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Raipur News: छत्तीसगढ़ में देश का पहला “रक्षक” बाल अधिकार संरक्षण पाठ्यक्रम शुरू, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में एमओयू साइन

रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और छह विश्वविद्यालयों के बीच देश के पहले ‘रक्षक’ बाल अधिकार संरक्षण पाठ्यक्रम हेतु एमओयू साइन। जानें पाठ्यक्रम की खासियत, लाभ और महत्व।

Raipur News: छत्तीसगढ़ में देश का पहला “रक्षक” बाल अधिकार संरक्षण पाठ्यक्रम शुरू, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में एमओयू साइन

रायपुर।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में सोमवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों के बीच देश के पहले अभिनव “रक्षक – बाल अधिकार संरक्षण पर एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम” के संचालन हेतु एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह पाठ्यक्रम बाल अधिकार, संरक्षण तंत्र, संवेदनशीलता एवं कानूनी ढांचे की गहन समझ विकसित करने वाला, देश में अपनी तरह का पहला शैक्षणिक कार्यक्रम है।

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कार्यक्रम में अनेक विश्वविद्यालयों के कुलपति, अधिकारी और विशेषज्ञ हुए शामिल

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—

  • छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा
  • पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के कुलसचिव प्रो. शैलेंद्र पटेल, प्रो ए.के. श्रीवास्तव
  • संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा के कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव शारदा प्रसाद त्रिपाठी
  • कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति एवं रायपुर संभाग आयुक्त महादेव कावरे, कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा
  • आंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. टी. रामाराव, कुलसचिव डॉ. रूपाली चौधरी
  • एमिटी विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. पीयूष कांत पांडेय, कुलसचिव डॉ. सुरेश ध्यानी
  • शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई-दुर्ग के चांसलर डॉ. आई.पी. मिश्रा, कुलपति डॉ. ए.के. झा, डॉ. जया मिश्रा
  • आयोग के सचिव प्रतीक खरे
    साथ ही विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

क्यों जरूरी था यह पाठ्यक्रम?

छत्तीसगढ़ के किसी भी विश्वविद्यालय में अब तक ऐसा कोई पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं था जो युवाओं को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित करे और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए।

इस आवश्यकता को देखते हुए आयोग ने “रक्षक” नामक एक वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम तैयार किया है। इसमें शामिल होंगे—

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  • बाल संरक्षण से जुड़े विधिक प्रावधान
  • विभागीय योजनाएं और संस्थागत कार्यप्रणाली
  • बाल संरक्षण इकाइयों की प्रक्रिया
  • प्रायोगिक प्रशिक्षण
  • संवेदनशीलता और जागरूकता आधारित पाठ

आयोग पाठ्यक्रम संचालन, प्रशिक्षण, विशेषज्ञ परामर्श और मार्गदर्शन निःशुल्क उपलब्ध कराएगा।


ये छह विश्वविद्यालय “रक्षक” पाठ्यक्रम शुरू करेंगे

  1. पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर
  2. संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा
  3. कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर
  4. आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर
  5. एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर
  6. शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई-दुर्ग

उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा बोले—‘ऐतिहासिक कदम’

उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि यह पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने आयोग और सभी विश्वविद्यालयों को बधाई देते हुए कहा—
“यह पाठ्यक्रम बाल अधिकारों के क्षेत्र में विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करेगा और युवा पीढ़ी के लिए नए अवसर खोलेगा।”


महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा—‘यह राष्ट्रीय स्तर का नवाचार’

मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि—

  • बच्चों से भिक्षावृत्ति
  • परित्यक्त बच्चों का पुनर्वास
  • संवेदनशील मामलों का समाधान

ये सभी अत्यंत चुनौतीपूर्ण विषय हैं।
उन्होंने कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम” संवेदनशील, सजग और सेवा-भावी युवा तैयार करेगा और आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनेगा।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बधाई, कहा—‘छत्तीसगढ़ सुशासन की ओर बढ़ रहा’

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा व उनकी टीम को पाठ्यक्रम रिकॉर्ड समय में तैयार करने पर बधाई दी।

उन्होंने कहा कि—

  • पिछले दो वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अधिकांश वादे पूरे हुए हैं
  • किसानों के बकाया बोनस, महतारी वंदन योजना, सबके लिए आवास जैसे संकल्प पूर्ण हुए
  • 350 से अधिक प्रशासनिक सुधार लागू किए गए
  • सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना सुशासन को मजबूत करेगी

सीएम साय ने “रक्षक पाठ्यक्रम” को युवाओं के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा—
“यह पाठ्यक्रम न केवल रोजगार देगा बल्कि बच्चों के संरक्षण और मार्गदर्शन में विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करेगा।”


 

Ashish Sinha

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