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धान ख़रीदी को लेकर किसानों को हो रही परेशानियों पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को बताया किसान विरोधी

धान ख़रीदी को लेकर किसानों को हो रही परेशानियों पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को बताया किसान विरोधी

प्रदेश की भाजपा सरकार किसानों के साथ कर रही छल-भगवती राजवाड़े

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प्रदेश में चल रहे धान ख़रीदी पर हो रही लापरवाही को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष भगवती राजवाड़े ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर गंदी नीति का आरोप लगाते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार किसानों का धान नहीं ख़रीदने का षडयंत्र करके किसानों को परेशान करने का काम कर रही है जिस प्रकर धान ख़रीदी धीमी गति से चल रही है इससे यह स्पष्ट होता है कि विष्णु देव साय सरकार कम से कम धान ख़रीदी करना चाहती है लक्ष्य ज़्यादा और काम कम करने वाला बात यहाँ पर दिखाई दे रहा इस बार 160 लाख मिट्रिक टन धान ख़रीदने का लक्ष्य है जिसके लिये मात्र 47 दिनों का ही समय मिल रहा है वर्तमान में देखा जाये तो जिस धीमी रफ़्तार से धान ख़रीदी हो रही है इसमें तो लक्ष्य पूरा कर पाना असंभव लग रहा है किसानों को अपना धान बेचने के लिये कई दिन लग जा रहे है सरकार ने वादा किया था कि धान बेचने के बाद किसानों के खाते में 72 घंटे में पैसा आ जाएगा लेकिन जिन्होंने 14 नवम्बर को धान बेचा था उनके ख़ातो में अभी तक पैसा नहीं आया है और जो रक़म आ रहा है वह 3100 की जगह 2300 का भुगतान किया जा रहा है बाक़ी रक़म का कोई पता नहीं है प्रदेश की भाजपा सरकार किसानों के साथ छल करने का काम कर रही है साथ ही देखा जाए तो बीज उत्पादक किसानों का धान सोसायटी में नहीं ख़रीदा जा रहा है और जिन किसानों का धान ख़रीदा जा रहा है उनका पूरा 21 क्विंटल धान न ख़रीद कर मात्र 9 से 14 क्विंटल तक धान ख़रीदा जा रहा है सोसायटी में बारदाना की काफ़ी कमी है जिससे किसान काफ़ी परेशान नज़र आ रहे है और बारदाने की कमी के कारण धान ख़रीदी बाधित हो रही है ख़रीदी केन्द्रो में टोकन जारी नहीं किया जा रहा है व आनलाइन टोकन में भी 15 दिन बाद का टोकन भी किसानों को नहीं मिल रहा है जिससे किसानों दर-दर भटक रहे है भगवती राजवाड़े ने बताया कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी तो 2500 रू. क्विंटल में धान ख़रीदने का वादा किया गया था उस समय केन्द्र सरकार द्वारा समर्थन मूल्य बढ़ाया गया था जिससे किसानों को 2640 रू. क्विंटल का भुगतान किसानों को किया गया था भाजपा ने सरकार में आने से पहले 3100 रू. क्विंटल में धान ख़रीदने का वादा किया गया था अब केन्द्र सरकार द्वारा 117 रू. समर्थन मूल्य में वृद्धि की गई है जिससे हमारी माँग है कि धान ख़रीदी 3217 रू. क्विंटल में की जाये कांग्रेस सरकार की धान उपार्जन नीति सबसे अच्छी थी जिसको भाजपा सरकार ने बदल दिया है नई नीति के अनुसार 72 घंटे में बफ़र स्टॉक के उठाव की नीति बदल दिया गया है पहले इस प्रावधान के होने के कारण समितियों के पास यह अधिकार था कि समय सीमा में उठाव ना होने पर चुनौती दिया जा सके लेकिन अब जो बदलाव हुआ है उसने बफ़र स्टॉक के उठाव की कोई सीमा नहीं है अब धान ख़रीदी केन्द्रो में जगह की कमी आ रही है जिससे काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है पूर्व में समय धान का निपटान करने के लिये मार्कफ़ेड द्वारा 28 फ़रवरी तक की बाध्यता थी अब यह समय बढ़कर 31 मार्च हो गया है देखा जाये तो धान ख़रीदी 31 जनवरी को ख़त्म हो जाएगी जिससे 2 महीने धान समितियों में रखा रह जाएगा जिससे धान ख़राब होने की भी संभावना है धान मीलिंग के लिये कांग्रेस सरकार ने प्रति क्विंटल 120 रू. देने का निर्णय लिया था जिससे प्रदेश में 700 नई राइस मिले खुली थी अब भाजपा सरकार ने 120 रू. को घटाकर 70 रू. कर दिया है जिससे राइस मिले हड़ताल में है व धान समितियों में रखा है मीलिंग का दाम कम करने से धान की मीलिंग नहीं हो पा रही है जिससे आगे काफ़ी समस्याओ का सामना करना पड़ सकता है इन सब कारणों से देखा जा सकता है कि प्रदेश की भाजपा सरकार किसानों व प्रदेश की जनता को ठगने का काम कर रही है व जनता को बेवकूफ बनाने का काम भाजपा सरकार द्वारा किया जा रहा है जिसका हम पूर्णज़ोर रूप से विरोध कर रहे है..

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