याचिकाकर्ता मुन्ना खान हाई कोर्ट में पेश नही कर पाए अपनी अध्यक्षता का नियुक्ति पत्र

याचिकाकर्ता मुन्ना खान हाई कोर्ट में पेश नही कर पाए अपनी अध्यक्षता का नियुक्ति पत्र

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_जावेद खान की अध्यक्षता वाली कमेटी रहेगी बरकरार, हाई कोर्ट ने स्टे किया समाप्त_

नर्मदापुरम । दो महीने की खींचतान के बाद आखिर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर से नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर की अंजुमन एहले इस्लाम कमेटी को बड़ी राहत मिली है। जावेद खान की अध्यक्षता वाली कमेटी सहित बोर्ड को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली गई है। इससे यह भी साफ हो गया कि कमेटी गठन का काम वक्फ बोर्ड के फैसले के मुताबिक किया गया है और इसमें मुख्य कार्यपालन अधिकारी की व्यक्तिगत रुचि नहीं थी। नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर निवासी मुन्ना खान ने बोर्ड द्वारा गठित की गई वक्फ कमेटी के निर्णय को जबलपुर उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी और अदालत से गुहार लगाई थी कि बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कमेटी का गठन किया है। सीईओ के इस निर्णय को निरस्त किया जाए। इस मामले में उच्च न्यायालय में बहस के दौरान सरकारी वकील मुकेश अग्रवाल ने माननीय अदालत के समक्ष दस्तावेज पेश किए और बताया कि वक्फ कमेटियों के गठन का निर्णय बोर्ड द्वारा लिया जाता है। बोर्ड के प्रस्ताव और संकल्प के बाद ही कमेटी बनाने का निर्णय लिया जाता है। बोर्ड के फैसले पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी अपने हस्ताक्षर से बोर्ड द्वारा अनुमोदित की गई कमेटी के आदेश जारी करते हैं। यह फैसला सीईओ का न होकर बोर्ड का होता है। माननीय अदालत ने सरकारी वकील की दलील सुनने के बाद याचिकाकर्ता मुन्ना खान के वकील तकमील नासिर से जवाब तलब किया और कहा कि वह या तो याचिका वापस लें अन्यथा अदालत इसे खारिज करती है। अदालत के इस रवैये को देख याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली। माननीय न्यायाधीश विवेक अग्रवाल के इस निर्णय से कानूनी परेशानी झेल रहे बक्फ बोर्ड को बड़ी राहत मिली है।

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*याचिकाकर्ता अपनी अध्यक्षता का नियुक्ति पत्र पेश नही कर पाए*

सोहागपुर निवासी मुन्ना खान द्वारा याचिका में स्वयं को अंजुमन एहले इस्लाम कमेटी का सदर बताते हुए याचिका प्रस्तुत की थी, जिसको लेकर जस्टिस विवेक अग्रवाल द्वारा 20 दिसंबर 2023 को अंतिम सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील से याचिकाकर्ता के अध्यक्ष का नियुक्ति आदेश प्रस्तुत करने को कहा तो उन्होंने अपनी असमर्थता बताई एवं न्यायालय से समय मांगा जिस पर जस्टिस ने फटकार लगाते हुए समय देने से इनकार कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने की प्रार्थना की। जिस पर उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा याचिका को खारिज करते हुए स्टे आदेश समाप्त कर दिया

अवाम ने कहा- हक की जीत हुई

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद जावेद खान की अध्यक्षता वाली अंजुमन एहले इस्लाम कमेटी के गठन पर कोई आच नहीं आई, कमेटी बरकरार रहेगी। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मुस्लिम समाज में खुशी का माहौल है एवं समाजजनों का कहना है कि हक की जीत हुई। मुबारकबाद देने वालो में बशीर खान मैनेजर, हाजी रशीद खान, सैय्यद एजाज अली, हाजी हुसैन इंदौरी, शेर खान अधिवक्ता, हनीफ खान अधिवक्ता, इस्तेखार अहमद, वसीम खान, अनीस खान, आरिफ खान, गुफरान अली, राजा खान, रिजवान खान रहे।