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Al Falah University Under Scanner: आतंकी कनेक्शन से हड़कंप, सात डॉक्टर समेत 13 हिरासत में

अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर गंभीर सवाल: आतंकी कनेक्शन से हड़कंप, सात डॉक्टर समेत 13 हिरासत में

कानपुर/फरीदाबाद। फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। बीते कुछ दिनों में तीन डॉक्टरों के आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने और हाल ही में सात डॉक्टरों सहित 13 लोगों को हिरासत में लिए जाने से यह संस्थान विवादों के घेरे में आ गया है।

यूनिवर्सिटी में छानबीन और प्रशासन की चुप्पी

सोमवार को दिल्ली और फरीदाबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने यूनिवर्सिटी परिसर में छापेमारी की। पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाए गए सात डॉक्टरों समेत 13 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक कई संदिग्धों के व्हाट्सएप कॉल डिटेल्स डिलीट मिले, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।

यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर भूपेंद्र कौर और मेडिकल अधीक्षक डॉ. जमील से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन सुरक्षा गार्ड ने प्रवेश की अनुमति नहीं दी। दोनों के फोन भी स्विच ऑफ मिले।

2006 में हुई थी स्थापना, अब छवि पर संकट

अल-फलाह मेडिकल कॉलेज की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी और 2015 में इसे यूजीसी द्वारा यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया।
अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित यह संस्थान 76 एकड़ भूमि में फैला है और इसके अंतर्गत अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर तथा 650 बेड का चैरिटेबल अस्पताल भी संचालित होता है।

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आतंक से जुड़ी कड़ियाँ

सूत्रों के अनुसार, डॉ. उमर, जो दिल्ली बम धमाके में शामिल था और मारा गया, वह भी इसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था।
इसके अलावा, 12 दिन पहले गिरफ्तार किए गए डॉ. मुज्जमिल भी पिछले तीन वर्षों से यहां कार्यरत थे।
एक अन्य डॉक्टर डॉ. शाहीन, जो पहले गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज, कानपुर में सहायक प्रोफेसर थीं, 2013 में अचानक गायब हो गईं और 2021 में उन्हें कॉलेज से बर्खास्त कर दिया गया। बाद में उन्हें अल-फलाह यूनिवर्सिटी में नौकरी मिल गई।
अब यह सवाल उठ रहा है कि बिना बैकग्राउंड जांच के उन्हें कैसे नियुक्त कर लिया गया।

सवालों के घेरे में यूनिवर्सिटी प्रशासन

लगातार तीन डॉक्टरों के नाम आतंकी नेटवर्क से जुड़ने और सात डॉक्टरों समेत 13 लोगों की हिरासत में लिए जाने के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी की भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब जांच एजेंसियां इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि आखिर कैसे यह शिक्षण संस्थान आतंकी नेटवर्क के ठिकाने में तब्दील हो गया और यूनिवर्सिटी प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी।

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