चिराग पासवान का कांग्रेस पर हमला: “सबसे ज्यादा पलायन आपके शासन में हुआ”

चिराग पासवान का कांग्रेस पर हमला: “पलायन रोको यात्रा से पहले बताएं, सबसे ज्यादा पलायन किसके शासन में हुआ?”

रिपोर्ट: प्रदेश खबर ब्यूरो | स्थान: पटना, बिहार | दिनांक: 12 अप्रैल 2025

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बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है, और इस बार वजह बनी है कांग्रेस की हाल ही में शुरू की गई ‘पलायन रोको, नौकरी दो’ यात्रा। यह यात्रा युवाओं को रोजगार देने और राज्य से पलायन रोकने के उद्देश्य से निकाली जा रही है। लेकिन इस अभियान पर अब सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुख नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस को अपने इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि “इस देश और खासकर बिहार से सबसे अधिक पलायन उसी पार्टी के शासनकाल में हुआ है, जो आज यात्रा निकाल रही है।”


क्या है ‘पलायन रोको, नौकरी दो’ यात्रा?

कांग्रेस पार्टी ने हाल ही में बिहार के विभिन्न जिलों में युवाओं के मुद्दों को उठाने के लिए ‘पलायन रोको, नौकरी दो’ नामक अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को रोजगार देने, स्थानीय स्तर पर अवसर बढ़ाने और बिहार से बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन पर रोक लगाने की दिशा में सरकार को घेरना है।

कांग्रेस प्रवक्ता अजय कपूर ने कहा –

“हम बिहार के कोने-कोने में जाकर बताएंगे कि कैसे यह सरकार रोजगार देने में विफल रही है। हम युवाओं की आवाज़ बनेंगे।”


चिराग पासवान का पलटवार

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पटना में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा:

“उन्हें पहले यह बताना चाहिए कि सबसे अधिक पलायन कब हुआ और किसके शासनकाल में हुआ। आज जो लोग नौजवानों के नाम पर यात्रा निकाल रहे हैं, वही पहले सत्ता में रहते हुए युवाओं के लिए क्या कर पाए?”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि बिहार के विकास में कांग्रेस की भूमिका केवल “सिर्फ नारों तक सीमित रही है।”


पलायन पर राजनीति: आंकड़े क्या कहते हैं?

बिहार से पलायन कोई नया विषय नहीं है। दशकों से यहां के युवा बेहतर रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई, पंजाब, गुजरात और दक्षिण भारत जैसे राज्यों का रुख करते रहे हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार:

  • 2011 की जनगणना के अनुसार, बिहार से पलायन करने वालों की संख्या लगभग 17 लाख थी।

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  • 2021 तक यह आंकड़ा बढ़कर 25 लाख से अधिक बताया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, शिक्षा, उद्योग और बुनियादी सुविधाओं की कमी बिहार में रोजगार के अवसरों को सीमित करती है, जिसके कारण यह राज्य ‘लेबर सप्लायर स्टेट’ बन चुका है।


राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अरुणेश मिश्रा कहते हैं:

“पलायन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति तो होती रही है, लेकिन ठोस समाधान कम ही देखने को मिले हैं। कांग्रेस की यात्रा युवाओं के मुद्दों को सामने लाने का एक प्रयास है, लेकिन बीजेपी और एलजेपी (रामविलास) के लिए यह एक अवसर है कि वे अपने कामकाज को सामने रखकर जवाब दें।”


क्या है चिराग पासवान का एजेंडा?

चिराग पासवान, जो अब केंद्र में मंत्री हैं और बिहार में अपने संगठन को फिर से खड़ा करने में लगे हैं, कांग्रेस के इस अभियान को ‘लोकलुभावन राजनीति’ करार दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि:

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए सरकार ने बिहार के लिए दर्जनों योजनाएं चलाईं हैं, जिनमें रेलवे, सड़क, स्टार्टअप और स्किल इंडिया जैसी योजनाएं शामिल हैं। हम रोजगार देना चाहते हैं, न कि सिर्फ यात्राएं निकालना।”


जनता की प्रतिक्रिया

पटना के कॉलेजों और बस अड्डों में जब इस मुद्दे पर युवाओं से बात की गई तो प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं। कुछ युवाओं को लगता है कि कांग्रेस युवाओं की आवाज़ बनने की कोशिश कर रही है, जबकि कुछ इसे “चुनावी स्टंट” मानते हैं।

राहुल यादव, इंजीनियरिंग छात्र कहते हैं –

“अगर कांग्रेस को वाकई रोजगार की चिंता होती, तो उनके लंबे शासनकाल में इस पर काम होता। लेकिन अगर वे आज मुद्दा उठा रहे हैं, तो सरकार को भी जवाब देना होगा।”


क्या कांग्रेस यात्रा से जनता को जोड़ पाएगी?

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह यात्रा कांग्रेस के लिए जनसंपर्क अभियान की तरह है, जिससे वह आगामी चुनावों से पहले युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है। लेकिन इस यात्रा की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कांग्रेस सिर्फ सवाल उठाएगी या समाधान भी पेश करेगी।