
भारत को बदनाम करना बंद करें, बांग्लादेश–पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत देखें: किरेन रिजिजू
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति बेहद दयनीय है। उन्होंने भारत में रहकर देश को बदनाम करने वालों पर कड़ा प्रहार किया।
“भारत को बदनाम करना बंद करें” – अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर किरेन रिजिजू का तीखा बयान
नई दिल्ली।केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने भारत में अल्पसंख्यकों के मुद्दे को लेकर देश की छवि पर सवाल उठाने वालों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो लोग भारत में रहते हुए देश को बदनाम करने का प्रयास करते हैं, उन्हें पहले बांग्लादेश और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की भयावह स्थिति को देखना चाहिए।
किरण रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने बयान में कहा,
“ज़रा बांग्लादेश और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की दयनीय स्थिति देखो, उनके भयानक जीवन के बारे में सोचो। विभाजन के दौरान जिन लोगों का इलाका भारत का हिस्सा बन गया, वे बेहद भाग्यशाली हैं। भारत में आज़ादी का आनंद लेते हुए भारत को ही बदनाम करना बंद करें।”
विभाजन की त्रासदी का किया उल्लेख
केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में 1947 के विभाजन का संदर्भ देते हुए कहा कि उस ऐतिहासिक घटना के दौरान जिन समुदायों और परिवारों का भूभाग भारत में शामिल हुआ, वे आज सौभाग्यशाली हैं।
उन्होंने कहा कि भारत ने अपने नागरिकों को न केवल लोकतांत्रिक अधिकार, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक सुरक्षा और समान अवसर प्रदान किए हैं।
रिजिजू के अनुसार, विभाजन के बाद भारत ने बहुलतावादी समाज के रूप में खुद को स्थापित किया, जहां विभिन्न धर्म, भाषा और संस्कृतियों के लोग एक साथ रहते हैं।
पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर सवाल
किरण रिजिजू ने परोक्ष रूप से बांग्लादेश और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की ओर ध्यान दिलाया।
उन्होंने कहा कि इन देशों में अल्पसंख्यक समुदायों को आए दिन
- हिंसा
- सामाजिक भेदभाव
- धार्मिक उत्पीड़न
- और असुरक्षा
का सामना करना पड़ता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रिजिजू का यह बयान उन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और चर्चाओं की ओर संकेत करता है, जिनमें पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर चिंता जताई जाती रही है।
भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का बचाव
केंद्रीय मंत्री ने भारत की लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि भारत में हर नागरिक को
✔ बोलने की आज़ादी
✔ धर्म मानने की स्वतंत्रता
✔ और न्याय पाने का अधिकार
संविधान के तहत सुनिश्चित किया गया है।
उन्होंने कहा कि भारत की यही ताकत है कि यहां असहमति और आलोचना की भी जगह है, लेकिन इस आज़ादी का उपयोग देश को बदनाम करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
राजनीतिक हलकों में तेज़ प्रतिक्रिया
किरण रिजिजू के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
भाजपा समर्थकों ने इसे
➡ देश की सच्चाई सामने रखने वाला बयान
बताया, वहीं विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इसे
➡ आलोचना से ध्यान भटकाने वाला
कहते हुए सवाल भी उठाए।
हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि भारत की तुलना उन देशों से करना जहां अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं, यह दिखाता है कि भारत आज भी दुनिया का सबसे मजबूत लोकतंत्र है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं।
किरण रिजिजू का बयान ऐसे समय में आया है, जब
- मानवाधिकार
- धार्मिक स्वतंत्रता
- और लोकतांत्रिक मूल्यों
को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस जारी है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि भारत को लेकर फैलाई जाने वाली नकारात्मक छवि को तथ्यों के आधार पर जवाब देना आवश्यक है।
“भारत को बदनाम करने की प्रवृत्ति पर रोक लगे”
केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में साफ शब्दों में कहा कि
भारत में रहकर, भारत की आज़ादी का लाभ उठाकर,
और फिर उसी देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करना
एक गलत और गैर-जिम्मेदाराना प्रवृत्ति है।
उन्होंने युवाओं और बुद्धिजीवियों से अपील की कि वे भारत की आलोचना करें, लेकिन राष्ट्रहित और तथ्यों के दायरे में रहकर।
राजनीतिक संदेश और आने वाले संकेत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किरण रिजिजू का यह बयान केवल एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि
➡ राष्ट्रवाद
➡ सांस्कृतिक पहचान
➡ और पड़ोसी देशों से तुलना
के ज़रिए राजनीतिक संदेश देने की रणनीति का हिस्सा भी है।
आगामी चुनावी माहौल में ऐसे बयान जनता के बीच राष्ट्रवाद और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को और धार दे सकते हैं।








