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भगवान राम का जन्म 24वें त्रेता युग में हुआ था।

भगवान राम का जन्म 24वें त्रेता युग में हुआ था।

कांकेर। रामकथा के चौथे दिन पंडित अतुल कृष्ण ने राम जन्म प्रसंग का वर्णन करते कहा भगवान राम का जन्म 24वें त्रेता युग में हुआ था। वर्तमान में युगों का 28वां दौर चल रहा है। तब से लेकर आज तक हम भगवान राम के गुण गा रहे हैं। हम कैसे राम तथा कैसे रावण को स्थापित करते हैं इसे जानने को ही ज्ञानयज्ञ कहते हैं और इसी कार्य के लिए रामकथा में हम सब बैठे हैं। राम जन्म प्रसंग के दौरान पंडाल में उपस्थित सभी श्रद्धालु झूम उठे तथा नृत्य करने लगे।

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कथा सुनाते पंडित अतुल कृष्ण ने कहा भगवान को तीन स्थान कैलाश पर्वत, रामेश्वरम तथा प्रयागराज सबसे प्रिय है। रामेश्वर दक्षिण में प्रयागराज मध्य में तो कैलाश पर्वत उत्तर दिशा में स्थित है। कैलाश पर्वत का वृतांत सुनाते कहा हिमालय के सबसे ऊंचे माऊंट एवरेस्ट पर लोग पहुंच चुके हैं लेकिन आज तक कैलाश पर्वत के शिखर पर कोई नहीं पहुंच पाया है। वहां साक्षात भगवान शिव विराजमान हैं। कैलाश पर्वत का आधा हिस्सा भारत तथा आधा चीन में आता है। उसके ऊपर से आज तक कोई विमान भी नहीं गुजर पाया है। कैलाश के प्रति भारतवासियों ही नहीं पुरे विश्व के लोगों की श्रद्धा है। भगवान शिव का उदाहरण बताते कहा जब वे देवी पार्वती से विवाह करने बारात लेकर निकले तो उनके पास कपड़े तक नहीं थे। वे जैसे थे वैसे ही निकल पड़े। उन्होने किसी से उधार नहीं मांगा तथा किसी की मदद भी नहीं ली। जब उनसे लोगों ने कहा एसे हालत में जा रहे हो कौन आपसे शादी करेगा? भगवान ने कहा मुझे पार्वती पर विश्वास है वह मुझसे शादी करेगी मेरे कपड़ों से नहीं। भगवान हमें सहजता सीखा रहे हैं। आज के युग में इंसान असहज होता जा रहा है। हम हर काम करते हैं तो उसके पीछे सोच होती है लोग क्या कहेंगे? एसे कपड़े पहनेंगे तो लोग क्या बोलेंगे, घर में एसे फर्नीचर लगाएंगे तो लोग क्या बोलेंगे? एसी गाड़ी में चलेंगे तो लोग क्या बोलेंगे? इसी वजह से आज हर मनुष्य परेशान है। पंडित अतुल कृष्ण ने कहा हम कुछ भी करें लोग कुछ न कुछ तो कहेंगे ही। इसलिए लोग क्या कहेंगे इस विचार कों त्याग दें तो मनुष्य का जीवन सुखी हो जाएगा। पंडित अतुल कृष्ण ने कहा आज के समय में सभी लाभ के लिए काम करते हैं। किसान खेत में बीज डालता है तो उसे फसल के रूप में लाभ होता है। जैसे ही हम लाभ की सीमा लांघ कर लोभ करने लगते हैं तो फिर हम पाप की ओर अग्रसर होने लगते हैं। उदाहरण बताते कहा गांव से 20 रूपए प्रति लीटर दूध खरीद कर शहर में उसे 30 रूपए प्रति लीटर बेचना लाभ है। लेकिन जब उसी दूध में पानी मिलाकर उसे दोगुना कर बेचते हैं तो वह लोभ हो जाता है। राम जन्म प्रसंग के बाद पंडाल में उपस्थित सभी श्रद्धालु झूमने लगे। चौथे दिन की कथा के दौरान रामभक्त समिती आमापारा कांकेर के अलावा ओमप्रकाश देवांगन परिवार तथा अभिराज सिंह राठौर परिवार द्वारा सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।

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