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“ग्राम, जनपद और जिला पंचायतों के प्रथम सम्मिलन की तिथियां निर्धारित, प्रशासन ने जारी किए दिशा-निर्देश”

“ग्राम, जनपद और जिला पंचायतों के प्रथम सम्मिलन की तिथियां निर्धारित, प्रशासन ने जारी किए दिशा-निर्देश”

जगदलपुर, 27 फरवरी 2025: जिला प्रशासन द्वारा पंचायत चुनाव के संपन्न होने के बाद अब ग्राम, जनपद एवं जिला पंचायतों के प्रथम सम्मिलन एवं संबंधित पदाधिकारियों के निर्वाचन की तिथियां निर्धारित कर दी गई हैं। कलेक्टर हरिस एस ने इस संबंध में निर्देश जारी करते हुए विभिन्न पंचायत स्तरीय बैठकों और चुनावी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

ग्राम पंचायतों का प्रथम सम्मिलन और उपसरपंच निर्वाचन

जिले की 436 ग्राम पंचायतों में प्रथम सम्मिलन 3 मार्च 2025 को आयोजित किया जाएगा। इस सम्मिलन में नव-निर्वाचित पंचों और सरपंचों की बैठक होगी, जिसमें पंचायत के प्रशासनिक कार्यों और आगामी योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। यह बैठक पंचायत राज अधिनियम के तहत अनिवार्य होती है, जिसमें नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी दी जाती है।

इसके अलावा, 8 मार्च 2025 को जिले की सभी ग्राम पंचायतों में उपसरपंच का निर्वाचन किया जाएगा। उपसरपंच पंचायत में सरपंच का सहयोगी होता है और उसकी अनुपस्थिति में पंचायत का संचालन करता है। उपसरपंच का चयन निर्वाचित पंचों द्वारा किया जाएगा।

जनपद पंचायतों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का निर्वाचन

जनपद पंचायतों के पदाधिकारियों का निर्वाचन 4 मार्च 2025 को संपन्न होगा। इस दौरान जनपद पंचायत के सदस्य अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करेंगे। यह चुनाव महत्वपूर्ण होता है क्योंकि जनपद पंचायत ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती है।

इसके बाद, 7 मार्च 2025 को जनपद पंचायत का प्रथम सम्मिलन आयोजित किया जाएगा। इस बैठक में जनपद पंचायत के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराया जाएगा और क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार की जाएगी।

जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का निर्वाचन

जिले की सबसे महत्वपूर्ण पंचायती संस्था, जिला पंचायत, के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का निर्वाचन 5 मार्च 2025 को किया जाएगा। यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि जिला पंचायत ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और अन्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसके बाद, 10 मार्च 2025 को जिला पंचायत का प्रथम सम्मिलन आयोजित किया जाएगा। इस बैठक में नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों के साथ प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल होंगे और जिले के समग्र विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगे।

प्रशासन की तैयारियां और दिशा-निर्देश

कलेक्टर हरिस एस ने पंचायतों के सम्मिलन और निर्वाचन प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि “सभी पंचायतों में चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो, इसके लिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी।”

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इसके लिए जिला प्रशासन ने अलग-अलग टीमों का गठन किया है, जो प्रत्येक पंचायत में होने वाली बैठकों और चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखेंगी। सभी मतदान केंद्रों और पंचायत कार्यालयों पर सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

पंचायती राज व्यवस्था में इन सम्मिलनों का महत्व

ग्राम, जनपद और जिला पंचायतों के ये प्रथम सम्मिलन पंचायत राज प्रणाली का अहम हिस्सा हैं। पंचायत चुनावों के बाद, यह आवश्यक होता है कि नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों से अवगत कराया जाए। इन बैठकों में पंचायती योजनाओं की प्राथमिकताओं को तय किया जाता है और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए रणनीति बनाई जाती है।

चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता

जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। निर्वाचन प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रशासन द्वारा विशेष पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है। इसके अलावा, प्रत्येक पंचायत में मतदान प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए माइक्रो ऑब्जर्वर भी नियुक्त किए गए हैं।

कलेक्टर ने बताया कि “किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरों की मदद ली जाएगी और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाएगी।”

स्थानीय जनता की भागीदारी और जागरूकता अभियान

स्थानीय प्रशासन ने जनता को पंचायत चुनावों और सम्मिलनों के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया है। विभिन्न ग्राम पंचायतों में बैठकें आयोजित कर लोगों को बताया जा रहा है कि वे अपने अधिकारों का प्रयोग करें और अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से पंचायत विकास कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लें।

नए पंचायत पदाधिकारियों की चुनौतियां और प्राथमिकताएं

नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के सामने कई चुनौतियां होंगी। जिले में आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कृषि एवं ग्रामीण सड़कों जैसी समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी इन पंचायतों की होगी।

विशेष रूप से ध्यान देने योग्य कुछ प्रमुख मुद्दे:

ग्राम पंचायतों में जल आपूर्ति और स्वच्छता की स्थिति में सुधार

कृषि क्षेत्र में नवाचार और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार

शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना

स्व-रोजगार और महिला सशक्तिकरण के लिए विशेष योजनाएं लागू करना

पंचायती राज प्रणाली के तहत ग्राम, जनपद और जिला पंचायतों के प्रथम सम्मिलनों की तिथियां निर्धारित हो चुकी हैं, जिससे अब स्थानीय प्रशासनिक कार्य सुचारु रूप से संचालित किए जाएंगे। पंचायत प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान और विकास कार्यों की प्राथमिकताओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी। प्रशासन ने निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कड़े इंतजाम किए हैं, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि सभी पंचायतें सुचारु रूप से कार्य करेंगी और जिले का समग्र विकास होगा।

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