व्यंग्य सम्राट हरिशंकर परसाई की 101वीं जयंती का आयोजन

व्यंग्य सम्राट हरिशंकर परसाई की 101वीं जयंती का आयोजन

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सूरजपुर//शासकीय महाविद्यालय सिलफिली में व्यंग्य सम्राट हरिशंकर परसाई की 101वीं जयंती के अवसर पर अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य डॉ प्रेमलता एक्का की अध्यक्षता में संपन्न हुआ । कार्यक्रम का आरंभ महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक अमित सिंह बनाफर तथा कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे छात्र यश पूर्णिमा तथा हुलसी के द्वारा संस्कृति की देवी मां सरस्वती के छाया चित्र पर दीप और धूप प्रज्वलन से प्रारंभ हुआ । सर्वप्रथम महाविद्यालय की छात्रा पूर्णिमा सिंह ने हरिशंकर परसाई का संक्षिप्त जीवन परिचय प्रस्तुत किया । बीएससी अंतिम वर्ष की छात्रा हुलसी गुप्ता ने परसाई की रचना छात्र और लाउडस्पीकर का तथा बीएससी अंतिम के छात्र यश ने व्यंग्य प्रेमचंद के फटे जूते का पाठ किया । कार्यक्रम के दौरान हरिशंकर परसाई के जीवन और कृतित्व पर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा निर्मित एक वीडियो प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक अजय कुमार तिवारी ने बताया कि परसाई ने समाज के सुनहरे पक्ष के पीछे छिपी कुरूपता को अपने व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। हरिशंकर परसाई का व्यक्तित्व कबीर की तरह था । परसाई ने कागद की लेखी पर नहीं बल्कि आँखन देखी पर विश्वास किया ।उन्होंने समाज के मध्य तथा निम्न वर्ग के बीच रहकर सामान्य लोगोंए मजदूरए किसानए रिक्शा वालेए ठेला चलाने वालेए कुलीगिरी करने वाले से उनके मन की बातें जानकर समाज के वास्तविक रूप को पहचाना । उन्होंने समाज की वास्तविक बुराइयों और देशव्यापी भ्रष्टाचार को अपने व्यंगों का आधार बनाया । परसाई ने भेड़ें और भेड़िए व्यंग्य के माध्यम से भारतीय राजनीति की पोल खोली है । यह व्यंग्य विष्णु शर्मा रचित पंचतंत्र की परंपरा पर पशुओं के माध्यम से मानव जीवन की विसंगतियां को प्रस्तुत करता है। परसाई उसमें बताते हैं कि किस प्रकार प्रचार तंत्र किसी भी सरकार को बनाने अथवा गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है भोलाराम का जीव निबंध में सरकारी कार्यालयों के भ्रष्टाचार को प्रस्तुत करते हैं। इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर व्यंग्य में वे बताते हैं कि भ्रष्ट पुलिस तंत्र जिसे चांद की पुलिस व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए चांद पर भेजा जाता है। वह वहां की व्यवस्था को भी भ्रष्ट कर देता है । भ्रष्टाचार से त्रस्त चांद का प्रशासन अंततः उसे वापस पृथ्वी पर भेज देता है। वैष्णव की फिसलन व्यंग्य का वैष्णव के धन के लालच में अपने धर्म को धंधे में तब्दील कर देता है और छोटे से शाकाहारी होटल को मांसाहारी तो बनाता है साथ ही साथ शराब तथा जीवित मानव मांस को परोसने वाले होटल में तब्दील कर देता है और उसे भगवान की आज्ञा बतलाता है। उनकी व्यंग्य रचनाएं परसाई रचनावली के 6 भागों में संकलित हैं । हरिशंकर परसाई आचरण और जीवन मूल्य को सर्वाधिक प्राथमिकता देते हैं। इस देश में मानव मूल्यों के पतन का कारण व्यक्ति के लालच और शासन की गलत नीतियों को मानते हैं ।
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक श्रीमती अंजना ने सभी को धन्यवाद देकर कार्यक्रम के समापन की घोषणा की । कार्यक्रम के दौरान सहायक प्राध्यापक शालिनी शांत कुजूर श्री भारत लाल कंवर श्री आशीष कौशिक श्री जफीर अहमद तथा कार्यालयीन कर्मचारी के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।