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मनरेगा घोटाला के पांच आरोपियों को मिली जमानत आरोपियों पर कुल 45 लाख63 हजार 926 रुपए* *गबन का मामला उपायुक्त लातेहार के आदेश पर दर्ज किया गया था

मनरेगा घोटाला के पांच आरोपियों को मिली जमानत
आरोपियों पर कुल 45 लाख63 हजार 926 रुपए

गबन का मामला उपायुक्त लातेहार के आदेश पर दर्ज किया गया था
विशेष अंकेक्षण प्रतिवेदन में महालेखाकार ने अभिश्रव, मस्टर रोल में गड़बड़ी का मामला उजागर किया था

लातेहार।बहुचर्चित बारियातू प्रखंड मनरेगा घोटाला में झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा लिपिक अभिषेक कुमार,कनीय अभियंता मुनेश्वर उरांव,प्रभात सरोज,दिगेश्वर चौबे एवं बीपीओ वीरेंद्र सिंह की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। आरोपियों के अधिवक्ता सुनील कुमार ने बताया कि कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग झारखंड रांची के पत्रांक 1231 दिनांक 26 फरवरी 21 तथा पत्रांक 2303 दिनांक 13 मार्च 20 के द्वारा लातेहार उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी को उपरोक्त गबन का मामला दर्ज करने का आदेश दिया गया था। मालूम हो उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारीअबू इमरान के आदेश पर उपरोक्त आरोपियों समेत तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी बारियातू मो आफताब आलम, भेंडर सादिया ट्रेडिंग एवं अफसर आलम के विरुद्ध 45 लाख 63 हजार 926 रुपए गबन करने की प्राथमिकी बालूमाथ थाना कांड संख्या 58/21 भादवि की धारा 406, 409 ,420 ,467 ,468 ,471 120 बी व 34 के तहत दर्ज कराया गया था।आरोपियों की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका को जिला एवं सत्र न्यायाधीश,तृतीय मनोज कुमार त्रिपाठी की अदालत द्वारा खारिज कर दिया गया था। तदुपरांत उक्त अग्रिम जमानत याचिका को झारखंड उच्च न्यायालय में वरीय अधिवक्ता आर एस मजूमदार एवं प्रशांत कुमार राहुल के द्वारा दायर कराया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान झारखंड उच्च न्यायालय में राज्य की और से विशेष लोक अभियोजक प्रिया श्रेष्ठा ने जमानत याचिका का विरोध किया था। बहस के दौरान मजूमदार ने बताया कि यह मामला गबन का नहीं बल्कि वित्तीय अनियमितता की है, जिसके लिए आरोपियों को विभागीय कार्रवाई का दंड भुगतना पड़ा है। मजूमदार ने आरोपियों को निर्दोष बताते हुए उनकी जमानत स्वीकृत करने की अपील किया। न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीले सुनने के उपरांत उपरोक्त आरोपियों के द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है ।अदालत ने उन्हें बतौर जमानत राशि चार-चार लाख रुपए उपायुक्त लातेहार के नजारत में जमा करने के उपरांत बंध पत्र निचली अदालत में दाखिल करने का आदेश पारित किया है।

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क्या है मामला महालेखाकार झारखंड के द्वारा गठित विशेष अंकेक्षण दल द्वारा बारियातू प्रखंड में संचालित मनरेगा की योजनाओं की जांच वर्ष 2016- 17 में की गई थी, जिसमें प्रखंड के भेंडर शादियां ट्रेडिंग के द्वारा तत्कालीन प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी बारियातू अविनाश कुमार के निजी बचत खाते मे कुल आठ लाख 17 हजार 900 रुपये, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी मो आफताब आलम के बचत खाते में 15 लाख रुपए, तत्कालीन कनीय अभियंता प्रभात सरोज एवं उनके ससुर दिगेश्वर चौबे के निजी खाते में दस लाख 46 हजार 26 रुपये एवं अफसर आलम नामक व्यक्ति के निजी खाते में 12 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से हस्तांतरित करने का मामला पाया था ,जिसे विशेष अंकेक्षण दल ने अपने प्रतिवेदन संख्या 32 / 2017-18 के द्वारा उपायुक्त लातेहार को प्रतिवेदित कर कहा था की उपरोक्त राशि अनधिकृत रूप से हस्तांतरित की गई है जो मनरेगा योजना अधिनियम का उल्लंघन है और गबन की श्रेणी में शामिल है । विशेष अंकेक्षण दल के उपरोक्त पत्राचार के उपरांत तत्कालीन उपायुक्त ने मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश निर्गत किया था ,लेकिन वर्षों तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पायी थी। उपायुक्त इमरान ने योगदान करने के उपरांत उप संचिका को अवलोकन कर गत 31 मार्च 21 को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश किया था।

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