छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में बढ़ोतरी पर सियासत गर्म, कांग्रेस का आंदोलन, सरकार ने दी सफाई

रायपुर : छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है, वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साफ किया है कि इस वृद्धि का असर गरीबों और किसानों पर नहीं पड़ेगा।

file_000000000ae07206b6dd6cb6073112cd
WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
file_000000009a407207b6d77d3c5cd41ab0

मुख्यमंत्री साय ने दी सफाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि

“हम गरीबों को हाफ बिजली योजना के तहत राहत दे रहे हैं। घरेलू उपभोक्ताओं पर महज 10 से 20 पैसे प्रति यूनिट का असर पड़ा है। किसानों के लिए भी सिर्फ 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि हुई है, लेकिन सरकार 3 HP तक के उपभोक्ताओं को 3000 यूनिट मुफ्त बिजली दे रही है। इसका खर्च सरकार वहन कर रही है।”

बिजली दरों में कितनी बढ़ोतरी हुई?

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए औसतन 1.89% बिजली दरों में वृद्धि को मंजूरी दी है।

  • घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 10 से 20 पैसे प्रति यूनिट बढ़ोतरी

  • गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 25 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि

पहली बार भाजपा सरकार में बढ़े दाम

भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद यह पहली बार है जब बिजली दरें बढ़ी हैं। हालांकि, कांग्रेस सरकार में इससे पहले

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)
  • वर्ष 2022-23 में 2.50%

  • वर्ष 2024-25 में 4.88%
    की बढ़ोतरी हो चुकी है। यानी कुल 7.38% की वृद्धि कांग्रेस शासन में दर्ज की गई थी।

राजस्व जरूरतों के आधार पर फैसला

नियामक आयोग ने बताया कि यह फैसला राज्य की विद्युत कंपनियों की राजस्व आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

  • सीएसपीडीसीएल ने ₹28,397.64 करोड़ की सालाना राजस्व जरूरत बताई थी, लेकिन आयोग ने ₹25,636.38 करोड़ को मान्य किया।

  • अनुमानित विद्युत बिक्री 35,727 मिलियन यूनिट के मुकाबले 36,540 मिलियन यूनिट मानी गई।

  • राजस्व घाटे का अनुमान ₹4947.41 करोड़ के मुकाबले ₹523.43 करोड़ स्वीकृत किया गया।

कांग्रेस का विरोध जारी

कांग्रेस ने इसे जनविरोधी निर्णय बताते हुए कहा है कि गरीबों की जेब पर सीधा बोझ डाला गया है। पार्टी ने जल्द ही प्रदेशभर में बिजली दरों के खिलाफ जोरदार आंदोलन की चेतावनी दी है।


छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में मामूली वृद्धि के बाद अब यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। जहां सरकार इसे सीमित और जनहितकारी बता रही है, वहीं विपक्ष इसे जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ करार दे रहा है।