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बाल विवाह मुक्त जिला बनाने होती हो अंतरविभागीय कार्यशाला का आयोजन

बाल विवाह मुक्त जिला बनाने होती हो अंतरविभागीय कार्यशाला का आयोजन

गोपाल सिंह विद्रोही//बिश्रामपुर// सूरजपुर -यूनिसेफ तथा महिला बाल विकास के संयुक्त तत्वाधान में जिला पंचायत सभा कक्ष मे हुई कार्यशाला
कलेक्टर सूरजपुर के निर्देशन में जिले को बालविवाह मुक्त बनाने हेतु महिला एवं बाल विकास विभाग और यूनिसेफ़ छत्तीसगढ़ के द्वारा जिला स्तरीय अन्तर विभागीय कार्यशाला का आयोजन जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित किया गया। कार्यशाला का शुभारम्भ कलेक्टर रोहित व्यास के द्वारा दीप प्रज्वलन कर शुरुवात किया गया। कलेक्टर रोहित व्यास द्वारा बाल विवाह रोकथाम के लिए जिले के समस्त विभागों को समन्वित प्रयास कर ग्राम पंचायत को बालविवाह मुक्त करने हेतु कहा गया। उन्होंने आगे कहा की यह कार्यक्रम मात्र महिला एवं बाल विकास विभाग का नहीं है बल्कि इसकी जिम्मेदारी सभी विभागों को लेनी पड़ेगी। सूरजपुर में इस सत्र में 65 बाल विवाह रोके गये है। इसके अलावा भी कई ऐसे बाल विवाह होंगे जो विभाग की जानकारी में नहीं आधे होगे। एनएफएचएस के आकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में सूरजपुर में सबसे ज्यादा 34 प्रतिशत बाल विवाह होते है। जो कि चिन्ता का विषय हैं। हम सभी को मिल कर जिले को बाल विवाह के सामाजिक अभिशाप से मुक्त करने हेतु निरंतर प्रयास करना होगा। बाल विवाह का मुख्य कारण शिक्षा की कमी के साथ ही सामाजिक रीती रिवाज भी है। डॉप ऑउट बच्चों को शिक्षा से जोड़कर बाल विवाह को कम किया जा सकता है। जिले में बाल
विवाह के क्षेत्र में सभी विभाग के प्रयास की सराहना की।

यूनिसेफ के अभिषेक सिंह (राज्य प्रमुख सामाजिक एवं व्यवाहर परिवर्तन विशेषज्ञ)द्वारा बताया गया कि बाल विवाह रोकथाम अभियान मुख्यमंत्री छ०ग० शासन के द्वारा 10 मार्च को महतारी बदन कार्यक्रम के साथ किया गया है। बाल विवाह होने के कारण पूरे देश का 6 प्रतिशत जीडीपी प्रभावित हो रहा है। क्यों कि बाल विवाह होने से बच्चों का कौशल विकास अवरूध हो जाता है। समाज के प्रमुखों को बाल विवाह के दुष्प्रभाव से अवगत कराते हुए अपने समाज में बाल विवाह रोकने के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है।आगामी वर्ष में जिला सूरजपुर को बाल विवाह मुक्त जिला बनाकर छत्तीसगढ़ राज्य के लिए एक मॉडल जिला बनना है। उन्होंने बाल विवाह मुक्त अभियान,रणनीति एवं कार्य योजना पर विस्तृत जानकारी दी। जिसमें बताया गया कि बाल विवाह उत्पन्न होने के क्या कारण है,पालकों में असुरक्षा की भावना,सामाजिक प्रथा एवम मान्यता, आर्थिक पिछड़ापन,लैंगिक भेदभाव और शिक्षा का अभाव है।

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जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल के द्वारा कार्यशाला में उद्बोधन के दौरान बताया गया की सूरजपुर में केवल लड़कियों का ही बाल विवाह नहीं हो रहा है बल्कि बालकों का भी 20 प्रतिशत बाल विवाह हो रहा है इस पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन में कई टीम बनाकर कर बाल विवाह को रोकने के लिए कार्य कर रहे हैं जिसमें पुलिस सहित सभी विभागों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। समाज प्रमुखो और ग्राम सभाओं को भी जोड़कर काम किया जा रहा है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी रमेश कुमार साहू ने कार्यशाला में उपस्थित होने के लिए यूनिसेफ के दोनों अधिकारियों एवं जिले के कलेक्टर को धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि सभी विभागों के सहयोग से हम जल्द ही जिले की बाल विवाह मुक्त करने में सफल होगें। आज के कार्यशाला में सभी की उपस्थिती के कारण यह सफल कार्यशाला हुआ है। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने सभी उपस्थित अधिकारियों को बाल विवाह नहीं करने और इसे पूर्णत रोक लगाने कि शपथ दिलायी। कार्यशाला में जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आर.एस. सिंह शिक्षा विभाग के सहायक संचालक रवि सिंह डीएमसी शशीकांत सिंह उप संचालक उ‌द्यानिकी विभाग जग पाल सिंह मरावी, जिला संगठक एनएसएस सी व्हि मिश्रा पुलिस प्रशासन से महालक्ष्मी कश्यप डी.एस.पी एवं थाना/चौकी प्रभारी, उप संचालक समाज कल्याण विभाग श्रीमती बेनधिता तिर्की, समस्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी समस्त जनपद पंचायत, विकासखण्ड चिक्तित्सा अधिकारी, समस्त विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी एवं बीआरसीसी समस्त मुख्य नगर पालिका एवं नगर पंचायत अधिकारी समस्त परियोजना अधिकारी बाल विकास परियोजना सचिव स्कॉउड गाईड उमेश गुर्जर, जिला मितानिन समन्वयक,युवा साथी फाउंडेशन के सचिव रजनीश गर्ग, रेहाना फाउंडेशन के संयोजक अफरोज खान, पथ प्रदर्शक के बाहय कार्यकर्ता,विरेश सिंह (अध्यक्ष) विकास अनुसंधान सस्थान, पी. के सिंह (संयुक्त सचिव) प्रयासजन सस्थान एवं एसईसीएल भटगांव से कृष्ण कुमार वर्मा, जिला बाल संरक्षण इकाइ एवं चाईल्ड लाइन समस्त स्टॉप के समस्त अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यशाला का संचालन प्रथमेश मानेकर जिला समन्वयक यूनिसेफ़ द्वारा किया गया।

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