Bhila Steel Plant Privatization: टी.एस. सिंहदेव का बड़ा बयान, बोले– रोजगार और सामाजिक न्याय पर हमला

भिलाई स्टील प्लांट के निजीकरण पर टी.एस. सिंहदेव का तीखा प्रहार

बोले– यह सिर्फ़ आर्थिक फैसला नहीं, रोज़गार, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय संपत्ति पर हमला

रायपुर।छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के प्रस्तावित निजीकरण को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में उन्होंने कहा कि भिलाई स्टील प्लांट देश की औद्योगिक विरासत का अनमोल रत्न है, जिसे निजीकरण के नाम पर बेचने की तैयारी की जा रही है।

WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
file_000000009a407207b6d77d3c5cd41ab0
WhatsApp Image 2026-06-26 at 00.16.05 (1)

टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि भिलाई स्टील प्लांट एक लाभकारी सार्वजनिक उपक्रम (PSU) है, जो पंडित जवाहरलाल नेहरू के आत्मनिर्भर भारत के सपने का प्रतीक रहा है। दशकों तक इस प्लांट ने देश के औद्योगिक विकास को मजबूती दी, लेकिन अब इसे निजी हाथों में सौंपने की योजना बनाई जा रही है।

कर्मचारियों की संख्या आधी करने का आरोप

सिंहदेव ने आरोप लगाया कि निजीकरण की प्रक्रिया के तहत प्लांट में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या को आधे से भी कम करने की योजना है।
उन्होंने कहा कि यह केवल नौकरियों का नुकसान नहीं, बल्कि हज़ारों परिवारों की रोज़ी-रोटी पर सीधा वार है।

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)

क्वार्टरों की ज़मीन रियल एस्टेट को देने की तैयारी

टी.एस. सिंहदेव ने यह भी कहा कि कर्मचारियों के क्वार्टरों की ज़मीन निजी रियल एस्टेट कंपनियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है, ताकि वहां आवासीय परियोजनाएं विकसित की जा सकें।
उन्होंने इसे श्रमिकों के घरों की सुरक्षा और भविष्य पर हमला बताया।

आरक्षण व्यवस्था कमजोर होने की चेतावनी

उन्होंने निजीकरण के एक और गंभीर पहलू की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि इससे PSU में लागू आरक्षण व्यवस्था कमजोर होगी, जिससे
दलित, आदिवासी, पिछड़े और वंचित वर्गों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला होगा।
सिंहदेव के अनुसार, नौकरियों में सामाजिक न्याय को चुपचाप छीना जा रहा है

“जनहित नहीं, मुनाफ़े की सरकार”

टी.एस. सिंहदेव ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि

“यह सरकार अब जनहित की नहीं, बल्कि रियल एस्टेट मुनाफ़े की सरकार बनती जा रही है। कुछ गिने-चुने लोगों के लाभ के लिए देश की राष्ट्रीय संपत्ति बेची जा रही है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि भिलाई स्टील प्लांट का निजीकरण केवल एक आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि रोज़गार, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय संपत्ति पर हमला है, जिसका विरोध हर जिम्मेदार नागरिक को करना चाहिए।