हवाला घोटाले में SDOP पूजा पांडे गिरफ्तार: 3 करोड़ की रकम हड़पने के आरोप में 11 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर

हवाला घोटाले में SDOP पूजा पांडे गिरफ्तार: 3 करोड़ की रकम हड़पने के आरोप में 11 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर

मध्यप्रदेश में कानून का राज रहेगा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सख्त निर्देश के बाद सिवनी पुलिस पर गाज गिरी

भोपाल। मध्यप्रदेश से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आई है। सिवनी जिले में हवाला राशि घोटाले के मामले में एसडीओपी (SDOP) पूजा पांडे को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस सनसनीखेज मामले में उनके साथ एसआई अर्पित भैयाराम, कांस्टेबल योगेंद्र, कांस्टेबल नीरज और कांस्टेबल जगदीश सहित कुल 11 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है।

ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM

मामला सिवनी जिले के लखनवाड़ा थाने का है, जहां आरोपी पुलिसकर्मियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 310(2) (डकैती), धारा 140(3) (किडनैपिंग) और धारा 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)
17a09f88-37fa-496a-8923-b0e0bac9f15d

3 करोड़ की हवाला राशि हड़पने का आरोप

बताया जा रहा है कि 8 अक्टूबर को महाराष्ट्र के जालना निवासी सोहनलाल परमार अपने साथियों के साथ कटनी से 3 करोड़ रुपए की हवाला राशि लेकर जा रहा था। चेकिंग के दौरान पुलिस ने उसे रोक लिया और पूरी रकम जब्त कर ली।

लेकिन, आरोप है कि इन पुलिसकर्मियों ने इस रकम को सरकारी खजाने में जमा कराने के बजाय आपस में बांट लिया।

पूरे प्रकरण में CSP पूजा पांडे और बंडोल पुलिस पर 1.45 करोड़ रुपए की चोरी का सनसनीखेज आरोप लगा है। अब तक इस मामले में 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है, जबकि 11 पर एफआईआर दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का सख्त रुख

घोटाले की खबर सामने आने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तुरंत संज्ञान लिया और सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा:

“मध्यप्रदेश में कानून का राज रहेगा। कानून का उल्लंघन करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।”

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सिवनी पुलिस पर गाज गिरी है और मामले की जांच तेज कर दी गई है। यह घटना मध्यप्रदेश पुलिस तंत्र के भीतर फैले भ्रष्टाचार पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।