जांजगीर-चांपा में बारिश से सड़ा 4 लाख क्विंटल धान, किसानों की मेहनत पर पानी फेर गया शासन

धान सड़ने की सच्चाई: बारिश में बह रही किसानों की मेहनत, शासन की लापरवाही उजागर!

 

जांजगीर-चांपा, अमरताल गांव|लगातार बारिश के चलते अमरताल धान संग्रहण केंद्र में रखा 4 लाख क्विंटल धान पानी में भीगकर अंकुरित और अब सड़ने लगा है। यह वही धान है जिसे राज्य सरकार ने किसानों से ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से खरीदा था। अब यही धान खुले आसमान के नीचे गाइडलाइन के विरुद्ध बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के छोड़ दिया गया।

file_000000000ae07206b6dd6cb6073112cd
WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
file_000000009a407207b6d77d3c5cd41ab0

5 महीने बीत गए, मिलिंग नहीं
63 लाख 27 हजार क्विंटल धान की खरीद के बाद भी अधिकांश धान की मिलिंग नहीं हो सकी।
प्रश्न उठता है – जब जानबूझकर धान खुले में रखा गया, तो क्या यह किसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था?

विधायक ब्यास कश्यप का बड़ा आरोप

  • “सरकार सिर्फ 3100 रुपए में धान खरीदी की वाहवाही लूट रही है।

  • यह धान नहीं सड़ा, बल्कि किसानों का पसीना और सम्मान सड़ा है।”

    66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
    hotal trinetra
    gaytri hospital
    WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)
  • धान को नीलामी के बहाने औने-पौने दाम में बेचे जाने की साजिश की आशंका जताई।

  • दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग।


अमरताल केंद्र की हकीकत – जमीन पर सड़ रहा है अनाज

बोरी बदलने की हो रही कोशिशें
पानी में डूबा पड़ा धान
कोई तिरपाल नहीं, कोई कवर नहीं
प्रशासन मौन


सवाल जो उठते हैं – जनता जानना चाहती है

  1. क्या प्रशासन को बारिश की जानकारी नहीं थी?

  2. 4 लाख क्विंटल अनाज को बारिश से बचाने की कोई प्लानिंग क्यों नहीं?

  3. किसके निर्देश पर धान खुले में रखा गया?

  4. अब यह सड़ा धान किन हाथों में जाएगा?