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जनजातीय विकास की नई दिशा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में जनजाति सलाहकार परिषद की पहली महत्वपूर्ण बैठक

जनजातीय विकास की नई दिशा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में जनजाति सलाहकार परिषद की पहली महत्वपूर्ण बैठक

रायपुर, 12 मार्च 2025 – छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास को गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में जनजाति सलाहकार परिषद की पुनर्गठन के बाद पहली बैठक विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में संपन्न हुई। इस बैठक में जनजातीय समाज के सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक-आर्थिक उन्नयन, प्रशासनिक सुधारों और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।

बैठक में उपाध्यक्ष रामविचार नेताम सहित प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और परिषद के सभी सदस्य उपस्थित रहे। बैठक के दौरान जनजातीय समुदाय की समस्याओं पर गहन मंथन किया गया और उनके समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

जनजातीय समाज के विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैठक की शुरुआत में सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की 32% जनसंख्या जनजातीय समुदाय से आती है और राज्य सरकार उनके समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनजाति सलाहकार परिषद केवल चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि यह नीति निर्माण और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की संवैधानिक इकाई है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनजातीय समुदाय के जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी त्रुटियों के समाधान हेतु विस्तृत अध्ययन किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि पात्र व्यक्तियों को बिना किसी कठिनाई के प्रमाण पत्र मिल सके। इसके अलावा, जनजातीय आस्था स्थलों के संरक्षण एवं विकास की योजना में देवगुड़ी के साथ-साथ सरना स्थलों को भी शामिल करने का निर्देश दिया गया।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार को प्राथमिकता देने की बात कही और आदिवासी इलाकों में शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक विद्यालयों की समस्या का शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए, जिससे उनकी प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी हो सके।

परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम का वक्तव्य
कैबिनेट मंत्री और परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम ने कहा कि जनजाति सलाहकार परिषद सरकार और जनजातीय समाज के बीच सेतु की तरह कार्य करती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परिषद के सदस्य प्रदेश के एक-तिहाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी है कि वे शासन की योजनाओं को प्रभावी रूप से जनजातीय समुदाय तक पहुँचाएँ।

उन्होंने इस बात का आश्वासन दिया कि परिषद द्वारा लिए गए निर्णयों को नीति निर्माण में प्रभावी रूप से शामिल किया जाएगा, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ जनजातीय समाज को मिले।

महत्वपूर्ण निर्णय और प्रस्ताव
बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने जनजातीय समाज के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर ठोस सुझाव दिए। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल रहे:

शिक्षा का विस्तार:

आदिवासी बालिकाओं के लिए छात्रावासों की संख्या एवं सुविधाओं में वृद्धि।
शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक विद्यालयों की समस्या का समाधान।
जनजातीय छात्रों के लिए विशेष छात्रवृत्ति योजनाओं का क्रियान्वयन।
रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण:

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जनजातीय बहुल क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं भर्ती प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना।
आदिवासी समुदाय की पारंपरिक आजीविका को सशक्त करने हेतु विशेष योजनाएँ लागू करना।
वन उपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।
स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार:

जनजातीय क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करना।
ग्रामीण एवं वन क्षेत्रों में मोबाइल चिकित्सा इकाइयों की संख्या बढ़ाना।
कुपोषण दूर करने के लिए विशेष पोषण योजनाएँ लागू करना।
संस्कृति और परंपरा का संरक्षण:

जनजातीय कला, संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण हेतु विशेष योजनाएँ लागू करना।
पारंपरिक लोककला एवं हस्तशिल्प को बाजार से जोड़ने के लिए विशेष सहायता प्रदान करना।
जनजातीय महोत्सवों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
प्रशासनिक सुधार और नीति निर्माण पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सभी प्रस्तावों पर त्वरित एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें और इस बात का ध्यान रखें कि नीतिगत सुधारों का वास्तविक लाभ जनजातीय समुदाय तक पहुँचे।

बैठक में यह भी तय किया गया कि सरकार द्वारा संचालित सभी जनजातीय विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा होगी और उनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।

वरिष्ठ अधिकारियों की प्रस्तुतियाँ और सुझाव
बैठक में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने विभिन्न एजेंडा बिंदुओं पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा वर्तमान में चलाई जा रही योजनाओं के क्या प्रभाव हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।

बैठक में वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक लता उसेण्डी, शंकुतला सिंह पोर्ते, उद्देश्वरी पैंकरा, रायमुनी भगत, गोमती साय, रामकुमार टोप्पो, प्रणव कुमार मरपच्ची, विक्रम उसेण्डी, आशाराम नेताम, नीलकंठ टेकाम, विनायक गोयल और चैतराम अटामी सहित कई अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

इस अवसर पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, पंचायत विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, आयुक्त पदुम सिंह एल्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।

जनजातीय समाज के विकास में यह बैठक होगी मील का पत्थर
इस बैठक को जनजातीय समाज के विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन से जनजातीय समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और संस्कृति के क्षेत्रों में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।

बैठक में उठाए गए मुद्दों और लिए गए निर्णयों से यह स्पष्ट है कि सरकार छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। आने वाले समय में इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जनजातीय समाज के विकास को एक नई दिशा मिलेगी और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार होगा।

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