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उज्जैन महाकाल लोक भ्रष्टाचार में भाजपा-कांग्रेस दोनों के दामन दागदार ?

उज्जैन महाकाल लोक भ्रष्टाचार में भाजपा-कांग्रेस दोनों के दामन दागदार ?

उमेश प्रधान /न्यूज रिपोर्टर/भोपाल/ देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के महाकाल परिसर में बनाए गए महाकाल लोक की मूर्तियां आंधी में ढहने के बाद से राज्य की सियासत गर्माई हुई है। भाजपा और कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों ने एक बात तो सामने ला ही दी है कि इन मूर्तियों की स्थापना का भुगतान दोनों दलों की सरकारों में हुआ। साथ में दोनों ओर से लग रहे आरोपों ने एक सवाल तो उठा ही दिया है कि क्या दोनों के दामन दागदार हैं।
पिछले दिनों उज्जैन में तेज आंधी और बवंडर के बीच महाकाल लोक में स्थापित की गई सप्तऋषि की प्रतिमाओं में से छह प्रतिमाएं पेडेस्टल से गिरकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हे गई थी। इसके बाद से कांग्रेस की ओर से भाजपा पर लगातार हमले बोले जा रहे हैं। इसी बीच सरकार की ओर से मूर्तियां स्थापित किए जाने की प्रक्रिया का ब्यौरा जारी किया गया है, उससे एक बात तो साफ हो जाती है कि मूर्तियां की स्थापना का भुगतान कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों की सरकार के कार्यकाल में हुआ है।

मूर्तियां स्थापना की प्रक्रिया में चरणबद्ध तरीके से भुगतान की बात कही जा रही है। मूर्तियां स्थापित करने वाली कंपनी के पूरा भुगतान किया जा चुका है, यह उपलब्ध आंकड़े बताते है। मूर्तियां स्थापित करने की निविदा भाजपा के शासनकाल में जारी हुई और दिसंबर 2018 में कांग्रेस की सरकार आ गई। मूर्तियां स्थापित करने की प्रक्रिया में सामग्री प्रदाय पर 20 प्रतिशत, डिजाइनिंग, मूर्तिकला, नक्काशी, फिनिशिंग होने पर 40 प्रतिशत की राशि का भुगतान कांग्रेस के शासनकाल में हुआ। मार्च 2020 में कांग्रेस की सरकार गिर गई और उसके बाद मार्च 2021 में मूर्ति स्थापना पर 25 फीसदी राशि का भुगतार हुआ, तब तक भाजपा की सरकार सत्ता में आ चुकी थी। फिर बाकी 15 फीसद राशि के भुगतान की बात सामने आई। इस तरह मूर्ति स्थापना के काम में 60 फीसदी राशि कांग्रेस और 40 फीसदी राशि का भुगतान भाजपा के कार्यकाल में हुआ।

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इस पूरे मामले के लेकर राज्य सरकार के नगरीय विकास और आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने बताया कि महाकाल मंदिर के पास श्रीमहाकाल महालोक में 100 से अधिक एफआरपी (फाइबर रेनफोर्सड फाइबर) की मूर्तियां स्थापित हैं। इनमें कई मूर्तियां 10 फुट से अधिक ऊंचाई तथा वृहद आकार की हैं। इन्हीं 100 से अधिक मूर्तियों में से एफआरपी से निर्मित सप्त ऋषियों की मूर्ति भी 10 फुट ऊँचे स्तंभ पर स्थापित थीं तथा इन सात मूर्तियों की ऊँचाई लगभग 11 फीट की है। इनमें से छह मूर्तियां आंधी और बवंडर के चलते पेडेस्टल से गिर गई।

मंत्री भूपेंद्र सिंह की ओर से संवाददाताओं के सामने जो ब्यौरा पेश किया गया है उसके मुताबिक पहले दो चरण का 60 फीसदी भुगतान उस अवधि में हुआ जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, वहीं बाकी 40 प्रतिशत भुगतान भाजपा की सरकार आने पर हुआ। साथ ही मूर्तियों के इस कार्य में उपयोग होने वाली एफआरपी सामग्री का थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन प्रतिष्ठित संस्था सिपेट भोपाल से करवाया गया था। सिपेट की टेस्ट रिपोर्ट 12 फरवरी 2022 में यह एफआरपी सामग्री मानकों के अनुसार पाई गई थी।

मंत्री का दावा है कि कई स्थानों पर मूर्तियों के निर्माण में एफआरपी सामग्री का उपयोग होता आया है। इसी तर्ज पर उज्जैन श्रीमहाकाल महालोक में भी मूर्तियों के निर्माण में निविदा शर्तों के तहत एफआरपी सामग्री का उपयोग किया गया तथा यह एफआरपी सामग्री थर्ड पार्टी निरीक्षण में गुणवत्तापूर्ण पाई गई थी।

सरकार की ओर से जारी किए गए ब्यौरे पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अजय सिंह यादव का कहना है कि सरकार के मंत्री ने यह तो मान ही लिया है कि उज्जैन महाकाल लोक कांग्रेस के कार्यकाल में बनना शुरू हुआ, अब तक तो भाजपा इसे झुठलाती रही है। जहां तक भुगतान की बात है कि किसी कार्य का पूरा भुगतान तभी होता है जब कार्य गुणवत्तापूर्णऔर तय मानकों के अनुरुप पाया जाता है।

उन्होने आगे कहा, भाजपा के शासनकाल में अंतिम भुगतान हुआ है, लिहाजा भुगतान करने वाली सरकार की जिम्मेदारी है कि वह भुगतान से पहले सारे परीक्षण कराती। मंत्री के बयान से एक बात तो साफ हो गई है कि भाजपा की सरकार ने गुणवत्ता का परीक्षण किए बिना ही अंतिम भुगतान कर दिया और यह अंतिम भुगतान तब हुआ होगा जब मांगा गया कमीशन मिल गया होगा। वैसे भी राज्य में भाजपा की सरकार के काल में पचास फीसदी कमीशन दिए बिना कोई काम हो कहां रहा है।

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