राजीव दीक्षित जयंती एवं पुण्य तिथि पर स्वदेशी चिंतन संगोष्ठी संपन्न

राजीव भाई के विचारों पर चलना क्रांतिकारी कार्य

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राजनांदगांव। स्वदेशी के प्रणेता राजीव भाई दीक्षित जी की जयंती एवं पुण्य तिथि पर गौ संस्कृति अनुसंधान संस्थान राजनांदगांव द्वारा मां पंचगव्य चिकित्सा केन्द्र महामाया चौक बसंतपुर में स्वदेशी चिंतन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में राजीव भाई दीक्षित द्वारा देश व समाज के हित में स्वदेशी व गौरक्षा के लिए किए गए कार्यों को स्मरण किया गया।

गौ संस्कृति अनुसंधान संस्थान के अध्यक्ष राधेश्याम गुप्ता ने कहा कि राजीव भाई भले ही हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके विचार आज भी जीवित है। राजीव भाई ने जो स्वदेशी का बीज बोया था, वह आज वटवृक्ष बन गया है और पूरे देश में स्वदेशी के विभिन्न क्षेत्रों में युवा कार्य कर रहे है। संस्थान के संयोजक आर्य प्रमोद कश्यप ने कहा कि राजीव भाई के विचारों पर चलना एक क्रांतिकारी कार्य है। जिसमें व्यक्ति चलते ही जाता है और अपना पूरा जीवन समर्पित कर देता है।

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गव्यसिद्धाचार्य डॉ. मुकेश स्वर्णकार ने राजीव भाई के द्वारा किए गए कार्यों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि जब भारत में गुरूकुल व्यवस्था थी, तो भारत विश्वगुरू था। भारत को पुन: विश्वगुरू बनाने के लिए वैदिक गुरूकुलों की आवश्यकता है। गव्यसिद्ध डॉ. डिलेश्वर साहू ने कहा कि स्वदेशी एक शब्द नहीं है, इसमें गौसेवा, गुरूकुल, अर्थव्यवस्था, आयुर्वेद सहित विभिन्न विषय समाहित है। उन्होंंने पंचगव्य चिकित्सा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों के संबंध में विस्तृत जानकरी दी। संगोष्ठी में संस्थान के सदस्य हार्दिक कोटक, पुरूषोत्तम देवांगन, प्रज्ञानंद मौर्य, किशोर साहू, टीकम पटेल सहित आर्य हिमाशुं, आर्य अतुल, धर्मराज यादव, आर्य तुषार, संतोष साहू, किशोर महेश्वरी, धर्मेन्द्र साहू, गव्यसिद्ध उपेन्द्र साहू व ज्ञानचंद साहू, मोनिका साहू, त्रिलोकी साहू, मनोज शुक्ला,आयान एवं आराध्या सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।