महतारी वंदन योजना से आत्मनिर्भर बनीं छत्तीसगढ़ की महिलाएं, ₹11081 करोड़ की सहायता

महतारी वंदन योजना से लाखों महिलाओं की ज़िंदगी बदली, आत्मनिर्भरता की नई कहानी

Raipur | 03 July 2025 | Chhattisgarh’s women empowerment journey ने एक नया मुकाम तब पाया जब महतारी वंदन योजना ने महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में अभूतपूर्व बदलाव लाना शुरू किया। यह योजना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि dignity, self-confidence और independence की दिशा में एक मजबूत क़दम बन चुकी है।

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2 लाख से अधिक महिलाएं सिर्फ जशपुर जिले से अब तक इस योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं। मार्च 2024 से जून 2025 तक इन्हें ₹342.39 करोड़ की आर्थिक सहायता मिली है।

💰 हर माह ₹1000 की मदद, हर घर में उम्मीद

हर पात्र महिला को ₹1000 प्रति माह की सहायता राशि सीधे उनके खाते में भेजी जा रही है। महिलाएं इस राशि को सिर्फ घरेलू ज़रूरतों में ही नहीं बल्कि बचत, स्वरोजगार और बेटियों की शिक्षा में भी इस्तेमाल कर रही हैं।

जशपुर की ममता यादव, जो सिलाई का काम करती हैं, बताती हैं कि यह मदद उन्हें खुद निर्णय लेने में सक्षम बना रही है।
सरिता यादव, अनीता सोनकर, बिरसमुनी सिंह, लक्ष्मी बाई और अनीशा बाई जैसी हजारों महिलाएं आज खुद पर और अपने भविष्य पर भरोसा करने लगी हैं।

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🚺 Not Just Spending, It’s an Investment for Future

महिलाएं इस राशि का उपयोग Sukanya Samriddhi Yojana, micro businesses और skill development में कर रही हैं।
इसके अलावा महतारी शक्ति ऋण योजना के तहत 875 महिलाओं को ₹25,000 तक का आसान ऋण भी मिला है, जिसे 48 किश्तों में न्यूनतम ब्याज पर चुकाया जा सकता है।


📊 राज्यभर में ₹11081.68 करोड़ की सहायता राशि

मार्च 2024 से अब तक 17 महीनों में पूरे प्रदेश में 21 से 60 वर्ष आयु वर्ग की विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को ₹11081.68 करोड़ की राशि प्रदान की जा चुकी है।

यह योजना हर जिले, हर गांव की महिलाओं के जीवन में Hope, Security और Growth की नई शुरुआत लेकर आई है।


👩‍💼 Leadership & Execution at Ground Level

मुख्यमंत्री का उद्देश्य था मातृत्व और महिला गरिमा को सम्मान देना।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने योजना के क्रियान्वयन की मैदान स्तर पर खुद निगरानी की, और यह सुनिश्चित किया कि “कोई पात्र महिला छूटे नहीं”

उनका कहना है —
“हमारा मकसद केवल पैसा देना नहीं है, बल्कि महिलाओं को वो सम्मान और आत्मनिर्भरता दिलाना है, जिसकी वे हकदार हैं।”