इस जज को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार और कर दिया सस्पेंड, जानें क्या है पूरा मामला…

हैदराबाद। तेलंगाना हाई कोर्ट ने हैदराबाद के विशेष सत्र न्यायाधीश के जय कुमार को निलंबित कर दिया है। मामला सांसदों और विधायकों से संबंधित एक मामले में सुनवाई करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) राजीव कुमार और अन्य के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के आदेश से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने जज के निलंबन के साथ ही उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही भी शुरू कर दी है। जज को आदेश दिया गया है कि वह हाई कोर्ट की अनुमति के बिना हैदराबाद नहीं छोड़ेंगे।

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चुनावी हलफनामे में छेड़छाड़ से जुड़ा मामला

यह मामला तेलंगाना के मंत्री श्रीनिवास गौड़ से जुड़ा है। महबूबनगर के एक मतदाता ने 2018 में श्रीनिवास गौड़ पर चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव अधिकारियों ने गौड़ को हलफनामे के साथ छेड़छाड़ करने और इसे दाखिल करने के बाद संशोधन करने की अनुमति दी।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने कहा कि गौड़ कानूनी रूप से दस्तावेज को अद्यतन कर सकता है। हालांकि, जिला न्यायाधीश ने एक समानांतर आदेश में महबूबनगर पुलिस अधिकारियों को सीईसी, गौड़ और अन्य चुनाव अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए कहा। हाई कोर्ट ने कहा, ‘जज ने हद पार कर दी’।

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निर्वाचन आयोग पहुंचा था हाई कोर्ट की शरण में

इसके बाद निर्वाचन आयोग ने जय कुमार के खिलाफ हाई कोर्ट में शिकायत की। अदालत के रजिस्ट्रार जनरल ने निष्कर्ष निकाला कि प्रथम दृष्टया विशेष न्यायाधीश ने जल्दबाजी में काम किया और बिना प्रारंभिक जांच के आदेश पारित किए।

जज ने दी थी पुलिस को चेतावनी

31 जुलाई को जय कुमार ने महबूबनगर पुलिस को सीईसी, गौड़ और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। दिलचस्प बात यह है कि उच्च न्यायालय ने उसी दिन एक आदेश पारित किया था जिसमें कहा गया था कि नामांकन के दौरान एक उम्मीदवार के अपने हलफनामे में सुधार करने में कुछ भी गलत नहीं है। 12 अगस्त को जय कुमार ने मौखिक रूप से पुलिस को चेतावनी दी कि अगर वे उस दिन शाम 4 बजे से पहले मामला दर्ज करने में विफल रहे तो अवमानना का मामला दर्ज किया जाएगा। इसके बाद पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर लिया। हालांकि, लिखित आदेश में कहा गया है कि उन्होंने मामले में उठाए गए कदमों पर पुलिस से रिपोर्ट मांगी है।

क्या कहना है सीनियर वकील का

वरिष्ठ वकील ए सत्य प्रसाद ने कहा कि एक बार उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर होने के बाद, एक निचली अदालत को उसी मामले में एक अलग मामले पर विचार नहीं करना चाहिए। इस मामले के सभी संबंधित पहलू चुनाव याचिका का हिस्सा होने चाहिए। इसके अलावा, पद धारण करने वाले लोगों के खिलाफ कार्यवाही करते समय एक सक्षम प्राधिकारी से पूर्व मंजूरी प्राप्त करना आवश्यक है