मुंगेली : 13 मई को नेशनल लोक अदालत के आयोजन हेतु खण्डपीठ का किया गया गठन

मुंगेली : 13 मई को नेशनल लोक अदालत के आयोजन हेतु खण्डपीठ का किया गया गठन

ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM

जिला एवं सत्र न्यायालय मुंगेली में 13 मई को नेशनल लोक अदालत के आयोजन हेतु सुलहकर्ता की सेवाओं के लिए खण्डपीठों का गठन किया गया है, जिसमें खण्डपीठ क्रमांक 01 अरविन्द कुमार सिन्हा जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुंगेली, खण्डपीठ क्रमांक 02 प्रबोध टोप्पो प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुंगेली, खण्डपीठ क्रमांक 03 बलराम कुमार देवागंन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, खण्डपीठ क्रमांक 04 श्रीमती श्रुति दुबे व्यवहार न्यायाधीश वर्ग 02, खण्डपीठ 05 लोकेश कुमार व्यवहार न्यायाधीश वर्ग 02 मुंगेली एवं तहसील न्यायालय लोरमी हेतु खण्डपीठ क्रमांक 01 अनंतदीप तिर्की व्यवहार न्यायाधीश वर्ग 02 लोरमी का गठन किया गया है। इसी तरह कलेक्टर राहुल देव ने तालुका स्तर की खण्डपीठों का गठन किया है। इस खण्डपीठ के तहत न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मुंगेली में सुश्री आकांक्षा शिक्षा खलखो, न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व लोरमी में श्रीमति पार्वती पटेल, न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पथरिया में भरोसाराम ठाकुर, न्यायालय तहसीलदार मुंगेली में शेखर पटेल, न्यायालय तहसीलदार लोरमी में अजय कुमार शतरंज, न्यायालय तहसीलदार पथरिया में श्रीमति जयंती देवागंन, न्यायालय तहसीलदार लालपुर में दिलीप खाण्डे और न्यायालय तहसीलदार जरहागांव में लीलाधार ध्रुव पीठासीन अधिकारी होंगे।

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)
17a09f88-37fa-496a-8923-b0e0bac9f15d

जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविन्द सिन्हा के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मयंक सोनी ने बताया कि 13 मई को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में आम जनता के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत एक सुनहरा अवसर है। जिसमें उपस्थित होकर अपने मुकदमों का निस्तारण सुलह समझौते के आधार पर कराया जा सकता है। विभिन्न न्यायालयों में लंबित दीवानी एवं पारिवारिक मामले, 138- एनआईएक्ट, मोटर दुर्घटना, प्रतिकर, लघु फौजदारी मामले, बैंक वसूली के वादों का निस्तारण सुलह समझौते एवं अभिस्वीकृति के आधार पर किया जाएगा।