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कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज: सिद्धारमैया-शिवकुमार गुट आमने-सामने

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में सत्ता परिवर्तन की चर्चा एक बार फिर गर्म हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर बढ़ती खींचतान ने कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी राजनीतिक हलचल के बीच गुरुवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री आवास में अपने करीबी नेताओं और मंत्रियों के साथ अहम बैठक की।

बैठक में गृह मंत्री जी. परमेश्वरा, मंत्री सतीश जारकीहोली, महादेवप्पा, वेंकटेश और विधायक राजन्ना शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में सरकार की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और दिल्ली में शिवकुमार गुट की सक्रियता पर चर्चा हुई।


खड़गे ने दिया बड़ा बयान: “सबको बुलाकर चर्चा करेंगे”

सत्ता परिवर्तन की चर्चाओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी चुप्पी तोड़ते हुए कहा:

“हम सभी को बुलाकर चर्चा करेंगे, उसमें राहुल गांधी भी रहेंगे। हम एक टीम हैं और सामूहिक चर्चा के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।”

इस बयान को कर्नाटक कांग्रेस में चल रहे शक्ति-संघर्ष पर हाईकमान की औपचारिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है।

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ढाई-ढाई साल फॉर्मूले की गूंज — शिवकुमार का दावा बरकरार

कांग्रेस सूत्रों की मानें तो विधायकों में असंतोष और सत्ता परिवर्तन की मांग को देखते हुए 1 दिसंबर तक किसी बड़े फैसले की संभावना है।
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का दावा है कि विधानसभा चुनाव जीतने के बाद ढाई साल बाद सत्ता परिवर्तन का वादा हुआ था। दूसरी ओर सिद्धारमैया गुट इसे सिरे से नकारता रहा है।


शिवकुमार का इशारों में संदेश: “शब्द की ताकत दुनिया की ताकत है”

दिल्ली में मौजूद शिवकुमार गुट लगातार हाईकमान पर दबाव बनाए हुए है। एक कार्यक्रम में शिवकुमार ने कहा:

“शब्द की ताकत दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है। वादा निभाना सबसे बड़ी शक्ति है, चाहे वह राष्ट्रपति हों, जज हों या कोई आम व्यक्ति।”

इसके बाद उन्होंने ‘कुर्सी’ पर तंज कसते हुए कहा:

“जो मेरे पीछे खड़े हैं, उन्हें कुर्सी की कीमत नहीं पता। कुर्सी मिली है तो बैठो…पर वे फिर भी खड़े रहते हैं!”

उनकी टिप्पणी को सीधा संदेश माना जा रहा है कि नेतृत्व परिवर्तन का वादा निभाया जाए।


शिवकुमार समर्थक दिल्ली में डटे, सिद्धारमैया लॉबिंग में जुटे

शिवकुमार गुट के कई विधायक और नेता दिल्ली में जमे हुए हैं और नेतृत्व से जल्द फैसले की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी अब सक्रिय हो गए हैं और अपने समर्थक विधायकों को एकजुट कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा स्थिति कांग्रेस सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है यदि समय पर नेतृत्व स्पष्ट नहीं किया गया।


 

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