किसका है बस्तर? पुलिस भर्ती में स्थानीय युवाओं की अनदेखी पर भूपेश बघेल का सरकार पर तीखा हमला

किसका है बस्तर? पुलिस भर्ती में स्थानीय युवाओं की अनदेखी पर भूपेश बघेल का तीखा हमला, सरकार पर खड़े किए गंभीर सवाल

ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM

✍️ प्रदेश खबर | रायपुर |छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बस्तर केंद्र में आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने बस्तर संभाग में पुलिस भर्ती को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि नक्सल प्रभावित बस्तर में शांति स्थापना और सुरक्षा की सबसे बड़ी कड़ी रहे स्थानीय युवाओं को अब ही हाशिए पर धकेला जा रहा है, जबकि बाहरी लोगों को पुलिस भर्ती में प्राथमिकता दी जा रही है।

भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर नारायणपुर, बस्तर से आए कुछ युवाओं से बातचीत का हवाला देते हुए लिखा कि पुलिस भर्ती में बहुत कम स्थानीय युवक चयनित हो पाए हैं और यह स्थिति पूरे बस्तर संभाग की है। उनके इस बयान के बाद राज्य की सियासत में नई बहस छिड़ गई है।


“नक्सलमुक्ति की लड़ाई में स्थानीय युवाओं की थी अहम भूमिका”

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में नक्सलमुक्ति की दिशा में ठोस और संवेदनशील नीति अपनाई गई थी, जिसमें स्थानीय युवाओं को सुरक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया गया। उन्होंने बताया कि बस्तर फोर्स का गठन स्थानीय युवाओं को ध्यान में रखकर किया गया था, ताकि वे अपने क्षेत्र, भाषा, संस्कृति और सामाजिक परिस्थितियों को समझते हुए बेहतर ढंग से काम कर सकें।

बघेल के अनुसार,

“हमने भर्ती प्रक्रिया में थाने स्तर तक यह ध्यान रखा था कि स्थानीय युवाओं को अवसर मिले। यही वजह है कि नक्सलियों के खिलाफ जो अभियान आज सफल होते दिखाई दे रहे हैं, उनमें उन युवाओं की बड़ी भूमिका है।”

उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं को शामिल करने से सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के बीच भरोसे का वातावरण बना, जिससे नक्सलियों की पकड़ कमजोर हुई।


पुलिस भर्ती पर सवाल: बाहरी लोग, स्थानीय बेरोजगार

भूपेश बघेल ने मौजूदा पुलिस भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज स्थिति ठीक उलट है
उनका आरोप है कि

  • बस्तर के स्थानीय युवाओं को भर्ती में पीछे किया जा रहा है
  • बाहरी जिलों और राज्यों के युवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है
  • इससे बस्तर के युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय युवाओं को रोजगार और सम्मान नहीं मिला, तो इसका असर क्षेत्र की सामाजिक और सुरक्षा स्थिति पर पड़ेगा।


मुख्यमंत्री, गृहमंत्री या अमित शाह? सीधा राजनीतिक सवाल

भूपेश बघेल ने अपने बयान में सीधे तौर पर राज्य और केंद्र दोनों सरकारों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने तीखा सवाल पूछा—

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)
17a09f88-37fa-496a-8923-b0e0bac9f15d

“नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा लड़ रहे हैं या फिर सीधे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लड़ रहे हैं?”

इस सवाल को राजनीतिक विश्लेषक राज्य की कानून-व्यवस्था पर केंद्र के बढ़ते हस्तक्षेप से जोड़कर देख रहे हैं। बघेल का इशारा साफ है कि स्थानीय जरूरतों और जमीनी सच्चाइयों को नजरअंदाज कर नीतियां बनाई जा रही हैं


“आज ताली बजवा लेंगे, कल क्या होगा?”

अपने बयान में भूपेश बघेल ने सरकार को भविष्य के प्रति सचेत करते हुए कहा—

“आज आप ताली बजवा लेंगे, लेकिन कल क्या होगा, यह भी तो ध्यान रखिए। स्थानीय युवाओं को बेरोजगार छोड़ना बस्तर के भविष्य के लिए अच्छा नहीं है।”

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बस्तर वहां के लोगों का है और उसकी सुरक्षा, विकास और शांति की जिम्मेदारी भी उन्हीं को केंद्र में रखकर तय की जानी चाहिए।

“बस्तर उनका है, उनका ही रहने दीजिए।”


भिलाई से बस्तर तक: संगठनात्मक सक्रियता

पुलिस भर्ती के मुद्दे के अलावा भूपेश बघेल इन दिनों लगातार जनसंपर्क और संगठनात्मक कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आ रहे हैं।
उन्होंने आज भिलाई निवास में आगंतुकों से मुलाकात कर संवाद किया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संगठन की मजबूती पर चर्चा की।

इसके साथ ही वे गंडई, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला के दौरे पर भी रहे, जहां विभिन्न स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका आत्मीय स्वागत किया।


गुरु घासीदास जयंती में सहभागिता

खैरागढ़ के ग्राम खारा में आयोजित गुरु घासीदास जयंती कार्यक्रम में शामिल होकर भूपेश बघेल ने बाबा घासीदास को नमन किया।
उन्होंने कहा कि

“बाबा घासीदास जी के विचार सामाजिक समरसता और समानता का संदेश देते हैं, जिसे आज के दौर में आत्मसात करना बेहद जरूरी है।”


खेल और युवाओं से जुड़ाव: रेंगाखार प्रीमियर लीग

कबीरधाम जिले के ग्राम रेंगाखार में आयोजित “रेंगाखार प्रीमियर लीग” के फाइनल मुकाबले में शामिल होकर भूपेश बघेल ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।
उन्होंने विजेता टीम को पुरस्कार प्रदान कर कहा कि खेल युवाओं को सकारात्मक दिशा देता है और नशा व हिंसा से दूर रखता है

भूपेश बघेल के इन बयानों और गतिविधियों को केवल एक बयानबाजी नहीं, बल्कि बस्तर, सुरक्षा, रोजगार और स्थानीय अधिकारों को लेकर बड़े राजनीतिक नैरेटिव के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए

  • स्थानीय बनाम बाहरी
  • राज्य बनाम केंद्र
  • सुरक्षा बनाम रोजगार

जैसे मुद्दों को एक साथ जोड़कर सरकार को घेरने की रणनीति में नजर आ रही है