चेन्नई में ED की बड़ी कार्रवाई: थंगम स्टील और पीएस कृष्णमूर्ति स्टील्स के ठिकानों पर छापेमारी, 311 करोड़ की SBI धोखाधड़ी में 100 करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्तियां जब्त
चेन्नई: भारत में कड़े आर्थिक और कॉर्पोरेट अपराधों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) के चेन्नई जोनल कार्यालय ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने चेन्नई में स्टील निर्माण और व्यापार क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख कंपनियों के 7 ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान (Search Operations) चलाया है। यह कार्रवाई M/s. थंगम स्टील लिमिटेड (TSL), M/s. पीएस कृष्णमूर्ति स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड (PSK) और उनके निदेशकों सहित मुख्य सह-आरोपियों के खिलाफ की गई है। इस पूरे घोटाले के कारण भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसके सहयोगी बैंकों को लगभग 311 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है।
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह सर्च ऑपरेशन 19 मई, 2026 को चेन्नई के विभिन्न रणनीतिक ठिकानों पर एक साथ चलाया गया। जांच दल को इन ठिकानों से व्यापक वित्तीय हेरफेर और काले धन को सफेद करने (Money Laundering) से जुड़े बेहद चौंकाने वाले सबूत मिले हैं। इस कार्रवाई ने बैंकिंग क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है और कॉर्पोरेट जगत के भीतर चल रहे फर्जीवाड़े के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।
मामले की पृष्ठभूमि: CBI की FIR और चार्जशीट बना आधार
ED द्वारा शुरू की गई इस मनी लॉन्ड्रिंग जांच का मुख्य आधार केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), आर्थिक अपराध शाखा (EOB), चेन्नई द्वारा दर्ज की गई दो अलग-अलग प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) हैं। सीबीआई ने इन कंपनियों और उनके प्रमोटरों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया था।
सीबीआई की गहन जांच के बाद न्यायालय में चार्जशीट (आरोप पत्र) भी दाखिल की जा चुकी है। सीबीआई की चार्जशीट में साफ तौर पर कहा गया था कि मैसर्स थंगम स्टील लिमिटेड और मैसर्स पीएस कृष्णमूर्ति स्टील प्राइवेट लिमिटेड ने बेहद सुनियोजित तरीके से सरकारी स्वामित्व वाले देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को धोखा दिया और जनता के पैसों की हेराफेरी की। इसी वित्तीय अनियमितता को देखते हुए ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामले को अपने हाथ में लिया ताकि अपराध से अर्जित संपत्ति (Proceeds of Crime) का पता लगाया जा सके।
धोखाधड़ी का तरीका (Modus Operandi): फर्जी दस्तावेज और दोहरी बैलेंस शीट
प्रवर्तन निदेशालय की वित्तीय जांच टीम ने जब इन कंपनियों के खातों और लोन दस्तावेजों को खंगाला, तो कॉरपोरेट धोखाधड़ी का एक बेहद जटिल और शातिराना पैटर्न सामने आया। आरोपी कंपनियां मूल रूप से स्टील निर्माण और ट्रेडिंग के कारोबार में सक्रिय थीं। लेकिन इस वैध व्यापार की आड़ में इन कंपनियों के निदेशकों ने बैंकों से मोटी रकम ऐंठने के लिए एक सुनियोजित चक्रव्यूह तैयार किया था।
ईडी की जांच से पता चला है कि वर्ष 2007 और 2013 के बीच की अवधि के दौरान, आरोपियों ने गलत इरादे से एसबीआई कंसोर्टियम (बैंकों के समूह) से अपनी कैश क्रेडिट (CC) और लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) की सीमाओं को अवैध रूप से बढ़वाया था। इसके लिए उन्होंने निम्नलिखित हथकंडे अपनाए:
धोखाधड़ी के प्रमुख तरीके जिन पर ED ने किया खुलासा:
- फर्जी वित्तीय विवरण (Forged Statements): बैंकों के सामने खुद को आर्थिक रूप से मजबूत दिखाने के लिए प्रमोटरों ने फर्जी फाइनेंशियल स्टेटमेंट, बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए स्टॉक स्टेटमेंट और प्राप्य (Receivable) राशियों के झूठे आंकड़े पेश किए।
- दोहरी बैलेंस शीट का खेल: सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि निदेशकों ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज (ROC) के सामने पूरी तरह से अलग-अलग और हेरफेर की गई बैलेंस शीट पेश कीं, ताकि उनकी वास्तविक और जर्जर वित्तीय स्थिति किसी की पकड़ में न आ सके।
