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अयोध्या धाम में रामलला को प्रतिदिन चार बार भोग, अलग-अलग व्यंजनों से होती है आरती

अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में प्रतिदिन चार बार रामलला को भोग लगाया जाता है। गुरुवार, 6 नवंबर 2025 को मार्गशीर्ष माह की प्रतिपदा पर रामलला का अलौकिक श्रृंगार किया गया। प्रभु को मौसम के अनुसार अलग-अलग वस्त्र पहनाए जाते हैं और फूलों की माला दिल्ली से मंगाई जाती है।

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र, अयोध्या धाम में विराजमान ब्रह्मांड नायक प्रभु श्री रामलला सरकार का श्रृंगार प्रतिदिन भव्य और अलौकिक स्वरूप में होता है। हर दिन भक्तों को भगवान राम अलग-अलग रूपों में दर्शन देते हैं।

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मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि, विक्रम संवत 2082 (6 नवंबर, गुरुवार) को भी प्रभु का श्रृंगार अद्भुत आभा और दिव्यता से भरा रहा। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी रही।

सुबह का बाल भोग और जागरण पूजा

अयोध्या के राम मंदिर में दिन की शुरुआत सुबह 6:30 बजे रामलला को जगाने और पूजन के साथ होती है। स्नान, लेप और श्रृंगार के बाद प्रभु को बाल भोग लगाया जाता है। यह बाल भोग मंदिर की रसोई में विशेष विधि से तैयार किया जाता है।

श्रद्धालु मानते हैं कि रामलला का प्रत्येक भोग केवल प्रसाद नहीं बल्कि भक्तों के प्रेम और आस्था का प्रतीक है। मंदिर की रसोई में रोजाना चार बार भोग तैयार किया जाता है — बाल भोग, राजभोग, संध्या भोग और शयन भोग।

चार समय के भोग का दिव्य विधान

रामलला को चार बार भोग लगाया जाता है —

  1. बाल भोग (सुबह) – दूध, फल, माखन-मिश्री और सूखे मेवे से तैयार।

  2. राजभोग (दोपहर 12 बजे) – मंदिर की मुख्य आरती के बाद खिचड़ी, पूरी, सब्जी, पायसम आदि।

  3. संध्या भोग (शाम 7:30 बजे) – हल्का भोजन और प्रसाद के रूप में फलाहार।

  4. शयन भोग (रात 8:30 बजे) – मिठाई, मिश्री और दूध के साथ प्रभु को विश्राम कराया जाता है।

मंदिर के पुजारियों के अनुसार, हर दिन मौसम और तिथि के अनुसार भोग में परिवर्तन होता है। ठंड के दिनों में गरम दूध और खीर का भोग प्रमुख रहता है, जबकि गर्मियों में फलों और शीतल व्यंजनों का अधिक उपयोग किया जाता है।

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वस्त्र और श्रृंगार का अद्भुत संयोजन

प्रभु रामलला के वस्त्र भी मौसम और अवसर के अनुसार बदले जाते हैं।

  • गर्मियों में सूती और हल्के वस्त्र पहनाए जाते हैं।

  • सर्दियों में ऊनी वस्त्र, स्वेटर और शॉल से प्रभु को अलंकृत किया जाता है।

मार्गशीर्ष माह की इस प्रतिपदा को रामलला को गुलाबी और सुनहरे रंग के वस्त्र पहनाए गए, जिन पर चांदी की कढ़ाई की गई थी। गले में फूलों की माला दिल्ली से विशेष रूप से मंगाई गई थी, जिसमें गुलाब, रजनीगंधा और कमल के फूल शामिल थे।

श्रृंगार के बाद मंदिर में घंटियों की गूंज और भक्ति संगीत से वातावरण गुंजायमान हो गया।

आरती और दर्शन का समय

रामलला की पहली आरती सुबह 6.30 बजे और दोपहर की आरती 12 बजे होती है। संध्या आरती शाम 7:30 बजे होती है। आरती के बाद भक्तों को दर्शन की अनुमति रात 7:30 बजे तक ही होती है। उसके बाद प्रभु को शयन करवाया जाता है।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, भक्तों की सुविधा के लिए रामलला का लाइव दर्शन भी किया जा सकता है। “Ayodhya Ramlala Aarti Live Darshan 6 November” नाम से आज के दिन का विशेष प्रसारण सोशल मीडिया और तीर्थ क्षेत्र की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

भक्ति और संस्कृति का संगम

अयोध्या धाम में यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि भारतीय संस्कृति का भी परिचायक है। मंदिर के पुजारी बताते हैं —

“रामलला का श्रृंगार केवल सौंदर्य नहीं, यह भावनाओं का उत्सव है। हर फूल, हर वस्त्र और हर भोग में भक्तों की भावना बसती है।”

श्रद्धालु श्रद्धा से कहते हैं कि प्रभु रामलला के इस दिव्य रूप को देखकर मन पवित्र हो जाता है।

Ashish Sinha

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