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नाचा गम्मत हमारी लोककला संस्कृति की हैं प्राचीन धरोहर – आशीष छाबड़ा

नाचा गम्मत हमारी लोककला संस्कृति की हैं प्राचीन धरोहर – आशीष छाबड़ा

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बेमेतरा – विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत जेवरी में अयोजित छत्तीसगढ़ स्तरीय नाचा गम्मत महोत्स्व में मुख्य अतिथि बेमेतरा विधायक आशीष छाबड़ा शामिल हुए। सर्वप्रथम छत्तीसगढ़ महतारी की तैल चित्र में माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किए। इस अवसर पर विधायक आशीष छाबड़ा ने संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी बोली भाखा अपनी बहुमूल्य संस्कृति को समेटे हुए हमारी धरोहर हैं, नाचा गम्मत का उद्देश्य हमारे मानव समाज में निहित विभिन्न बुराइयों के प्रति लडने के लिए आगे आने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। यह सिर्फ मनोरंजन का साधन ना होकर हमारी संस्कृति के साथ साथ समाज में विभिन्न बुराइयों के ऊपर कटाक्ष करने का माध्यम हैं। नाचा गम्मत धरोहर को सहेजने के लिए प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व विलुप्त लोककला संस्कृति को फिर से सहजने का काम कर रही हैं। हमारी आने वाली पीढी तक पहुंचाने के लिए हमारे युवा वर्ग आज परस्पर सामने आकर ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करा रहें हैं, जो निश्चित ही हमारे आने वाले भविष्य के लिए बहुत अच्छा साबित होगा। पूर्व कालीन ग्रामीण अंचलों में यह हमारी संस्कृति में मनोरंजन का प्रमुख साधन था, परंतु धीरे-धीरे मोबाइल और टीवी प्रसारण के कारण हम इस परंपरा को भूलते जा रहे थे, किंतु पुनः ग्रामीण अंचलों में नाचा गम्मत प्रतियोगिता मंच का आयोजन कर इस ऐतिहासिक परंपरा को बचाने का प्रयास किया जा रहा हैैं, जो कि एक सराहनीय पहल हैं। जिस प्रकार से हमारी युवा पीढ़ी सिर्फ आधुनिक युग के कंप्यूटर की दुनिया पर व्यस्त हैं, ऐसे समय में हमारी लोक संस्कृति का आयोजन कर अपनी संस्कृति की पहचान कराने का सबसे अच्छा माध्यम इस प्रकार का ऐतिहासिक आयोजन हैं। छत्तीसगढ़ की प्रथम नाचा पार्टी रवेली नाचा पार्टी हैं, जिसके संस्थापक दाऊ दुलार सिंह मंदराजी थे, जिन्हें नाचा के भीष्म पितामह कहा जाता हैं। छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति में नाचा का विशिष्ट स्थान हैं। छत्तीसगढ़ी नाचा-गम्मत को दाऊ दुलार सिंह मदराजी ने नई ऊँचाई दी हैं तथा छत्तीसगढ़ी लोक संगीत व लोक गीतों को लोक कंठ तक पहुँचानें में स्व. खुमानलाल साव का विशिष्ट योगदान हैं। छत्तीसगढ़ी नाचा और छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के ये दोनों शिखर पुरूष सदैव याद किये जायेंगे, छत्तीसगढ़ी नाचा-गम्मत और लोक संस्कृति के प्रति अनुराग रखने के कारण दाऊजी समर्पित भाव से कला जगत से जुड़े रहें और छत्तीसगढ़ी नाचा-गम्मत को जीवन भर साधते रहें। उन्होंने नाचा की खड़े साज को परिष्कृत और आधुनिक स्वरूप प्रदान किया, परिणाम स्वरूप छत्तीसगढ़ी नाचा-गम्मत जन-जन तक पहुँचा, दाऊ मदराजी ने रवेली नाचा पार्टी का गठन किया और छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों में बिखरे हुए कलाकारों को संगठित किया और नाचा के लिए काम करते रहे। छत्तीसगढ़ी नाचा-गम्मत को दर्शकों ने खूब सराहा, गाँव हो या शहर में नाचा की खूब धूम मची, दाऊ मंदराजी सिनेमाघरों को भी मात देने में सफल रहें, सही मायने में नाचा, छुआछूत, भ्रष्टाचार, पूँजीवाद, सामाजिक कुरीतियाँ और ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक जन आन्दोलन था, जिससे लोग प्रभावित होते रहें और जुड़ते रहें। इस अवसर पर पंचराम डोंडे सरपंच, श्रीहरी पटेल शाकम्भरी बोर्ड, बसंत चक्रधारी संचालक माटिकला बोर्ड, डोमार सिंह कुंवर सलाहकार, रंजीत चक्रधारी प्रदेश अध्यक्ष नाचा गम्मत संघ, हर्बचन श्रीवास, ध्रुव साहू, माखन साहू, मिथलेश वर्मा उपाध्यक्ष जनपद पंचायत बेमेतरा, संतराम यादव, मोहित वर्मा, महानद यादव, दौलत साहू, टीकाराम साहू, मोहन साहू, द्वारिका पाण्डे, ओनी महिलाग, हेमकुमार साहू, योगेश साहू, दाउलाल साहू, चेतन साहू, मुक्तानद साहू, द्वारिका साहू, दलेस्वर साहू अध्यक्ष जिला नाचा गम्मत संघ, रूपेश देशमुख, बोधन साहू, अभन्नसेन, खोमलाल साहू, तुलसी साहू, फेरहा साहू, सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहें।

Ashish Sinha

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