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कटघोरा वनमंडल फिर सुर्खियों में.. बाबू और कंप्यूटर ऑपरेटर ने ऑफिस की गोपनीय जानकारी पूर्व डिप्टी रेंजर के आरटीआई कार्यकर्ता पुत्र को देकर खेला लाखो का खेल

कोरबा/कटघोरा :- कटघोरा वनमंडल की विवादास्पद कार्यशैली थमने का नाम नहीं ले रही है। स्टाप डेम के नाम पर बड़ा घोटाला विधानसभा में सामने आया तो सदन को भी गुमराह करने वाली जानकारी दी गई। निर्माण कार्यों में गुणवत्ताहीनता के किस्से तो बदस्तूर जारी हैं। वन अधिकारियों पर ठेकेदार एक तरह से हावी होकर काम करते आ रहे हैं तो वहीं नियम-कायदों को धता बताकर घटिया सीमेंट की आपूर्ति का मामला भी मीडिया ने प्रमुखता से उजागर किया। आखिरकार सीमेंट बदलना पड़ा। कटघोरा वनमंडल की विवादित कार्यशैली का एक और मामला सामने आया है जिसमें दफ्तर का भेदी बने व्यय शाखा के बड़े बाबू और एक दैनिक वेतन भोगी कम्प्यूटर ऑपरेटर ने अपने स्वार्थ लाभ के लिए दफ्तर की गोपनीय जानकारी पूर्व डिप्टी रेंजर के पुत्र आरटीआई कार्यकर्ता व ठेकेदार को मुहैया कराई। अधिकारियों की नाक के नीचे से ये जानकारियां वर्षों से निकलती रही लेकिन किसी को हवा तक नहीं लगी। इनकी बदौलत रेंजर आर्थिक लूट का शिकार होते रहे और दफ्तर में भ्रष्ट कार्यशैली को बढ़ावा मिलता रहा। नि:संदेह अधिकारियों की उदासीनता और अधीनस्थ कर्मचारियों पर नियंत्रण नहीं होने का यह दुष्परिणाम है कि दफ्तर की जानकारी लीक होती रही। बता दें कि हाल ही में ईएसआईपी योजना के कार्य के संबंध में लगभग 95 लाख रुपए का चेक व्यय शाखा से काटा गया। इसी तरह लाखों और करोड़ों रुपए के चेक विभिन्न रेंजरों के लिए भुगतान हेतु काटे गए। इसकी जानकारी पूर्व डिप्टी रेंजर के पुत्र को रेंजरों से पहले मिलती रही और वह भुगतान पर सवाल उठाकर रेंजरों से वसूली करता रहा। 95 लाख का भुगतान मामले में भी हालांकि विभागीय भ्रष्टाचार हुआ है जिसमें मजदूर कोटा, बिलासपुर, सकरी, मुंगेली आदि क्षेत्रों से लाना बताया गया और बोगस भुगतान किया गया जबकि कार्य ग्राम बगदरा पाली में हो रहा था। गोपनीय जानकारी मिलते ही पूर्व डिप्टी रेंजर के पुत्र ने वसूली अभियान शुरू कर दिया और संबंधित रेंजर के साथ ही एक अन्य रेंजर सत्तु जायसवाल को भी इस आशय से मैसेज किया कि तुम्हारे यहां 1.56 करोड़ का चेक कटा है और लेबर पेमेंट में क्या डील कर रहे हैं? सत्तु जायसवाल ने 3 जून को मिले इस मैसेज से सीधे डीएफओ शमा फारूखी को रूबरू कराया। मामला सामने आने पर पैरों तले जमीन खिसक गई और सभी बाबुओं के मोबाइल जप्त कर इसकी जांच शुरू की गई। दैनिक वेतन भोगी कम्प्यूटर ऑपरेटर शुभम जायसवाल और व्यय शाखा के बड़े बाबू सीधे टारगेट में रहे। सूत्र बताते हैं कि ड्यूटी से छूटने के बाद शुभम जायसवाल अपने घर न जाकर पूर्व डिप्टी रेंजर के पुत्र के घर सीधे पहुंचा तब शक यकीन में बदल गया। बड़े बाबू और शुभम के द्वारा न सिर्फ गोपनीय जानकारी लीक की जा रही थी बल्कि दोनों मिलकर रेंजरों से डील कर ठेका भी ले रहे थे। बड़ा बाबू 8-10 मिक्सर मशीन, पानी टैंकर का भी मालिक बताया जा रहा है। इस मामले में जांच कितनी ईमानदाराना होगी और किस हद तक जाकर ठहरेगी, गोपनीय जानकारी लेने वाले पूर्व डिप्टी रेंजर के पुत्र और जानकारी देने वाले ऑपरेटर एवं बड़े बाबू पर क्या कार्यवाही की जाएगी, यह तो अभी रहस्य के गर्भ में है। दूसरी ओर यह एक बड़ा मामला है जिसकी तह तक जाकर जांच होना जरूरी है। नि:संदेह अधिनस्थ कर्मचारियों की कार्यशैली से अधिकारियों और अधिकारियों की कार्यशैली से शासन की छवि धूमिल होती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि कटघोरा वनमंडल इस मामले में अव्वल है और डीएफओ की पदस्थापना के बाद से अनेकों सवाल उठते रहे हैं किंतु हमेशा शासन की ओर से बचाव की भूमिका निभाई जाती रही। यहां तक कि विपक्ष भी भ्रष्टाचार के मामलों में कटघोरा वनमंडल का ज्यादा कुछ नहीं कर पाया जबकि सारे सबूत खिलाफ में रहे जो विपक्ष के नेताओं ने ही नेता प्रतिपक्ष के जरिए सदन में पेश भी किए।

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बाबूगीरी करते करते बन गए ठेकेदार
कटघोरा वनमंडल हो या दूसरे अन्य विभाग, यहां पदस्थ बाबुओं में से कुछ ही जड़ें इतनी गहरी हो गई हैं कि इन्हें न तो प्रशासन का भय है और न शासन का।
बाबुगीरी करते-करते ठेकेदार बन गए इन लोगों पर किसी का जोर नहीं। बात उछलने पर सेटिंग का लंबा खेल भी खेलते हैं जिसमें इनके अवैध भ्रष्ट कार्यों में सहयोगी भी अहम भूमिका निभाते रहे हैं। इस मामले में बड़े बाबू का एक और किस्सा कटघोरा में चर्चित है। जनवरी महिने में कटघोरा थाना के एक पुलिस कर्मी ने दूसरे के विभागीय आवास से बाबू को पकड़ा और लेन-देन कर मामला रफा-दफा कर दिया। अभी हाल ही में मैडम के पास रोते-बिलखते शिकायत पहुंच गई। हालांकि मैडम ने इसे गंभीरता से लिया तो है पर चरित्र के ढीले बाबू पर कोई एक्शन नहीं हुआ है। सूत्र बताते हैं कि इस बाबू और ऑपरेटर को हटा दिया गया है। बाबू को कोरबा और ऑपरेटर को जांच नाका की जिम्मेदारी थमाई गई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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