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रामलला को चार समय भोग, अलौकिक श्रृंगार के साथ भक्तों को प्रतिदिन दिव्य दर्शन

रामलला को चार समय लगता है भोग, अलौकिक श्रृंगार के साथ भक्तों को देते हैं दिव्य दर्शन

अयोध्या | 26 दिसंबर 2025 | अयोध्या धाम स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में विराजमान ब्रह्मांड नायक प्रभु श्री रामलला की सेवा-पूजा अत्यंत विधिविधान और समय-सारिणी के अनुसार संपन्न होती है। रामलला को प्रतिदिन चार समय भोग अर्पित किया जाता है और हर समय के अनुसार अलग-अलग व्यंजन परोसे जाते हैं, जो मंदिर की पवित्र रसोई में ही तैयार होते हैं।

दिन की शुरुआत बाल भोग से होती है। इसी क्रम में पौष माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि, विक्रम संवत 2082 (26 दिसंबर, शुक्रवार) को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र, अयोध्या धाम में प्रभु श्री रामलला का शुभ और अलौकिक श्रृंगार किया गया।


मौसम के अनुसार बदलते हैं वस्त्र

रामलला को हर दिन और हर मौसम के अनुसार अलग-अलग वस्त्र धारण कराए जाते हैं।

  • गर्मियों में सूती और हल्के वस्त्र
  • सर्दियों में स्वेटर और ऊनी वस्त्र पहनाए जाते हैं

प्रभु को सजाई जाने वाली फूलों की माला दिल्ली से मंगाई जाती है, जिससे श्रृंगार और भी भव्य दिखाई देता है।

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आरती और दर्शन का समय

  • प्रथम आरती (मंगला आरती) – सुबह 6:30 बजे
  • प्रभु को जगाने के साथ पूजन प्रारंभ
  • लेप, स्नान और वस्त्र धारण के बाद श्रृंगार
  • भोग आरती – दोपहर 12:00 बजे
  • संध्या आरती – शाम 7:30 बजे
  • शयन आरती – रात 8:30 बजे

रामलला के दर्शन शाम 7:30 बजे तक ही किए जा सकते हैं, इसके बाद प्रभु को शयन कराया जाता है।


प्रतिदिन नए रूप में दर्शन

अयोध्या में विराजमान संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी प्रभु श्री रामलला भक्तों को प्रतिदिन नए और दिव्य रूप में दर्शन देते हैं। भव्य श्रृंगार, विधिवत भोग और आरती के साथ प्रभु की सेवा-पूजा निरंतर श्रद्धा और आस्था के साथ संपन्न होती है।

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