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ADGP Suicide Case: हरियाणा के IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या ने उठाए सवाल — क्या सिस्टम में अब भी जिंदा है जातिगत भेदभाव?

ADGP Suicide Case: हरियाणा के IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या ने उठाए सवाल — क्या सिस्टम में अब भी जिंदा है जातिगत भेदभाव?

हरियाणा के सीनियर IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या ने देशभर में प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनहीनता और जातिगत भेदभाव पर बहस छेड़ दी है। उनकी पत्नी IAS अमनीत पी. कुमार ने DGP और SP रोहतक पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

चंडीगढ़। हरियाणा के सीनियर आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या का मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। यह घटना न सिर्फ हरियाणा पुलिस के सिस्टम को, बल्कि भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की जड़ों में मौजूद जातिगत भेदभाव और संस्थागत उत्पीड़न को भी उजागर करती है।

आईजी पूरन कुमार की पत्नी, आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार, जो उस समय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ जापान के सरकारी दौरे पर थीं, ने लौटते ही सेक्टर-11 थाना चंडीगढ़ में शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि उनके पति को जातिगत भेदभाव, मानसिक प्रताड़ना और झूठे मामलों में फंसाकर मौत की ओर धकेला गया।

उन्होंने अपनी एफआईआर में SC/ST एक्ट, IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) सहित अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। अमनीत कुमार का कहना है कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी और जवाबदेही तय नहीं होती, वह पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं देंगी।


सुसाइड नोट और आखिरी संकेत

पुलिस को वाई पूरन कुमार के आवास से 9 पन्नों का सुसाइड नोट मिला है। उसमें उन्होंने अपने ऊपर हुए जातिवादी व्यवहार, झूठी शिकायतों, अपमानजनक पोस्टिंग, छुट्टियों से वंचित करने, वेतन रोकने और व्यक्तिगत आस्थाओं पर टिप्पणी जैसी घटनाओं का विस्तृत उल्लेख किया है।

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नोट में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा की गई “आपत्तिजनक भाषा और अपमानजनक व्यवहार” को उन्होंने अपने जीवन का “अंतिम ट्रिगर” बताया है।


प्रशासनिक तंत्र पर उठे सवाल

इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि —

  • क्या उच्च प्रशासनिक पदों पर भी जातिगत मानसिकता अब भी जिंदा है?

  • क्या सिस्टम में शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई के लिए कोई प्रभावी ढांचा मौजूद नहीं है?

  • जब एक आईपीएस अधिकारी को न्याय नहीं मिल पा रहा, तो आम नागरिकों की स्थिति कितनी भयावह होगी?


पृष्ठभूमि और पदस्थापना

पूरन कुमार 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी थे और हाल ही में उन्हें पीटीसी सुनारिया का आईजी बनाया गया था। बताया जा रहा है कि उनकी नियुक्ति के कुछ ही दिन बाद उनके खिलाफ झूठा केस (FIR-0319/2025) दर्ज कराया गया, जिसके पीछे वरिष्ठ अधिकारियों की साजिश बताई जा रही है।

चंडीगढ़ पुलिस इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच में जुटी है, लेकिन अब तक कोई अधिकारी खुलकर बयान देने को तैयार नहीं है।


सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया

दलित संगठनों और प्रशासनिक सेवा संघों ने इस घटना को “संस्थागत उत्पीड़न का केस” बताया है और न्यायिक जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की आत्महत्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के चरित्र की परीक्षा है।

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