मोदी सरकार में गैस इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति, 15 हजार से 25 हजार किमी तक पहुंचा नेटवर्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गैस इंफ्रास्ट्रक्चर में क्रांति, 15 हजार से 25 हजार किमी तक पहुंचा पाइपलाइन नेटवर्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर साझा जानकारी में बताया कि वर्ष 2014 में देश में गैस पाइपलाइन नेटवर्क जहां लगभग 15,000 किलोमीटर तक सीमित था, वहीं आज यह बढ़कर 25,000 किलोमीटर से अधिक हो चुका है। इसे भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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भाजपा के अनुसार यह परिवर्तन सिर्फ बुनियादी ढांचे के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वच्छ ऊर्जा आधारित भारत की मजबूत नींव रख रहा है। देशभर में तेजी से गैस पाइपलाइन का विस्तार किया जा रहा है, जिससे दूर-दराज के इलाकों तक भी गैस की पहुंच सुनिश्चित हो रही है। इससे उद्योगों, परिवहन और घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा मिल रही है।

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प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने वन नेशन–वन गैस ग्रिड की सोच को साकार करते हुए CNG स्टेशनों की संख्या बढ़ाई है और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए CBG (कंप्रेस्ड बायो गैस) प्लांट्स की स्थापना को गति दी है। इन प्रयासों से न केवल प्रदूषण में कमी आ रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है, क्योंकि CBG प्लांट्स में कृषि अपशिष्ट का उपयोग किया जा रहा है।

भाजपा ने अपने संदेश में कहा कि गैस इंफ्रास्ट्रक्चर का यह विस्तार “स्वच्छ भारत, सशक्त भारत” की परिकल्पना को आगे बढ़ा रहा है। स्वच्छ ईंधन से घरों में बेहतर स्वास्थ्य, शहरों में कम प्रदूषण और वाहनों के लिए किफायती ईंधन उपलब्ध हो रहा है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि गैस आधारित अर्थव्यवस्था से भारत अपने कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि भारत विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी दुनिया के लिए उदाहरण बने।

यह गैस इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति आने वाले वर्षों में भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने की क्षमता रखती है और एक सस्टेनेबल टुमॉरो की ओर मजबूत कदम है।