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Khaleda Zia Passes Away: बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया का निधन, 80 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और BNP प्रमुख खालिदा जिया का ढाका में निधन हो गया। ‘बैटल ऑफ बेगम्स’ के एक युग का अंत।

Khaleda Zia Passes Away: बांग्लादेश की राजनीति की ‘बैटल ऑफ बेगम्स’ का एक अध्याय समाप्त, खालिदा जिया का निधन

ढाका। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख खालिदा जिया का सोमवार सुबह निधन हो गया। उन्होंने 80 वर्ष की उम्र में सुबह करीब 6 बजे ढाका के एवरकेयर हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। BNP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि की।

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पार्टी के अनुसार, डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। खालिदा जिया लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं और बीते 20 दिनों से वेंटिलेटर पर थीं।

‘बैटल ऑफ बेगम्स’ और बांग्लादेश की राजनीति

बांग्लादेश की राजनीति दशकों तक दो प्रमुख नेताओं—अवामी लीग की शेख हसीना और BNP की खालिदा जिया—के इर्द-गिर्द घूमती रही। मीडिया में इस प्रतिद्वंद्विता को ‘बैटल ऑफ बेगम्स’ कहा जाता था।

1980 के दशक में जब बांग्लादेश में सैन्य शासन था, तब शेख हसीना और खालिदा जिया तानाशाही के खिलाफ सड़क पर साथ-साथ आंदोलन करती थीं।
1990 में तानाशाह हुसैन मोहम्मद इरशाद की विदाई के बाद लोकतंत्र बहाल हुआ। लेकिन 1991 में खालिदा जिया के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता चला गया।

1990 के बाद हुए लगभग हर आम चुनाव में सत्ता या तो खालिदा जिया के पास रही या फिर शेख हसीना के पास।

साधारण परिवार से सत्ता के शिखर तक

खालिदा जिया का जन्म 1945 में हुआ था। उनका राजनीति से कोई पारिवारिक संबंध नहीं था।
1960 में उनकी शादी सेना अधिकारी जियाउर रहमान से हुई। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान जियाउर रहमान ने रेडियो पर स्वतंत्र बांग्लादेश की घोषणा पढ़ी थी।

1975 में शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी और 1977 में जियाउर रहमान राष्ट्रपति बने। उन्होंने ही बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की स्थापना की।
30 मई 1981 को चिटगांव में एक सैन्य विद्रोह के दौरान जियाउर रहमान की हत्या कर दी गई।

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पति की हत्या के बाद BNP कमजोर पड़ने लगी, जिसके बाद 1984 में खालिदा जिया ने पार्टी की कमान संभाली

बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री

1991 में हुए पहले लोकतांत्रिक चुनाव में जीत के साथ खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।
वे दो बार प्रधानमंत्री रहीं—

  • 1991 से 1996
  • 2001 से 2006

परिवार और राजनीतिक विरासत

खालिदा जिया के बड़े बेटे और BNP के कार्यकारी अध्यक्ष तारीक रहमान 2008 से लंदन में रह रहे थे और इसी महीने बांग्लादेश लौटे थे।
उनके छोटे बेटे अराफात रहमान का 2015 में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।

बीमारी, जेल से रिहाई और आखिरी चुनाव

राजनीतिक उथल-पुथल के बीच 6 अगस्त 2024 को खालिदा जिया को जेल से रिहा किया गया था। इसके बाद वह बेहतर इलाज के लिए लंदन गईं और चार महीने बाद 6 मई को बांग्लादेश लौटीं

सोमवार को ही उन्होंने चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था
BNP ने बोगुरा-7 सीट से उनका नामांकन भरा, जो पार्टी के लिए ऐतिहासिक सीट रही है। इसी क्षेत्र में जियाउर रहमान का घर था और खालिदा जिया ने 1991, 1996 और 2001 में इसी सीट से जीत दर्ज की थी

नामांकन के वक्त उनकी हालत बेहद नाजुक थी। वे अस्पताल में भर्ती थीं और वेंटिलेटर पर थीं, इसके बावजूद पार्टी ने उनके चुनाव लड़ने का फैसला किया।

विदेश ले जाने की तैयारी, लेकिन इजाजत नहीं

BNP के मुताबिक 29-30 दिसंबर की रात उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ी। उन्हें इलाज के लिए विदेश ले जाने की तैयारी भी की गई थी।
कतर से एक विशेष विमान ढाका पहुंच चुका था और एयरपोर्ट पर स्टैंडबाय में रखा गया था, लेकिन मेडिकल बोर्ड ने उन्हें लंदन ले जाने की अनुमति नहीं दी

कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहीं थीं

खालिदा जिया लंबे समय से

  • सीने के संक्रमण
  • लिवर और किडनी की बीमारी
  • डायबिटीज
  • गठिया
  • आंखों की समस्या
    से पीड़ित थीं।

खालिदा जिया के निधन को बांग्लादेश की राजनीति के एक पूरे युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।

Ashish Sinha

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