
Maharashtra Politics: रक्षा खडसे बोलीं—मैं ससुर और गिरीश महाजन के बीच सैंडविच बन गई
निकाय चुनावों से पहले महाराष्ट्र राजनीति में हलचल बढ़ गई है। एनसीपी (एसपी) नेता एकनाथ खडसे और बीजेपी नेता गिरीश महाजन के बीच विवाद गहरा गया है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे ने कहा—“मैं अपने ससुर और गिरीश महाजन के बीच सैंडविच बन गई हूं।” यहां पढ़ें पूरा राजनीतिक अपडेट।
खडसे–महाजन विवाद पर राजनीति गरमाई: रक्षा खडसे बोलीं—“मैं ससुर और गिरीश महाजन के बीच सैंडविच बन गई हूं”
महाराष्ट्र निकाय चुनावों से पहले जलगांव की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। एनसीपी (एसपी) नेता एकनाथ खडसे और बीजेपी के कद्दावर नेता गिरीश महाजन के बीच वर्चस्व की लड़ाई जारी है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे का बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
एकनाथ खडसे का जवाब: 30 मिनट में दे दिया था इस्तीफा
गिरीश महाजन के हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए एकनाथ खडसे ने कहा कि जब बीजेपी नेतृत्व ने उनसे इस्तीफा मांगा, तो उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 30 मिनट के भीतर पद छोड़ दिया था। उन्होंने कहा कि उन्हें कैबिनेट से बाहर नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने खुद इस्तीफा दिया, जबकि गिरीश महाजन ने कई आरोपों के बावजूद पद नहीं छोड़ा।
गिरीश महाजन का हमला: “अब उन्हें कोई पहचानता नहीं”
गिरीश महाजन ने करारा पलटवार करते हुए दावा किया कि आज एकनाथ खडसे का राजनीतिक असर काफी कम हो चुका है। महाजन ने चुनौती देते हुए कहा कि खडसे जलगांव जिले में एक नगरपालिक परिषद भी जिता कर दिखा दें।
खडसे की राजनीतिक यात्रा
एकनाथ खडसे लगभग तीन दशक तक बीजेपी में रहे। 2016 में पुणे के एक विवादित जमीन सौदे में उनका नाम आने पर उन्होंने देवेंद्र फडणवीस कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था।
इसके बाद वह एनसीपी में शामिल हुए। वर्ष 2023 में पार्टी टूटने के बाद वे शरद पवार गुट (एनसीपी–एसपी) में चले गए।
रक्षा खडसे बीच में फंसीं—“सैंडविच बन गई हूं”
राजनीतिक टकराव का असर केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे पर पड़ रहा है, जो एकनाथ खडसे की बहू हैं और गिरीश महाजन को पिता समान मानती हैं।
चोपड़ा शहर में एक चुनावी रैली के बाद उन्होंने कहा—
“एक तरफ नाथाभाऊ हैं—मेरे ससुर, और दूसरी तरफ गिरीश काका हैं—जो मेरे पिता जैसे हैं। दोनों के बीच विवाद होता है तो मैं पूरी तरह सैंडविच बन जाती हूं।”
रक्षा खडसे रावेर लोकसभा क्षेत्र से तीसरी बार सांसद चुनी गई हैं। नगरपालिका परिषद चुनावों से पहले खडसे–महाजन विवाद ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है।








