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हसदेव अरण्य खनन पर विधानसभा में घमासान, वन मंत्री के दावे बनाम भूपेश बघेल के आरोप

हसदेव और तमनार में खनन पर सियासी संग्राम: वन मंत्री के दावों को भूपेश बघेल ने बताया भ्रामक, विपक्ष का सदन में हंगामा

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में हसदेव अरण्य, तमनार और बस्तर क्षेत्र में खनन व वृक्ष कटाई को लेकर बुधवार को जोरदार सियासी टकराव देखने को मिला। विपक्ष द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर सरकार के जवाब के बाद चर्चा अस्वीकार कर दी गई, जिससे नाराज़ विपक्षी विधायक गर्भगृह में घुस गए और हंगामा किया। इसके बाद गर्भगृह में प्रवेश करने वाले विधायक स्वतः निलंबित माने गए।

वन मंत्री केदार कश्यप का जवाब

वन मंत्री केदार कश्यप ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह गलत है कि रिपोर्ट के प्रावधानों का उल्लंघन कर कार्यवाही की गई है या बस्तर के भानुप्रतापपुर स्थित आरीडोंगरी क्षेत्र में ‘घने जंगल’ को उजाड़ा गया है।

उन्होंने बताया कि—

  • वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम के अंतर्गत गोदावरी पावर एंड इस्पात को वर्ष 2008 और 2015 में 138.960 हेक्टेयर वन भूमि व्यपवर्तन की स्वीकृति मिली थी।
  • स्वीकृत माइनिंग प्लान और नियमों के अनुसार 28,922 वृक्षों की कटाई की गई है।
  • हसदेव अरण्य कोलफील्ड के लिए NGT और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत ICFRE और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून द्वारा जैव विविधता अध्ययन किया गया, जिसमें परसा ईस्ट और बासेन तथा परसा कोल ब्लॉक को “Can be Considered” श्रेणी में रखा गया है।

वन मंत्री ने कहा कि यह कहना गलत है कि हसदेव जैसे क्षेत्र को उजाड़ा जा रहा है या सरकार को वन, पर्यावरण और जैव विविधता की चिंता नहीं है।

तमनार क्षेत्र पर सरकार का पक्ष

मंत्री ने बताया कि—

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  • रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में दो स्वीकृत खनन प्रकरणों में नियमानुसार ग्रामसभा आयोजित की गई है।
  • महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड को 214.869 हेक्टेयर वन भूमि व्यपवर्तन की स्वीकृति 27 जनवरी 2023 को मिली।
  • 3,684 वृक्षों की अनुमति में से अब तक केवल 1,124 वृक्षों की कटाई हुई है।
  • जेएसपीएल के गारेपेलमा कोल ब्लॉक 4/1 में 5,526 वृक्षों की कटाई की गई।
  • कुल मिलाकर तमनार क्षेत्र में 6,650 वृक्षों की कटाई नियमों के तहत हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो वर्षों में व्यपवर्तित वन भूमि के एवज में 1,780.109 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 17.8 लाख पौधे रोपित किए जाएंगे और प्रत्येक परियोजना में वन्यप्राणी संरक्षण योजना अनिवार्य है।

विपक्ष का पलटवार

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार के जवाब को भ्रामक बताते हुए कहा—

  • पहले अशासकीय संकल्प पारित हुआ था कि कोई नई खदान नहीं खुलेगी, फिर भी सरगुजा से बस्तर तक जंगलों की कटाई तेज़ी से हो रही है।
  • जहां खदानें खोली गईं, वहां वास्तविक ग्रामसभा नहीं हुई; दूरस्थ ग्रामसभाओं को 15 मिनट में निपटा दिया गया।
  • सरकार गंभीर सवालों के जवाब में बस्तर ओलंपिक और टाइगर रिज़र्व की बातें कर रही है, जो विषय से भटकाने वाला प्रयास है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण की दृष्टि से समृद्ध राज्य है, लेकिन कोयला खनन से मानव-हाथी संघर्ष और प्रदूषण बढ़ रहा है। यह पूरे प्रदेश के लिए त्रासदी साबित हो सकता है।

सदन में हंगामा और निलंबन

स्थगन पर चर्चा की अनुमति न मिलने से नाराज़ विपक्ष ने गर्भगृह में प्रवेश कर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके चलते संबंधित विधायक स्वतः निलंबित माने गए। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान माहौल काफी गर्म रहा।


 

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