रि की दो मंदिरों में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ता है। भक्त चैत्र नवरात्र एवं शारदीय नवरात्र में अपनी मनोकामनाएं लिए दौड़े चले आते हैं। माता रानी अपने श्रद्धालुओं पर स्नेह रूपी आशीर्वाद आंखें बंद कर नवच्छावर कर देती है। सच्चे मन से इन दो देवियों की दरबार मे आ कर जो अपना हाजिरी देता है उसकी मनोकामनाएं मां अवश्य पूरी करती आइए जानते हैं मां की महता एवं अवतरण की संक्षिप्त कहानी।
श्री श्री 108 समलेश्वरी समलाया मंदिर
श्री श्री 108 समलेश्वरी समलाया मंदिर सरगुजा रियासत की कुलदेवी है, जो प्रारंभिक काल में आपने झोपड़ीनुमा मंदिर में विराजमान थी। अट्ठारह सौ ईसवी में सरगुजा महाराज द्वारा माता की आराधना पूजा पाठ कर इन्हें अंबिकापुर चलने का विनम्र प्रार्थना की । वर्तमान धार्मिक आस्था के केंद्र बने महामाया मंदिर अंबिकापुर में विराजमान हो गई। श्री श्री समलेश्वरी समलाई मंदिर सरगुजा नरेश की कुलदेवी है पूर्व में मां के दरबार में भैसा एवं बकरे की बलि चढ़ती थी जो कालांतर में यह प्रथा बंद कर दी गई । बकरे भैसा स्थान पर कुम्भडा की बलि दी जाती। सरगुजा महाराज द्वारा आदिशक्ति मां 1008 समलेश्वरी समलाया मंदिर अंबिकापुर महामाया मंदिर में स्थापित पूजा पाठ की जाती है परंतु कोयलांचल के लोगों अपने प्राचीन परंपराओं के अनुसार आदि शक्ति मां महामाया समलेश्वरी समलाया माता जी को केनापारा( तेलईकछार )में ही शारदीय नवरात्र एवं चैत्र नवरात्र में पूजा अर्चना करते हैं माता के मंदिर के संबंध में बताया जाता है कि पूर्व में मंदिर झोपड़ीनुमा थी .झोपड़ीनुमा के शिलालेख मे माता रानी की प्रतिमा उभरती हुई नजर आई । यहां 1800 वीं सदी मे खुदाई की जाने लगी तो कई शिलालेखों में देवी की प्रतिमा नजर आई। लोग बताते हैं कि आज भी जब आसपास खुदाई होती है तो कई शिलालेख निकलते है।4-5 फीट खुदाई करने पर शिलालेख निकलते हैं।वर्तमान मंदिर की दीवार में प्राचीन शिलालेख परिलक्षित होते हैं ।मां के प्राचीन झोपड़ी वर्तमान में भी मंदिर से सटा है जिसमें श्रद्धालु विधिवत पूजा अर्चना करते है। श्री श्री 108 समलेश्वरी समलाया महामाया मंदिर परिसर में शारदीय नवरात्र एवं चैत्र नवरात्र मे मेला सा सदृश बना रहता है। यहां हजारों की संख्या में माता के मंदिर में माथा टेकने पहुंचते हैं । भक्त मनोकामना ज्योति जलाते हैं।माता रानी भक्तों की मुरादे पूरी करती है।
स्वयंभू प्रगट है आदिशक्ति मां काल रात्रि
कोयलांचल बिश्रामपुर का आदिशक्ति मां महामाया का यह सबसे बड़ा दूसरा आस्था का केंद्र है जो श्री श्री 108 समलेश्वरी समलाया मंदिर से महज 200 मीटर की दूरी पर कृत्रिम पहाड़ पर आदिशक्ति मां कालरात्रि विराजमान है जो मां दुर्गा की सातवीं शक्ति के रूप में जानी जाती है। मंदिर के संबंध में बताया जाता है कि केनापारा (तेलईंकछार) की 10 वर्षीय बालक तरुण सेन अपने बाल शाखाओं के साथ एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के बंद पड़ी पोखरी खदान के कृत्रिम पहाड़ पर रोज की भांति खेलने घूमने पहुंचा इसी दौरान बालक तरुण सेन में जबरदस्त परिवर्तन आया यह देख कर बाल सखा उसे छोड़कर भाग गए और अपने गांव में आकर माता-पिता को बताया ।खबर पर गांव के लोग बच्चो द्वारा बताएं स्थल पर पहुंचे ,जहां तरुण अपने पूरे परिवर्तित स्वरूप में नजर आया और ग्रामीणों को बताया कि मैं भैरव हूं यहां माता कालरात्रि हैं यहां आप सब को खुदाई कीजिए ग्रामीणों ने तरुण सेन के बताए हुए स्थल को खोदा जहां आदिशक्ति मां कालरात्रि स्वयंभू प्रकट हुई। जिसे ग्रामीणों ने पूजा अर्चना प्रारंभ कर दी। यह घटना वर्ष 2006 की बताई जा रही है तब से यहां पूजा अर्चना नियमित प्रारंभ कर दी गई। आज नगर के कई प्रबुद्ध नागरिकों ने मंदिर का भव्य स्वरूप निर्माण कार्य में लगे हुए है।यहां पर मां शीतला, भैरव बाबा ,हनुमान जी की प्रतिमा है मंदिर स्थापित है ।यहां अंबिकापुर निवासी हेमंत अग्रवाल जो सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष गोयल के दमाद हैं ने शिवजी की बेहतरीन शिव मंदिर का निर्माण कराया है जो नेपाल स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है यहां पूरे नवरात्र मे हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है । मां कालरात्रि जहां विराजमान है वहां भव्य मंदिर का निर्माण जारी है यह धार्मिक स्थल वास्तव में अलौकिक है, मनमोहक है, सुकून प्रदान करता है, मन को शांति मिलती है।कृत्रिम पहाड़ों के बीच माता रानी का दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं अपने आप खींचे चले आते है।

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