- काल्पनिक गोदाम और फर्जी परिवहन: ऋण सीमा को मंजूरी दिलाने के लिए कागजों पर ऐसे गोदामों (Godowns) को दिखाया गया जो वास्तव में थे ही नहीं। इसके साथ ही कच्चे माल की आवाजाही दिखाने के लिए फर्जी परिवहन रिकॉर्ड (Transport Records) तैयार किए गए।
- सर्कुलर ट्रेडिंग (Circular Trading): अपनी कंपनियों का टर्नओवर और मुनाफा कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए आपस में जुड़ी हुई डमी फर्मों के बीच केवल कागजों पर माल की खरीद-बिक्री दिखाई गई, जिससे बैंक अधिकारियों को गुमराह किया जा सके।
फंड की हेराफेरी (Diversion) और शेल कंपनियों का नेटवर्क
एक बार जब बैंकों द्वारा बढ़ी हुई ऋण सीमा और वर्किंग कैपिटल फंड जारी कर दिया जाता था, तो आरोपी निदेशक उस धन को स्टील व्यवसाय में लगाने के बजाय तुरंत डायवर्ट (हस्तांतरित) कर देते थे। ईडी की जांच से स्पष्ट हुआ है कि इस सार्वजनिक धन को वास्तविक व्यवसाय से हटाकर फर्जी और शेल (मुखौटा) कंपनियों के बैंक खातों में डाल दिया जाता था।
मनी लॉन्ड्रिंग की भाषा में इसे ‘लेयरिंग’ (Layering) कहा जाता है, जहां पैसों को इतनी बार और इतने अलग-अलग खातों में घुमाया जाता है कि उसका मूल स्रोत ढूंढ पाना लगभग असंभव हो जाए। जांचकर्ताओं ने पाया कि इस डायवर्ट किए गए पैसे का इस्तेमाल निदेशकों ने व्यक्तिगत संपत्ति बनाने और एक अन्य स्टील डिवीजन के अधिग्रहण के लिए किया। इस पूरी साजिश के जरिए भारतीय स्टेट बैंक को सीधे तौर पर करीब 311 करोड़ रुपये का भारी नुकसान पहुंचाया गया, जबकि आरोपियों ने अवैध रूप से व्यक्तिगत लाभ कमाया।
बड़ी सफलता: 100 करोड़ रुपये से अधिक की 43 बेनामी संपत्तियां चिन्हित
19 मई को की गई छापेमारी में ईडी के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। जांच एजेंसी ने आरोपियों, उनके परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और बेनामीदारों (Benamidars) के नाम पर दर्ज भारी मात्रा में चल और अचल संपत्तियों का पता लगाया है। इन संपत्तियों को इस तरह से छिपाकर और दूसरों के नाम पर रखा गया था ताकि बैंक कभी भी लोन रिकवरी (ऋण वसूली) के लिए इन पर अपना दावा न ठोक सके।
तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईडी ने कुल 43 अचल संपत्तियों (Immovable Properties) की पहचान की है जो पूरी तरह से बेनामी नामों पर खरीदी गई थीं। शुरुआती अनुमानों और बाजार दरों के अनुसार, इन चिन्हित बेनामी संपत्तियों की कुल कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
| जांच का मुख्य बिंदु | मामले से जुड़े महत्वपूर्ण विवरण |
|---|---|
| आरोपी संस्थाएं (Entities) | M/s. थंगam स्टील लिमिटेड (TSL) और M/s. पीएस कृष्णमूर्ति स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड (PSK) |
| प्रभावित मुख्य बैंक | भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और कंसोर्टियम बैंक |
| घोटाले की कुल अनुमानित राशि | लगभग ₹311 करोड़ |
| अपराध की अवधि | वर्ष 2007 से 2013 के बीच |
| सर्च ऑपरेशन की तारीख और स्थान | 19 मई, 2026 — 7 परिसर, चेन्नई |
| पहचानी गई बेनामी संपत्तियां | 43 अचल संपत्तियां (Immovable Properties) |
| जब्त/चिन्हित संपत्ति का मूल्य | ₹100 करोड़ से अधिक (अनुमानित) |
आगे की राह: जांच का दायरा बढ़ने की उम्मीद
ईडी की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद चेन्नई के बैंकिंग और औद्योगिक सर्कल्स में हड़कंप मचा हुआ है। वर्तमान में ईडी की टीम जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक डेटा, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, और बही-खातों का बारीकी से विश्लेषण कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट (CAs) और तत्कालीन बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है, जिन्होंने दोहरी बैलेंस शीट को हरी झंडी दी और फर्जी गोदामों के सत्यापन में ढिलाई बरती।
प्रवर्तन निदेशालय ने साफ किया है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण के सर्च एक्शन को पार कर चुकी है और आने वाले दिनों में मनी लॉन्ड्रिंग के इस पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने के लिए और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। प्रमोटरों और उनके करीबी सहयोगियों को जल्द ही समन जारी कर पूछताछ के लिए मुख्यालय बुलाया जाएगा।











