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जनजातीय विरासत से जुड़कर विकास की राह पर बढ़ें युवा: गुमला में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

जनजातीय विरासत से जुड़कर आगे बढ़े युवा, विकास के साथ पहचान भी रहे सुरक्षित: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

गुमला (झारखंड)।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने झारखंड के गुमला में आयोजित अंतरराज्यीय जनसंस्कृतिक समागम समारोह – कार्तिक जात्रा को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा को जोड़ने वाला यह क्षेत्र देश की प्राचीनतम जनजातीय परंपराओं का जीवंत केंद्र रहा है। यहां की नदियां, पहाड़, पठार और जंगल सदियों से भारत की सांस्कृतिक विरासत के साक्षी रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जन्मभूमि और कर्मभूमि झारखंड में आकर उन्हें तीर्थ यात्रा जैसा अनुभव होता है। बिरसा मुंडा को देशभर में सामाजिक न्याय और जनजातीय गौरव के महान प्रतीक के रूप में सम्मान प्राप्त है।

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उन्होंने गुमला जिले से जुड़े अन्य ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति ने कहा कि महान समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी जतरा टाना भगत का जन्म भी गुमला में ही हुआ था, जिन्होंने महात्मा गांधी के आदर्शों पर चलते हुए ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व किया।

राष्ट्रपति मुर्मु ने 1971 के भारत-पाक युद्ध के वीर नायक परमवीर चक्र विजेता एल्बर्ट एक्का का स्मरण करते हुए कहा कि भारत माता के इस वीर सपूत की जन्मस्थली भी गुमला जिला ही है। उन्होंने युद्ध में असाधारण वीरता और दृढ़ संकल्प का परिचय देकर देश का गौरव बढ़ाया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि जनजातीय विरासत और पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक विकास की यात्रा में तेजी से आगे बढ़ना समय की मांग है। युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है, ताकि विकास और संस्कृति के बीच संतुलन बना रहे।

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