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राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर): 562 रियासतों का एकीकरण कर भारत को एक करने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल
आज 'लौह पुरुष' सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनकी राजनीतिक कुशलता से हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर सहित 562 रियासतों का भारत में विलय संभव हुआ। 2014 में शुरू हुए इस दिवस का संदेश है: 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत'।
सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती: राष्ट्रीय एकता दिवस और रियासतों के एकीकरण में ‘लौह पुरुष’ का योगदान
आज (31 अक्टूबर) भारत के ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) की जयंती है। स्वतंत्रता के बाद भारत को एक मजबूत राष्ट्र के रूप में संगठित करने में उनका योगदान अद्वितीय है।
रियासतों का एकीकरण: भारत का निर्माण
- चुनौती: आज़ादी के समय भारत 562 रियासतों में बंटा हुआ था। इन रियासतों को भारत संघ में शामिल करना एक बहुत बड़ी और जटिल चुनौती थी।
- पटेल का योगदान: सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति, राजनीतिक कुशलता और दृढ़ नेतृत्व से इन रियासतों का भारत संघ में विलय कराया।
- प्रमुख रियासतें: उनके प्रयासों से ही हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी बड़ी और जटिल रियासतों का भारत में एकीकरण संभव हो पाया।
- प्रशासनिक ढांचा: उन्होंने “स्टेट्स रीऑर्गनाइजेशन कमेटी” की नींव रखी, जिससे भारत एक मज़बूत प्रशासनिक ढांचे में संगठित हुआ।
राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day)
- शुरुआत: लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को साल 2014 में राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day) के रूप में मनाने की शुरुआत हुई थी।
- उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
- कार्यक्रम: इस दिन स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और संगठनों में “Run for Unity”, निबंध प्रतियोगिताएं और देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
- संदेश: राष्ट्रीय एकता दिवस का संदेश है, “एक भारत, श्रेष्ठ भारत।”









